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ऐसी हैं यूपी वालों की फूड हैबिट्स: शाकाहार में पश्चिमी यूपी तो मांसाहार में पूर्वांचल सबसे आगे
उत्तर प्रदेश में पश्चिमांचल में सर्वाधिक स्लॉटर हाउस हैं। घरेलू मांग के लिए कटान के साथ इसी क्षेत्र से सबसे अधिक मांस निर्यात भी होता है, लेकिन मांस खाने में पश्चिमांचल के लोग पीछे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शाकाहारी आबादी सर्वाधिक है, जबकि पूर्वांचल के लोग मांसाहार में आगे हैं। यह खुलासा इंडिया डेटा मैप की 2026 की रिपोर्ट में हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश में शाकाहार अब केवल धार्मिक कारणों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेहत और पर्यावरण से भी जुड़ चुका है। उत्तर प्रदेश में हरियाणा और राजस्थान की सीमा से सटे क्षेत्रों में शाकाहार का स्तर सर्वाधिक है। मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा में करीब 60 फीसदी आबादी शाकाहारी है। मथुरा वृंदावन में यह आंकड़ा 90 फीसदी से अधिक है। वाराणसी और प्रयागराज के नए विकसित क्षेत्रों में शाकाहारी आबादी 52-55 फीसदी है। बुंदेलखंड में यह दर 50 फीसदी से कम, करीब 47 फीसदी है।
लखनऊ में मांसाहार और शाकाहार का संतुलन है। करीब 45 फीसदी लोग शुद्ध शाकाहारी हैं। कानपुर में शाकाहार 48-50 फीसदी और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद शाकाहार के प्रति आकर्षण बढ़ा है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक प्रदेश में 50 हजार से अधिक खुदरा मांस की छोटी-बड़ी दुकानें हैं। इनमें करीब 30 फीसदी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हैं। स्लॉटर हाउस भी सबसे अधिक इसी क्षेत्र में हैं। एपीडा में पंजीकृत इकाइयों में करीब 40-50 फीसदी उत्तर प्रदेश की हैं। अलीगढ़ सबसे बड़ा क्लस्टर है। गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, बरेली और हापुड़ में भी इकाइयां हैं। मध्य क्षेत्र में उन्नाव और बाराबंकी (कुर्सी रोड) प्रमुख केंद्र हैं। प्रदेश में 35 केंद्रीय लाइसेंसधारी, 25 स्टेट लाइसेंसधारी और 69 अन्य पंजीकृत निर्यात इकाइयां हैं। स्लॉटर हाउस की संख्या करीब 260 है।
एसजीपीजीआई की आहार विशेषज्ञ रीता आनंद का कहना है कि खानपान व्यक्ति की अपनी पसंद पर निर्भर करता है। शाकाहार में तमाम खाद्य पदार्थ हैं, जो मांसाहार से कहीं अधिक पोषक तत्व देते हैं। ऐसे में इसे पोषक तत्व से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। जहां तक अधिक मांसाहार की बात है तो इसके ज्यादा सेवन से मेटाबोलिक सिंड्रोम से जुड़ी समस्या हो सकती है। पूरब में मांसाहार का पैटर्न अधिक देखने को मिलता है।
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