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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   The 700-year-old historic Mahakal Gate collapsed suddenly last night, wasting a budget of 2 crores.

महाकाल मंदिर के पास आधी रात मचा हड़कंप: अचानक जमींदोज हुआ सदियों पुराना क्षिप्रा द्वार, आखिर किसकी लापरवाही?

Sun, 06 Sep 2026 03:44 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Sun, 06 Sep 2026 03:44 PM IST
सार

उज्जैन में महाकाल मंदिर से रामघाट को जोड़ने वाला करीब 700 साल पुराना ऐतिहासिक क्षिप्रा द्वार देर रात ढह गया। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। गहरी खुदाई, सुरक्षात्मक इंतजामों की कमी, बारिश और जमीन धंसने को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है।

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The 700-year-old historic Mahakal Gate collapsed suddenly last night, wasting a budget of 2 crores.
महाकाल से रामघाट का ऐतिहासिक रास्ता हुआ ध्वस्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से बड़ी खबर सामने आई है। महाकाल मंदिर से रामघाट को जोड़ने वाला करीब 14वीं सदी का ऐतिहासिक महाकाल द्वार, जिसे क्षिप्रा द्वार भी कहा जाता है, शनिवार-रविवार की दरमियानी रात अचानक ढह गया। गनीमत रही कि हादसा देर रात हुआ और उस समय आसपास कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा और जनहानि टल गई।

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घटना के बाद स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। खास बात यह है कि इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और जीर्णोद्धार पर हाल ही में उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा करीब 2.12 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद संरचना के ढहने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।

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जेसीबी से गहरी खुदाई के आरोप
महाकाल द्वार के पास सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के समीप 77 मीटर लंबे मार्ग का निर्माण कार्य चल रहा था। आरोप है कि निर्माण के दौरान भारी मशीनों से द्वार के नजदीक गहरी खुदाई की गई। ऐतिहासिक संरचना को सहारा देने के लिए पर्याप्त सुरक्षात्मक इंतजाम नहीं किए गए। आरोप है कि मिट्टी खिसकने से रोकने के लिए न तो रिटेनिंग वॉल बनाई गई और न ही संरचना को आवश्यक सपोर्ट दिया गया। वहीं, पिछले दो-तीन दिनों से हो रही बारिश के कारण मिट्टी में नमी बढ़ने और जमीन धंसने की स्थिति भी बनी।
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जमीन धंसने के कारण गिरने की आशंका
मामले में कार्यपालन यंत्री कमल सक्सेना ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा रात में हुआ। द्वार के पास डीप एक्सकेवेशन यानी गहरी खुदाई का काम चल रहा था और हाल के दिनों में बारिश भी हुई है। ऐसे में जमीन धंसने के कारण द्वार गिरने की आशंका है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।


सदियों पुरानी विरासत था क्षिप्रा द्वार
महाकाल द्वार केवल पत्थरों की एक संरचना नहीं, बल्कि उज्जैन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा था। बेसाल्ट पत्थर और प्राचीन ईंटों से बना यह द्वार करीब 14वीं शताब्दी का माना जाता है। मान्यता है कि प्राचीन काल में श्रद्धालु क्षिप्रा नदी के रामघाट में स्नान करने के बाद इसी क्षिप्रा द्वार से होकर भगवान महाकालेश्वर के दर्शन करने पहुंचते थे। सिंधिया काल में और वर्ष 2004 के सिंहस्थ के दौरान भी इसका पुनरुद्धार किया गया था। हालिया जीर्णोद्धार में पारंपरिक तकनीक और सामग्रियों के उपयोग की बात कही गई थी। इसमें चूना, गुड़, मेथी, गूगुल, उड़द का पानी और बेलपत्र के रस जैसी पारंपरिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

जनता में आक्रोश, जांच शुरू
रविवार सुबह जब लोगों ने सदियों पुरानी इस धरोहर को मलबे में तब्दील देखा तो प्रशासनिक लापरवाही को लेकर नाराजगी सामने आई। करीब तीन साल पहले संवारी गई ऐतिहासिक संरचना के इस तरह ढहने से निर्माण की गुणवत्ता और अधिकारियों की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल स्मार्ट सिटी के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुटे हैं।

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