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Farmers burned an effigy of the Chief Election Commissioner and also protested against the privatization of electricity.
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किसानों ने फूंका मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला, बिजली के निजीकरण का भी किया विरोध
यमुनानगर। संयुक्त किसान मोर्चा के केंद्रीय आह्वान पर आज किसानों ने जिला सचिवालय के सामने प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। किसानों ने बिजली के निजीकरण का भी विरोध किया। उन्होंने एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग की भूमिका की आलोचना करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग की।
प्रदर्शन की अध्यक्षता अखिल भारतीय किसान सभा (अजय भवन) के अध्यक्ष गुरभजन सिंह मझैल और अखिल भारतीय किसान सभा, हरियाणा के अध्यक्ष नायब सिंह ने की। किसान नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग भी उठाई।
धान खरीद में पोर्टल व्यवस्था और 27 क्विंटल की सीमा हटाने की मांग
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने धान खरीद में आ रही परेशानियों का मुद्दा भी उठाया। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार की पोर्टल व्यवस्था और 27 क्विंटल की सीमा संबंधी हिदायतों के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इन व्यवस्थाओं को समाप्त करने की मांग की, ताकि किसानों को मंडियों में परेशानी न हो और उनकी फसल की खरीद सुचारू रूप से हो सके।
बिजली के निजीकरण के खिलाफ भी जताया रोष
किसान संगठनों ने गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली कंपनी को लाइसेंस दिए जाने का विरोध किया। किसान नेताओं ने कहा कि बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से भविष्य में उपभोक्ताओं और किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है। उन्होंने सरकार से बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में उठाए जा रहे कदमों को वापस लेने की मांग की।
किसान नेताओं ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, फसलों की खरीद में राहत और बिजली व्यवस्था को निजीकरण से बचाने जैसे मुद्दों पर सरकार को किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
प्रदर्शन में धर्मपाल चौहान, महिपाल चमरौड़ी, प्यारे लाल तंवर, हरभजन सिंह संधू सहित भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के सदस्य भी शामिल रहे।
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