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रमजान के दूसरे अशरे में मिलती है गुनाहों से माफी
Updated Mon, 28 May 2018 08:51 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सरूरपुर। रमजान बड़ी बरकतों वाला महीना है। इसके दूसरे अशरे में अल्लाह ताआला लोगों के गुनाहों को ज्यादा माफ करता है। बशर्ते बंदा अपने गुनाहों की सच्चे दिल से तौबा करते हुए अल्लाह ताआला की इबादत करे।
रमजान के पहले दस दिन में अल्लाह ताआला अपने बंदों पर रहमत बरसाता है। जो लोग अल्लाह की इस रहमत का शुक्र अदा करते हैं, उनके लिए यह रहमत और भी बढ़ती जाती है। इसके बाद दूसरे अशरे दस दिन में बंदों की गुनाहों की मगफिरत फरमाते हैं। मौलाना यूसुफ कासमी ने हदीस की रोशनी से बताया कि हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसल्लम ने फरमाया कि रमजान माह के रोजे फर्ज और तरावीह सुन्नत है। तरावीह में दो सुन्नत अलग-अलग हैं। एक सुन्नत कुरान शरीफ का सुनना और दूसरा पूरे रमजान की तरावीह पढ़ना है। यदि कोई शख्स 8-10 दिन की तरावीह पढ़कर सोचे कि पूरा सवाब मिल गया तो ऐसा नहीं है। कुरान शरीफ तो सुन लिया लेकिन बचे बीस दिन की तरावीह की सुन्नत छूट गई। जिनको रमजान के महीने में सफर करना जरूरी हो तो कम दिन के शबीने में तरावही पढ़ सकता है। अल्लाह के नबी ने फरमाया है कि आदमी गुनाहगार होता ही है, पर बेहतरीन गुनाहगार वो है जो सच्चे दिल से तौबा करते हुए दोजख से पनाह मांगे और जन्नत में जाने की दुआ मांगे। रोजेदारों के लिए दरिया की मछली भी दुआ करती है और इफ्तार के वक्त तक उसके लिए अल्लाह से दुआ करती रहती है।
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सरूरपुर। रमजान बड़ी बरकतों वाला महीना है। इसके दूसरे अशरे में अल्लाह ताआला लोगों के गुनाहों को ज्यादा माफ करता है। बशर्ते बंदा अपने गुनाहों की सच्चे दिल से तौबा करते हुए अल्लाह ताआला की इबादत करे।
रमजान के पहले दस दिन में अल्लाह ताआला अपने बंदों पर रहमत बरसाता है। जो लोग अल्लाह की इस रहमत का शुक्र अदा करते हैं, उनके लिए यह रहमत और भी बढ़ती जाती है। इसके बाद दूसरे अशरे दस दिन में बंदों की गुनाहों की मगफिरत फरमाते हैं। मौलाना यूसुफ कासमी ने हदीस की रोशनी से बताया कि हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसल्लम ने फरमाया कि रमजान माह के रोजे फर्ज और तरावीह सुन्नत है। तरावीह में दो सुन्नत अलग-अलग हैं। एक सुन्नत कुरान शरीफ का सुनना और दूसरा पूरे रमजान की तरावीह पढ़ना है। यदि कोई शख्स 8-10 दिन की तरावीह पढ़कर सोचे कि पूरा सवाब मिल गया तो ऐसा नहीं है। कुरान शरीफ तो सुन लिया लेकिन बचे बीस दिन की तरावीह की सुन्नत छूट गई। जिनको रमजान के महीने में सफर करना जरूरी हो तो कम दिन के शबीने में तरावही पढ़ सकता है। अल्लाह के नबी ने फरमाया है कि आदमी गुनाहगार होता ही है, पर बेहतरीन गुनाहगार वो है जो सच्चे दिल से तौबा करते हुए दोजख से पनाह मांगे और जन्नत में जाने की दुआ मांगे। रोजेदारों के लिए दरिया की मछली भी दुआ करती है और इफ्तार के वक्त तक उसके लिए अल्लाह से दुआ करती रहती है।
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