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SBI भर्ती 2021: शुरू होने वाली है भारतीय स्टेट बैंक में क्लर्क भर्ती, ऐसे करें तैयारी
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SBI भर्ती 2021: शुरू होने वाली है भारतीय स्टेट बैंक में क्लर्क भर्ती, ऐसे करें तैयारी

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Digital Edition

अब यहां से मिलेगी आपको दिल्ली के लिए 'हमसफर'

आपकी यात्रा को दिल्ली तक आसान करने के लिए अब नई 'हमसफर' मिलने वाली है। इसकी रवानगी आज विधिवत रूप से होगी। इसके बाद उदयपुर सिटी से दिल्ली तक का सफर आसानी से किया जा सकेगा।

दरअसल, उदयपुर सिटी-दिल्ली सराय रोहिल्ला साप्ताहिक हमसफर एक्सप्रेस नई रेल सेवा का संचालन आज रात से शुरू होगा। रात 10:30 बजे उदयपुर सिटी स्टेशन पर होने वाले समारोह में उदयपुर सांसद अर्जुन लाल मीणा तथा चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी इसका विधिवत उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, उदयपुर महापौर चंद्रसिंह कोठारी तथा मंडल रेल प्रबंधक पुनीत चावला भी मौजूद रहेंगे।

रेलवे के अनुसार गाड़ी संख्या 22985 उदयपुर सिटी-दिल्ली सराय रोहिल्ला साप्ताहिक राजस्थान हमसफर एक्सप्रेस प्रत्येक शनिवार को उदयपुर सिटी से 23:10 बजे रवाना होकर रविवार को दोपहर 12:15 बजे दिल्ली सराय रोहिल्ला पहुंचेगी। इसी प्रकार गाड़ी संख्या 22986 दिल्ली सराय रोहिल्ला-उदयपुर सिटी राजस्थान हमसफर एक्सप्रेस प्रत्येक रविवार
दिल्ली सराय रोहिल्ला से 16:20 बजे रवाना होगा सोमवार तड़के 4:55 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी।
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भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य भानु कुमार शास्त्री का निधन

भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य एवं पूर्व सांसद भानु कुमार शास्त्री का तड़के निधन हो गया। जानकारी  के अनुसार शास्त्री का आज तड़के तीन बजे उदयपुर में निधन हो गया। उनकी अंतिम यात्रा आज सुबह करीब 10:30 बजे उदयपुर में उनके निवास शिवाजी नगर से अशोक नगर मोक्षधाम के लिए रवाना होगी।


जनसंघ के संस्थापक सदस्य रह चुके भानु कुमार शास्त्री 1977 में उदयपुर से सांसद रहे एवं खादी बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके थे और इस समय वे भारतीय जनता पार्टी के सबसे बुजुर्ग नेताओं में से एक थे। शास्त्री भारतीय जनसंघ की अंतिम पीढ़ी के अवशेषों में से एक थे जो लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी से भी वरिष्ठ थे। 
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कांग्रेस के दिग्गज को एक वोट से हराकर चर्चित रहे भाजपा विधायक का निधन

भारतीय जनता पार्टी की परेशानियों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। विशेषकर राजस्थान भाजपा में इन दिनों काफी उथुलपुथल मची हुई है। पहले उपचुनाव में मिली करारी हार उसके बाद वायरल होते वीडियो व आॅडियो पार्टी नेताओं के लिए परेशानी का सबब रहे है।

वहीं अब बीती रात एक भाजपा के विधायक का निधन हो गया है। नाथद्धारा से विधायक कल्याण सिंह चौहान बीते करीब तीन वर्ष से कैंसर से ग्रसित थे। मंगलवार देर रात उनकी तबियत बिगड़ने पर उन्हें उदयपुर के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। जहां बुधवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली। भाजपा विधायक के निधन पर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने संवेदना व्यक्त की है।
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राजस्थान: ऑनलाइन कार्यक्रम में बोले राज्यपाल- आदिवासी व गैर आदिवासी की खाई को पाटने की है जरूरत

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र शुक्रवार को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में शामिल हुए। दरअसल, उन्होंने उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ‘वागड़ अंचल का लोक साहित्य एवं संस्कृति’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं विश्वविद्यालय परिसर के छह भवनों के ऑनलाइन शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस मौके पर मिश्र ने कहा कि आदिवासी और गैर आदिवासी के बीच पनपी भेद की खाई को मिलकर पाटने की जरूरत है। इसके लिए आदिवासी समाज को उनकी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और विशिष्टताओं को बचाए रखते हुए विकास की मुख्य धारा में जोड़ना होगा। 

उन्होंने आगे कहा कि आदिवासी समाज की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान रखता है, जिसे सहेजा जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि आदिवासी क्षेत्र के युवाओं के माध्यम से इस समुदाय के रीति-रिवाज, उत्सव, परंपराओं, लोक-कथाओं और लोकगीतों सहित उपलब्ध ज्ञान को एकत्रित कर इसका डिजिटलीकरण किया जाना चाहिए ताकि भावी पीढ़ी भी इससे रूबरू हो सके। 

इस ऑनलाइन कार्यक्रम में राज्य विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. सी.पी. जोशी ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान कहा कि जनजातीय क्षेत्रों का प्राकृतिक ज्ञान उनकी अनूठी विरासत है और प्रकृति से इस निकटता के कारण ही इन क्षेत्रों के निवासियों पर कोरोना महामारी का प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम देखने को मिला।

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राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र

राजस्थान : केंद्र सरकार को मिला 56 किलो सोना, 1965 में लाल बहादुर शास्त्री को तौलने के लिए किया गया था एकत्रित

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के जिला व सत्र न्यायालय ने 56 साल पहले लाल बहादुर शास्त्री को तौलने के लिए एकत्र किए गए किए गए 56 किलो सोने को सरकार को सौंपने का आदेश दिया है। यह सोना 1965 में लाल बहादुर शास्त्री के तुलादान के लिए जुटाया गया था,लेकिन इसके पहले ही रूस के ताशकंद में उनकी मृत्यु हो गई थी। इस सोने का आज का मूल्य 28 करोड़ रुपये से ज्यादा है। 

1965 से चल रहा सोने को लेकर केस
चित्तौड़गढ़ की कोर्ट ने इस सोने को इसे केंद्र सरकार के अधीन आने वाले सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स को सौंपने का आदेश दिया है। यह सोना अभी उदयपुर के जिला कलेक्टर कार्यालय के कोषालय में रखा है। इस केस में अब तक पांच बार कोर्ट का फैसला आ चुका है। पांचों बार सरकार को सोना सौंपने का फैसला आया है। दिसंबर 1965 में छोटी सादड़ी के गुणवंत ने गणपत सहित तीन लोगों पर केस किया था। उसने दावे में कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को तोलने के लिए इकट्ठा किए गए सोने को लौटाया नहीं जा रहा है।  

गणपत ने एकत्रित किया था सोना
गणपत ने 1965 में लाल बहादुर शास्त्री को तोलने के लिए सोना इकट्ठा किया था, लेकिन इससे पहले भारत-पाकिस्तान के बीच चर्चित ताशकंद समझौते के बाद उनकी वहीं मृत्यु हो गई थी। इसके बाद 11 जनवरी 1975 को कोर्ट ने गणपत को दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई थी और यह सोना स्वर्ण नियंत्रक को सौंपने का आदेश दिया था। हालांकि 14 सितंबर 2007 को राजस्थान हाई कोर्ट ने गणपत को दोषमुक्त कर दिया था, लेकिन सोना उसे लौटाने की अपील खारिज कर दी। 

2012 में गणपत के बेटे गोवर्धन ने यह सोना मांगते हुए कोर्ट में याचिका लगाई। उसने कहा कि सोना उसके पिता का था। पुलिस ने पिता के पास से ही बरामद किया है, इसलिए उसे लौटाया जाए, लेकिन कोर्ट ने गत बुधवार को गोवर्धन की अर्जी खारिज करते हुए सोना सीजीएसटी को सौंपने का आदेश दे दिया। 
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राजस्थान: कुत्ते के काटने से गाय को हुआ रैबीज, दूध पीने के बाद परिवार को लगवाना पड़ा टीका

आपने आजतक कुत्ते के काटने बाद लोगों को रैबीज का टीका लगाते हुए देखा और सुना तो जरूर होगा। लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि किसी गाय को कुत्ते ने काटा हो और फिर उसका दूध पीने वाले लोगों ने रैबीज का टीका लगवाया हो। आप कहेंगे नहीं। मगर असंभव सा लगने वाला यह मामला राजस्थान के उदयपुर में सामने आया है।

उदयपुर के हिरणमगरी के सेटेलाइट अस्पताल में एक ही परिवार के 13 सदस्य शुक्रवार को एक साथ रेबीज का टीका लगवाने के लिए पहुंचे। परिवार ने बताया कि उनकी पालतू गाय को एक कुत्ते ने काट लिया, जिससे उसे रेबीज हो गया और उसका दूध पीने से उन्हें भी रेबीज होने का खतरा है। इसके बाद सभी को एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाई गई।

