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चंबा के छतराड़ी जातर मेले में लोक संस्कृति का रंग, मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने किया डंडारस नृत्य
Ankesh Dogra
Updated Wed, 23 Sep 2026 09:24 AM IST
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शिव शक्ति मंदिर छतराड़ी के राज्यस्तरीय जातर मेले में मंगलवार को हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति और धार्मिक आस्था का मनमोहक संगम देखने को मिला। मेले में उस समय माहौल और भी खास हो गया, जब हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया पारंपरिक चोला-डोरा पहनकर डंडारस नृत्य में शामिल हुए।
केवल सिंह पठानिया के डंडारस में शामिल होते ही मेला परिसर में मौजूद लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा और लोक नृत्य के इस दृश्य ने मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा। डंडारस के माध्यम से हिमाचल की पारंपरिक संस्कृति और लोक परंपराओं की खूबसूरत झलक देखने को मिली।
इसके बाद आयोजित राज्यस्तरीय छतराड़ी जातर मेले की सांस्कृतिक संध्या पूरी तरह हिमाचली लोक गायकों के नाम रही। स्टार नाइट में बबलू आजाद और सुनील राणा ने अपनी प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि देर रात तक मेला पंडाल तालियों और पहाड़ी गीतों से गूंजता रहा।
कार्यक्रम का आगाज ‘शिव कैलाशों के वासी’ भजन से हुआ। इसके बाद बबलू आजाद ने ‘माहिया’, ‘तुलसो रंदी कियां हो’ और ‘बंगलू मेरी’ समेत कई लोकप्रिय पहाड़ी गीत प्रस्तुत किए। उनकी सुरीली प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकार का उत्साह बढ़ाया।
स्टार नाइट के मुख्य आकर्षण लोक गायक सुनील राणा रहे। उन्होंने ‘शिव कैलाशों के वासी’, ‘काचा चढ़ेया पहाड़ा जो’ और ‘कुगती मां डेरा दिता लाई’ सहित कई लोकप्रिय हिमाचली गीत सुनाए। सुनील राणा की प्रस्तुतियों ने माहौल को पूरी तरह संगीतमय बना दिया। कई दर्शक अपनी जगह पर खड़े होकर नाचते नजर आए।
सांस्कृतिक संध्या में भक्ति संगीत के साथ हिमाचल की लोक संस्कृति, पारंपरिक धुनों और पहाड़ी जीवन की झलक भी देखने को मिली। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लिया।
छतराड़ी जातर मेले की यह शाम इस मायने में भी खास रही कि धार्मिक आयोजन के बीच पारंपरिक लोक नृत्य और हिमाचली संगीत ने लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का काम किया। डंडारस से लेकर पहाड़ी लोकगीतों तक, पूरे आयोजन में हिमाचल की लोक परंपराओं की रंगत साफ नजर आई।
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