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Srinagar: No need to wander in the forests for fodder; the milk producers' cooperative union has prepared this plan.
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Srinagar: चारे के लिए जंगल में भटकने की जरूरत नहीं, दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ ने तैयार की ये योजना
पहाड़ के पशुपालकों और विशेषकर महिलाओं को अब चारे के लिए जंगलों में भटकने और जंगली जानवरों के खौफ का सामना करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। श्रीनगर के भक्तियाना स्थित आंचल डेयरी परिसर में दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ ने एक एकड़ भूमि में 'सुपर नेपियर' घास की नर्सरी तैयार कर ली है। यह पहल न सिर्फ दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में मददगार होगी, बल्कि महिलाओं को जंगल के जोखिमों से भी बचाएगी।जंगल के खतरों से सुरक्षा और हादसों में कमी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ, श्रीनगर के प्रधान प्रबंधक श्रवण कुमार शर्मा ने बताया कि उत्तराखंड में पशुपालकों, खासकर महिलाओं को घास लेने जंगल जाना पड़ता है। वहां अक्सर गुलदार, भालू जैसे जंगली जानवरों के हमलों का खतरा बना रहता है। कई बार पेड़ों से पत्तियां काटते समय गिरने से गंभीर हादसे भी हो जाते हैं। इन समस्याओं को देखते हुए विभाग ने यह कदम उठाया है, ताकि किसानों को घर के पास ही पौष्टिक हरा चारा मिल सके।मात्र एक रुपये में मिलेगी कटिंग प्रबंधक ने बताया कि नर्सरी पूरी तरह तैयार है और किसानों को मात्र एक रुपये की दर से नेपियर घास की कटिंग उपलब्ध कराई जा रही है। इसकी ग्रोथ (बढ़वार) बहुत तेजी से होती है और इसमें 'टिलर्स' (कल्ले) भी अच्छी संख्या में निकलते हैं। अगर इसे सही मात्रा में पानी मिले, तो यह साल के बारहों महीने हरा चारा देती है। सर्दियों में इसकी बढ़त थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन यह पौधा मरता नहीं है।खेत की मेड़ और बंजर जमीन पर भी होगी खेती इस घास को उगाने के लिए किसी विशेष उपजाऊ जमीन की जरूरत नहीं है। किसान इसे अपने खेतों की मेड़, खाली पड़ी जमीन या जहां अन्य खेती संभव नहीं है, वहां लगा सकते हैं। इसमें बहुत अधिक खाद-पानी की भी आवश्यकता नहीं होती। यह घास पोषक तत्वों से भरपूर है, जिससे पशुओं के दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि होती है। भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग नेपियर घास के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है और सरकार द्वारा सब्सिडी भी दी जा रही है। आने वाले समय में विभाग किसानों से यह घास खरीदेगा और उसके 'पैलेट्स' (पशु आहार की गोलियां) तैयार कर पैकेजिंग करेगा। ये पैलेट्स वापस किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उन्हें कभी भी चारे की कमी नहीं होगी।
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