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सागर कांड के बाद जागा प्रशासन: अब ओंकारेश्वर के जंगलों में आबकारी विभाग की दबिश, 195 लीटर शराब किया जब्त
Wed, 09 Sep 2026 07:52 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Wed, 09 Sep 2026 07:52 PM IST
सार
सागर जहरीली शराब कांड के बाद ओंकारेश्वर के जंगलों में आबकारी विभाग ने दबिश देकर 195 लीटर हाथभट्टी शराब और 11,350 किलो महुआ लहान जब्त किया। कार्रवाई में आबकारी अधिनियम के तहत 18 प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
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आबकारी विभाग की कार्रवाई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद मध्यप्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में बुधवार को ओंकारेश्वर और नर्मदा नदी किनारे स्थित बाघनगर व गणेश नगर के दुर्गम जंगलों में आबकारी विभाग की टीम ने अवैध शराब निर्माण के अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। इसके अलावा आबकारी वृत्त खंडवा के ग्राम सिलोदा में भी कार्रवाई की गई।
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कलेक्टर ऋषव गुप्ता के निर्देश पर की गई कार्रवाई में कुल 195 लीटर हाथभट्टी मदिरा और 11,350 किलोग्राम महुआ लहान बरामद किया गया। आबकारी विभाग के अनुसार, महुआ लहान के मौके पर विधिवत सैंपल लिए गए और उसे नष्ट कर दिया गया। कार्रवाई में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत कुल 18 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जब्त शराब और महुआ लहान की अनुमानित कीमत करीब 11 लाख 65 हजार रुपये बताई गई है।
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जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही ने बताया कि अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। कार्रवाई में सहायक जिला आबकारी अधिकारी हसनलाल गोहिया, अजयपाल सिंह भदौरिया, सोनाली बैंजामिन और आबकारी उपनिरीक्षक अंकित सोलंकी सहित विभागीय अमला शामिल रहा।
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घने जंगलों में लंबे समय से अवैध शराब निर्माण की शिकायत
ओंकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा नदी के आसपास और घने जंगलों में लंबे समय से अवैध रूप से हाथभट्टी शराब बनाए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर शराब बनाने वाले जंगलों में ठिकाने बनाकर यह कारोबार करते हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जाते रहे हैं कि वन क्षेत्र में पेड़ों और झाड़ियों की कटाई कर शराब निर्माण के लिए जगह बनाई जाती है।
ओंकारेश्वर के समाजसेवी प्रदीप ठाकुर ने कहा कि क्षेत्र में शराबबंदी और अवैध शराब निर्माण को लेकर उन्होंने कई बार मध्यप्रदेश शासन और प्रशासन को अवगत कराया है। उन्होंने इस संबंध में शिकायतें भी की हैं, लेकिन उनके अनुसार अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
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उन्होंने कहा कि जब भी जहरीली शराब से हादसे होते हैं और लोगों की जान जाती है, उसके बाद प्रशासन सक्रिय दिखाई देता है। उनका आरोप है कि मौजूदा कार्रवाई भी कहीं केवल खानापूर्ति बनकर न रह जाए। उन्होंने मांग की कि अवैध शराब के छोटे ठिकानों पर कार्रवाई के साथ-साथ इसके पीछे काम कर रहे बड़े कारोबारियों और माफिया तंत्र तक भी जांच पहुंचाई जाए।
सिर्फ जब्ती नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच की मांग
ओंकारेश्वर धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में नर्मदा किनारे और आसपास के जंगलों में अवैध शराब निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। आबकारी विभाग की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में शराब और महुआ लहान मिलने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि दुर्गम जंगलों में इतने बड़े पैमाने पर कच्चा माल और शराब निर्माण चल रहा था तो निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी। स्थानीय लोगों की मांग है कि आबकारी, पुलिस, वन विभाग और प्रशासन संयुक्त रूप से ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी करें। साथ ही अवैध शराब निर्माण के स्रोत, आपूर्ति और बिक्री के पूरे नेटवर्क की जांच की जाए, ताकि कार्रवाई केवल जब्ती और प्रकरण दर्ज करने तक सीमित न रहे।