दरअसल, परिवार की गाय को कुछ दिनों पहले एक कुत्ते ने काट लिया था। सभी सदस्य उसका दूध पी रहे थे। गुरुवार को उनकी गाय बीमार हो गई और पागल जैसी हरकतें करने लगी। उपचार के लिए उसी दिन शाम को पशु चिकित्सक को बुलाया गया। पशु चिकित्सक ने उसके रेबीज से ग्रस्त होने की आशंका जताई।

चिकित्सक ने बताया कि रोगी गाय का दूध पीने से परिवार के सदस्यों को रेबीज होने का खतरा है। इसके बाद सभी सदस्यों को सेटेलाइट अस्पताल में एंटी रेबीज और टिटनेस का टीका लगवाया गया। अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक डॉ. किशनलाल धानक ने बताया कि पहली बार ऐसा कोई मामला सामने आया है।

डॉ. किशनलाल ने बताया कि गाय को रेबीज होने पर उसका दूध पीने से रेबीज होने का खतरा बना रहता है। हालांकि दूध को उबालकर पीने से इसकी संभावना कम हो जाती है। फिर भी किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इस घटना की जानकारी मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी के अलावा आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को भी दी गई है। 
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राजस्थान: पेट्रोल ने बनाया 'शतक', श्रीगंगानगर में 101 रुपये प्रति लीटर बिका तेल

प्रतीकात्मक तस्वीर

नन्हे भाई-बहन का कमाल: टीवी पर रामायण देखकर पढ़ी रामचरितमानस, फिर 2100 पन्नों में लिखी

राजस्थान के जालौर में रहने वाले मासूम भाई-बहन ने ऐसा कारनामा कर दिया, जिससे हर कोई हैरान रह गया है। दरअसल, इन दोनों बच्चों ने लॉकडाउन के दौरान रामायण देखी थी, जो उन्हें काफी पसंद आई। इसके बाद उन्होंने तीन बार रामचरितमानस पढ़ी और उसे 2100 पन्नों में उतार दिया। 

लॉकडाउन में किया कमाल
गौरतलब है कि कोरोना की वजह से देश में 25 मार्च 2020 को लॉकडाउन लग गया था। उस दौरान अधिकतर लोगों को काफी परेशानी हुई, लेकिन कुछ लोगों ने उस दौरान अनोखे कारनामे कर दिखाए। दरअसल, राजस्थान के जालौर जिले में रहने वाले दो छोटे बच्चों ने 2100 पन्नों में पूरी रामायण लिख दी। ये दोनों बच्चे भाई-बहन हैं। 

20 कॉपियों में लिखी रामायण
जानकारी के मुताबिक, तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले माधव जोशी और चौथी कक्षा में पढ़ने वाली अर्चना ने यह कारनामा किया। उन्होंने रामायण के अलग-अलग खंडों को कुल 20 कॉपियों के करीब 2100 पन्नों में उतार दिया। 

इस वजह से लिखी रामायण
बताया जा रहा है कि लॉकडाउन के दौरान दूरदर्शन पर रामायण दिखाई गई थी। उसे काफी पसंद भी किया गया। उसी दौरान माधव और अर्चना ने भी रामायण देखी। इसके बाद उन्होंने को लोग खूब देख रहे थे और पसंद की जा रही थी, उसी दौरान इन बच्चों के मन में पूरी रामायण पेन से लिखने की बात आई और उसके बाद उन्होंने तीन बार रामचरितमानस भी पढ़ी। पापा ने उन्हें रामायण लिखने के लिए प्रोत्साहित किया तो दोनों भाई-बहन अनोखा कारनामा करने में जुट गए।

सात हिस्सों में लिखा पूरा किस्सा
जालौर के आदर्श विद्या मंदिर विद्यालय में पढ़ने वाले माधव और अर्चना ने पूरी रामायण को सात हिस्सों में लिखा। उन्होंने श्री रामचरितमानस  बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर रामायण का संपूर्ण जिक्र किया। इनमें माधव ने 14 कॉपियों में बाल कांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड और उत्तर कांड लिखा, जबकि अर्चना ने छह कॉपियों में किष्किंधा कांड, सुंदर कांड और लंका कांड लिखा। बच्चों का कहना है कि उन्हें रामायण की पूरी जानकारी हो गई। साथ ही, रामचरितमानस में दोहे, छंद और चौपाइयों की संख्या भी याद हो गई।
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राजस्थान की तरह शराब का अपना ब्रांड बनाएगी मध्यप्रदेश सरकार, महुआ से होगी तैयार

