कासिम हत्याकांड: जंगल में हत्या.. गन्ने के खेत में ठिकाने लगाई लाश, शूटर को आजीवन कारावास, तीन लोग बरी
पाकबड़ा के आरटीआई कार्यकर्ता कासिम सैफी की हत्या के मामले में अदालत ने शूटर विकास चौधरी को दोषी करार दिया। उसे उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सबूतों के अभाव में पूर्व प्रधान हारुन सैफी, पूर्व सपा नेत्री अलका दुबे और कुलदीप को बरी कर दिया गया। कासिम का शव शूटर के गांव से बरामद हुआ था।
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पाकबड़ा के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता कासिम की हत्या के मामले में सोमवार को एडीजे-3 अंचल लवानिया की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने शूटर विकास चौधरी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही बीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
साक्ष्यों के अभाव में पाकबड़ा के पूर्व प्रधान हारुन सैफी, पूर्व सपा नेत्री अलका दुबे और कुलदीप को बरी कर दिया गया। पाकबड़ा निवासी कासिम सैफी 27 दिसंबर 2018 को अपने घर से तहसील जाने के लिए निकले थे। इसके बाद गायब हो गए थे। इस मामले में 29 दिसंबर को उसकी गुमशुदगी दर्ज की गई थी।
जबकि तीन जनवरी को गुमशुदगी को अपहरण में तरमीम किया गया था। पुलिस ने तफ्तीश करते हुए नौ जनवरी 2019 को शामली के कांधला थानाक्षेत्र के दुरमंजपुर निवासी शूटर विकास चौधरी को गिरफ्तार कर उसके गांव से ही कासिम का शव बरामद किया था।
इस मामले में पुलिस ने सिविल लाइंस के आशियाना कॉलोनी निवासी अलका दुबे और विकास के साथी कुलदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जबकि पाकबड़ा के पूर्व प्रधान हारुन सैफी ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। पुलिस ने दावा किया था कि पाकबड़ा के पूर्व प्रधान ने अलका दुबे के जरिये कासिम की हत्या की सुपारी शूटर विकास चौधरी को दी थी।
बाद में सभी आरोपी जमानत पर रिहा हो गए थे। पुलिस ने केस की विवेचना करने के बाद सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले की सुनवाई एडीजे-3 अंचल लवानिया की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर से एडीजीसी रणजीत राठौर ने दलीलें दीं और आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग रखी।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सोमवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुए विकास चौधरी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और बीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। बाकी तीनों के खिलाफ कोई मजबूत साक्ष्य न होने के कारण अदालत ने बरी कर दिया है।
रंजिश के कारण केस में शामिल कराया था नाम
पूर्व प्रधान हारून सैफी ने बताया कि जिस वक्त कासिम की हत्या की गई थी। तब मैं उमरा करने सऊदी अरब गया था। मैं पाकबड़ा का प्रधान था। कुछ लोग मुझसे रंजिश रखते थे। पुलिस ने कुछ लोगों के दबाव में मेरा नाम केस में शामिल कर दिया था।
हाईकोर्ट में करेंगे अपील
आरटीआई कार्यकर्ता कासिम सैफी के पिता साबिर हुसैन फैसले से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि हारून सैफी ने मेरे बेटे की हत्या कराई थी। कासिम ने आरटीआई के जरिये पाकबड़ा में किए गए विकास कार्याें की जानकारी मांगी थी। इसी बात से हारून मेरे बेटे से रंजिश रखता था। हत्या में अलका दुबे और कुलदीप भी शामिल थे। अब वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
थाने में तोड़फोड़ और हाईवे पर लोगों ने किया था हंगामा
विकास चौधरी कासिम सैफी को अगवाकर शामली ले गया था। आरोपी ने जंगल में ले जाकर उसकी हत्या कर दी थी और लाश गन्ने के खेत में फेंक दी थी। पुलिस ने विकास चौधरी को गिरफ्तार कर शामली से कासिम की लाश बरामद की थी।
11 जनवरी 2019 को कासिम का शव पाकबड़ा लाया तो लोग भड़क गए और उन्होंने थाने में तोड़फोड़ कर दी थी और हाईवे पर जाम लगाकर हंगामा किया था। उन्होंने पूर्व प्रधान की गिरफ्तारी की मांग की थी। पूर्व प्रधान हारून विदेश से लौटकर कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।