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नाहन: पतंगबाजी के शौकीनों के लिए हाथ से तैयार की जा रहीं चरखियां

Krishan Singh Updated Wed, 26 Aug 2026 05:16 PM IST

रक्षाबंधन पर्व पर रियासतकाल से चली आ रही पतंगबाजी की परंपरा नाहन में आज भी जिंदा है। हालांकि पहले की अपेक्षा इसमें भारी गिरावट आई है। बावजूद इसके पतंगबाजी के शौकीन लोग रक्षाबंधन पर पतंग जरूर उड़ाते हैं। लोगों के इस शौक को जिंदा रखने में शहर के वार्ड नंबर आठ के रानीताल निवासी राजेश कुमार अपना अहम किरदार निभा रहे हैं। राजेश कुमार 23 साल से चरखियां बनाने के पुश्तैनी कार्य को कर रहे हैं। इनसे पहले इनके दिवंगत पिता किशनचंद चरखियां बनाया करते थे। उनकी मृत्यु के बाद राजेश कुमार ने पतंबाजी के शौकीनों के लिए इस व्यवसाय को जिंदा रखा हुआ है। हालांकि इसमें अब कमाई नहीं रह गई है। बावजूद इसके रक्षाबंधन पर्व के आसपास अपने हाथों से चरखियों का निर्माण जरूर करते हैं, ताकि शहर की पुरानी परंपराएं जिंदा रहें। राजेश कुमार लकड़ी, बांस और बायरिंग का इस्तेमाल करके सुंदर-सुंदर चरखियां बना रहे हैं। इनकी बनाई चरखियां बाजार में मिलने वाली चरखियों से हजार गुणा बेहतर रहती हैं। राजेश कुमार ने बताया कि पहले नाहन में रक्षाबंधन पर्व से दो महीने पहले ही रोजाना सैंकड़ों की तादाद में पतंगें उड़ाई जाती थीं। यह सिलसिला रक्षाबंधन के बाद भी कई दिन तक चलता था। शहर की कोई छत्त ऐसी नहीं रहती थी जहां युवाओं के झुंड के झुंड पतंबाजी न करते हों। लेकिन अब इंटरनेट युग में यह हुनर खो गया है। उन्होंने बताया कि चरखी की बिक्री बहुत कम हो गई है, एक चरखी बनाने में दो से ढाई घंटे लगते हैं, लेकिन वह फिर भी चरखियां बना रहे हैं।

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