देश में 28 बार फैला बर्ड फ्लू, लेकिन राजस्थान में पहली बार दस्तक, अब तक 522 पक्षियों की मौत

कोरोना महामारी के साथ-साथ अब देश में बर्ड फ्लू का खौफ पसरने लगा है। अब तक राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और केरल में पक्षियों की मौत के मामले सामने आए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि देश में पिछले नौ साल के दौरान अब तक 28 बार बर्ड फ्लू फैल चुका है, लेकिन राजस्थान में इस खौफनाक वायरस ने पहली बार दस्तक दी है। इसके चलते राज्य में अब तक 522 पक्षियों की मौत भी हो चुकी है, जिनमें 250 कौओं के अलावा कबूतर, कोयल, बत्तख, किंगफिशर और मेगपाई आदि पक्षी शामिल हैं। 


राजस्थान में बर्ड फ्लू पहली बार
बता दें कि देश में बर्ड फ्लू का पहला मामला साल 2006 के दौरान सामने आया था। तब से अब तक देश में कुल 28 बार बर्ड फ्लू फैल चुका है, जिससे अलग-अलग राज्यों में कुल 74 लाख 30 हजार पक्षियों की मौत हो चुकी है। हालांकि, राजस्थान में पहली बार बर्ड फ्लू ने दस्तक दी है। ऐसे में प्रशासन मुस्तैद हो गया है। साथ ही, चिड़ियाघर में भी एहतियात बरती जा रही है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने चिड़ियाघर में पक्षियों के पिंजरों में दवा का छिड़काव कराया। साथ ही, विजिटर्स ट्रैक पर भी दवा का छिड़काव कराने की बात कही जा रही है।




मेगपाई पक्षी ने भी गंवाई जान
गौरतलब है कि बर्ड फ्लू का असर कौओं और बत्तख के अलावा दूसरे पक्षियों पर भी दिखने लगा है। दरअसल, इस खौफनाक वायरस के चलते सकतपुरा में मेगपाई पक्षी ने भी दम तोड़ दिया। एक वन्य जीव प्रेमी ने बताया कि यह पक्षी अचानक गिर गया था और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।

वन विभाग ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
बता दें कि बर्ड फ्लू के संक्रमण को देखते हुए वन मंडल कोटा के कर्मचारियों को भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें वन क्षेत्रों के जलाशयों पर नियमित रूप से गश्त करने और किसी पक्षी के बीमार दिखने या उसकी मौत होने पर तुरंत सूचना देने के लिए कहा गया है। साथ ही, मंडल स्तर पर एक कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिसका हेल्पलाइन नंबर 9829267941 है। इस नंबर पर पक्षियों से संबंधित सूचनाएं दी जा सकती हैं।
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मेवाड़ राजघराने के 37 साल पुराने संपत्ति विवाद पर आया कोर्ट का फैसला, ऐसे किया बटवारा 

मेवाड़ राजघराने की संपत्ति के 37 साल पुराने विवाद आखिरकार कोर्ट के माध्यम से हल हो गया। इस संबंध में सुनवाई करते हुए अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश महेंद्र कुमार दवे ने मंगलवार को पूर्व महाराणा स्वर्गीय भगवत सिंह के हिस्से में 25 प्रतिशत संपत्ति मानी है, जबकि बाकी बची 75 प्रतिशत संपत्ति को महेंद्र सिंह मेवाड़, अरविंद सिंह मेवाड़ और बेटी योगेश्वरी का माना है। गौरतलब है कि संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलने पर महेंद्र सिंह मेवाड़ ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिस पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। 

दरअसल, 15 अप्रैल 1948 को मेवाड़ के अंतिम महाराणा भूपाल सिंह ने भारत सरकार से अंगीकार पत्र हस्ताक्षर किए थे। उनके निधन के बाद पुत्र भगवत सिंह की सभी संपत्तियां हिंदू अविभक्त कुटुंब की रहीं और महेंद्र व परिवार के सभी सदस्य इस संपत्ति में विधिपूर्ण हकदार भी माने गए। 

जानिए क्या है विवाद का कारण 
महेंद्र सिंह ने पिता भगवत सिंह, भाई अरविंद सिंह, मां महारानी सुशीला, दादी राजमाता विरद कुंवर के खिलाफ 22 अप्रैल 1983 को जिला न्यायाधीश के समक्ष वाद पेश किया था। केस करने के पीछे का कारण था जनवरी 1983 में भगवत सिंह द्वारा उन्हें कानूनी अधिकार देने से इंकार करना। 
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