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Three-day strike by electricity employees against privatization begins; consumers to face increased difficulties.
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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू, उपभोक्ताओं की बढ़ेंगी मुश्किलें
रेवाड़ी। हरियाणा में बिजली के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के पहले दिन रेवाड़ी में भी कर्मचारियों ने कामकाज छोड़कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग उठाई। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हड़ताल के चलते बिजली आपूर्ति से जुड़ी सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि हड़ताल के दौरान बिजली की लाइन, ट्रांसफार्मर या अन्य उपकरणों में खराबी आने पर उसे ठीक करने के लिए कर्मचारी मौके पर नहीं जाएंगे। इससे बिजली संबंधी शिकायतों का समाधान प्रभावित हो सकता है और उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी:
एचएसईबी वर्कर यूनियन के प्रधान विक्रम ने सरकार से बिजली के निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर समाधान निकालना चाहिए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का कदम उठा सकते हैं।
बिजली संबंधी शिकायतों पर पड़ सकता है असर:
हड़ताल के दौरान बिजली आपूर्ति में तकनीकी खराबी आने पर उसे ठीक करने में देरी होने की आशंका है। ऐसे में घरों, दुकानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में बिजली बाधित होने की स्थिति में उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि, बिजली आपूर्ति कितनी प्रभावित होगी, यह वास्तविक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। कर्मचारियों ने दोहराया कि निजीकरण के मुद्दे पर सरकार को जल्द फैसला लेना चाहिए। अब देखना होगा कि तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे बढ़ता है।
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