बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सिंगरौली जिले के नदी-नाले उफान पर हैं। शहरी बस्तियों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। बारिश और बाढ़ के कारण जिले में 400 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि अलग-अलग हादसों में तीन लोगों की मौत की खबर है।
बैढ़न, विंध्यनगर, नवजीवन विहार और मोरवा सहित कई प्रमुख शहरी क्षेत्रों की निचली बस्तियों में घरों के अंदर पानी घुस गया है। नगर पालिक निगम सिंगरौली के राजीव वार्ड क्रमांक 39 में एक पुराना कच्चा मकान भी ढह गया। हालांकि, राहत की बात रही कि लोग समय रहते घर से बाहर निकल गए।
सड़कों पर पानी, कई इलाकों से संपर्क कटा
भारी बारिश के चलते जिले की प्रमुख सड़कों पर करीब आधा मीटर तक पानी भर गया है, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है। विंध्यनगर-शक्तिनगर मुख्य मार्ग भी जलमग्न हो गया है। यह मार्ग मध्य प्रदेश को उत्तर प्रदेश की सीमा से जोड़ता है। कई इलाकों में पुलिया टूटने और सेमरा नदी के उफान पर होने से सिंगरौली का सोनभद्र से संपर्क कट गया है। पहाड़ों से मलबा गिरने और पेड़ टूटने के कारण कई जगह रास्ते बाधित हुए हैं। इससे एंबुलेंस और स्कूली बसें भी रास्ते में फंसी नजर आईं।
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SDRF और होमगार्ड की टीमें रेस्क्यू में जुटीं
खराब मौसम और जलभराव को देखते हुए जिला प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर स्कूलों में छुट्टी घोषित की है। SDRF और होमगार्ड की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। खुटार, मंझौली, करकौसा और परसौना सहित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दर्जनों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिला कलेक्टर ने जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त नहीं रखने वाले ठेकेदारों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
शहरी ड्रेनेज व्यवस्था की खुली पोल
मूसलाधार बारिश ने शहरी क्षेत्रों की ड्रेनेज व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। कई इलाकों में जलभराव के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में यही बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई है। धान की फसल के लिए बारिश को जीवनदायिनी माना जा रहा है।