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गैंगरेप पीड़ित बेटियों के इंसाफ को भटक रहा पिता
सुल्तनपुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jan 2016 11:00 PM IST
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कोतवाली देहात क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले दलित की शादी चांदा कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। सास ससुर के तीन बेटियों के अलावा कोई बेटा नहीं था। ससुराल में सास और ससुर की इच्छा का सम्मान करने के लिए उसने पत्नी और दो बेटियों के साथ करीब नौ वर्ष पूर्व वहां रहना शुरू किया था। उसे मालूम नहीं था कि ससुराल में ही उसकी दो नाबालिग बेटियों के साथ पांच युवक दरिंदगी करेंगे।
दलित पिता 24 जुलाई 2015 की तारीख नहीं भूलता जब रीतेश सिंह, तूफानी सिंह व तीन अन्य युवकों ने मिलकर पिकअप से अगवा कर उसकी दो नाबालिग बेटियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। आरोपियों की ऐसी दहशत थी कि घर वाले मुंह खोलने को तैयार नहीं थे। घटना के दौरान पिता बाहर था। जानकारी पाकर वह घर पहुंचा। जब वह थाने पहुंचा तो पुलिस का रवैया देख उसका कलेजा फट गया।
पीड़ित पिता को इस बात का मलाल कम नहीं कि तहरीर देने के बावजूद चांदा पुलिस ने उसका केस नहीं दर्ज किया। किसी भी पुलिस अधिकारी ने उसकी मदद नहीं की। आखिरकार पीड़ित पिता ने न्यायालय का सहारा लिया। कोर्ट के आदेश पर पांच नवंबर 2015 को आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप, अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था।
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मुकदमे में सुलह-समझौते के लिए आरोपियों ने पिता पर दबाव बनाना शुरू किया तो उसने इंसाफ की दुहाई देते हुए इससे इंकार कर दिया था। 26 दिसंबर को आरोपियों ने गैंगरेप की पीड़ित बहनों के पिता पर जानलेवा हमला किया तो उसने बेटियों के साथ ससुराल छोड़ दी। हालांकि खौफ व दहशत में उसकी पत्नी और सास टूट गईं।
दोनों ने उससे मामले में सुलह का दवाब बनाया लेकिन वह कुछ सुनने को तैयार नहीं हुआ। पिता का कहना है कि जब तक उसकी बेटियों को इंसाफ नहीं मिल जाता, उसकी लड़ाई जारी रहेगी। इंसाफ की इस जंग में भले ही उसकी जान चली जाए।
कोर्ट के आदेश पर भी पुलिस ने केस में की मनमानी
सुल्तानपुर। दलित गैंगरेप की शिकार किशोरियों के पिता की अर्जी पर संज्ञान लेते हुए स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम् ने चांदा कोतवाली की पुलिस को मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करने का आदेश दिया था। बावजूद इसके चांदा कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रमेश चंद्र ने मुकदमा दर्ज करने में मनमानी की थी।
उन्होंने अपहरण व गैंगरेप की धारा के तहत एफआईआर पंजीकृत की थी लेकिन एससी/एसटी एक्ट की धाराओं को नजरअंदाज कर दिया था। जानकार लोगों का मानना है कि किसी भी दलित के खिलाफ हुई आपराधिक वारदात में अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करना चाहिए। एससी/एसटी एक्ट के तहत पंजीकृत मुकदमे की विवेचना क्षेत्राधिकारी करते हैं।
होगी सख्त कार्रवाई
जो शिकायतें सामने आती हैं, उसका त्वरित संज्ञान लेते हैं। इस मामले में भी उन्होंने कार्रवाई के आदेश दिए हैं। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-विनय कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक
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दलित पिता 24 जुलाई 2015 की तारीख नहीं भूलता जब रीतेश सिंह, तूफानी सिंह व तीन अन्य युवकों ने मिलकर पिकअप से अगवा कर उसकी दो नाबालिग बेटियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। आरोपियों की ऐसी दहशत थी कि घर वाले मुंह खोलने को तैयार नहीं थे। घटना के दौरान पिता बाहर था। जानकारी पाकर वह घर पहुंचा। जब वह थाने पहुंचा तो पुलिस का रवैया देख उसका कलेजा फट गया।
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पीड़ित पिता को इस बात का मलाल कम नहीं कि तहरीर देने के बावजूद चांदा पुलिस ने उसका केस नहीं दर्ज किया। किसी भी पुलिस अधिकारी ने उसकी मदद नहीं की। आखिरकार पीड़ित पिता ने न्यायालय का सहारा लिया। कोर्ट के आदेश पर पांच नवंबर 2015 को आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप, अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था।
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मुकदमे में सुलह-समझौते के लिए आरोपियों ने पिता पर दबाव बनाना शुरू किया तो उसने इंसाफ की दुहाई देते हुए इससे इंकार कर दिया था। 26 दिसंबर को आरोपियों ने गैंगरेप की पीड़ित बहनों के पिता पर जानलेवा हमला किया तो उसने बेटियों के साथ ससुराल छोड़ दी। हालांकि खौफ व दहशत में उसकी पत्नी और सास टूट गईं।
दोनों ने उससे मामले में सुलह का दवाब बनाया लेकिन वह कुछ सुनने को तैयार नहीं हुआ। पिता का कहना है कि जब तक उसकी बेटियों को इंसाफ नहीं मिल जाता, उसकी लड़ाई जारी रहेगी। इंसाफ की इस जंग में भले ही उसकी जान चली जाए।
कोर्ट के आदेश पर भी पुलिस ने केस में की मनमानी
सुल्तानपुर। दलित गैंगरेप की शिकार किशोरियों के पिता की अर्जी पर संज्ञान लेते हुए स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम् ने चांदा कोतवाली की पुलिस को मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार विवेचना करने का आदेश दिया था। बावजूद इसके चांदा कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रमेश चंद्र ने मुकदमा दर्ज करने में मनमानी की थी।
उन्होंने अपहरण व गैंगरेप की धारा के तहत एफआईआर पंजीकृत की थी लेकिन एससी/एसटी एक्ट की धाराओं को नजरअंदाज कर दिया था। जानकार लोगों का मानना है कि किसी भी दलित के खिलाफ हुई आपराधिक वारदात में अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करना चाहिए। एससी/एसटी एक्ट के तहत पंजीकृत मुकदमे की विवेचना क्षेत्राधिकारी करते हैं।
होगी सख्त कार्रवाई
जो शिकायतें सामने आती हैं, उसका त्वरित संज्ञान लेते हैं। इस मामले में भी उन्होंने कार्रवाई के आदेश दिए हैं। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-विनय कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक