मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने एक अनोखा और आक्रोशित कर देने वाला नजारा देखने को मिला। पिछले कई महीनों से अपनी आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी से परेशान शासकीय स्कूलों की रसोइया महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। अपनी जायज मांगों को लेकर इन महिलाओं ने कलेक्ट्रेट के ठीक सामने, सड़क के किनारे ही चूल्हा जलाकर खाना पकाया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
चार महीने से रुका है मानदेय, भूखे मरने की नौबत
धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि पिछले चार महीनों से उन्हें विभाग की ओर से कोई मानदेय (वेतन) नहीं दिया गया है। अल्प मानदेय में घर चलाने वाली इन गरीब महिलाओं के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। त्योहारों और दैनिक जरूरतों के इस दौर में वेतन न मिलने के कारण उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर राशन और दवाई तक के लिए उन्हें दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ रहा है।
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जिले की 5000 महिलाओं का भविष्य दांव पर
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि अकेले सिवनी जिले में लगभग पांच हजार ऐसी महिलाएं हैं, जो दिन-रात सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन तैयार करती हैं। पूरे मध्य प्रदेश में इस समय रसोइया संघ द्वारा चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चलाया जा रहा है। सिवनी में यह धरना पिछले एक पखवाड़े (15 दिनों) से लगातार जारी है, लेकिन प्रशासन या शासन के किसी भी नुमाइंदे ने अब तक उनकी सुध नहीं ली है। इसी अनदेखी से नाराज होकर मंगलवार को महिलाओं ने सड़क पर ही खाना बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
आंदोलन का नेतृत्व कर रही महिलाओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह लड़ाई अब आर-पार की है। जब तक प्रशासन उनके पिछले चार महीनों की बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान नहीं कर देता, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना और प्रदर्शन जारी रहेगा। रसोइया संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मानदेय को नियमित करने और इसे बढ़ाए जाने की भी मांग की है। अब देखना यह होगा कि कुंभकर्णीय नींद में सोया प्रशासन इन महिलाओं की सुध कब लेता है।