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मेरठ: 1.80 करोड़ रुपये की वसूली का आरोप; समिति बोली- प्रक्रिया पारदर्शी, हिसाब देखने आ सकते हैं

Fri, 04 Sep 2026 12:33 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 04 Sep 2026 12:33 PM IST
सार

मेरठ के सेंट्रल मार्केट प्रकरण में मेरठ बंद के बाद चंदे के हिसाब को लेकर विवाद शुरू हो गया है। डॉ. नगेंद्र ने 1.80 करोड़ रुपये चंदा वसूली का आरोप लगाया, जबकि समिति ने प्रक्रिया पारदर्शी बताते हुए हिसाब देखने का न्योता दिया है।

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Dispute Over Donation Collection Erupts in Meerut Central Market, ₹1.80 Crore Allegation Sparks Row
सेंट्रल मार्केट प्रकरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के विरोध में मेरठ बंद के बाद अब आंदोलन के लिए जुटाए जा रहे चंदे के हिसाब को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर व्यापारी और आंदोलन से जुड़े लोग एक-दूसरे के आरोपों का जवाब दे रहे हैं। कुछ व्यापारियों की ओर से अधिवक्ता की फीस के नाम पर 1.80 करोड़ रुपये चंदा इकट्ठा करने और बंदरबांट का आरोप लगाया गया है।
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मेरठ बंद के अगले दिन सोशल मीडिया पर उठा चंदे का मुद्दा
संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर के आह्वान पर बुधवार को मेरठ बंद में शास्त्रीनगर, जागृति विहार, माधवपुरम समेत कई इलाकों के बाजार बंद रहे थे। इसके अगले दिन सोशल मीडिया पर नीमा के पूर्व अध्यक्ष और सर्वोदय नर्सिंग होम के मालिक डॉ. नगेंद्र की ओर से चंदे की रकम को लेकर सवाल उठाए गए।
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डॉ. नगेंद्र ने आरोप लगाया कि अधिवक्ता की फीस के नाम पर अब तक 1.80 करोड़ रुपये चंदा इकट्ठा किया गया है और इसकी बंदरबांट की जा रही है। उन्होंने आवास-विकास परिषद के अधीक्षण अभियंता राहुल यादव के निलंबन और आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग को भी गलत बताया।
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‘नर्सिंग होम एसोसिएशन ने दिए थे 10 लाख’
डॉ. नगेंद्र ने कहा कि नर्सिंग होम एसोसिएशन की ओर से ही 10 लाख रुपये एकत्र करके दिए गए थे। इसके बाद चंदे के हिसाब को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और कटाक्ष का दौर चलता रहा।

समिति ने कहा- चंदे की प्रक्रिया पारदर्शी
संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर ने चंदे को लेकर उठे आरोपों पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि चंदे की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने आरोप लगाने वाले व्यापारियों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और पूरा हिसाब देखने को कहा है।

लोकेश खुराना ने धमकी के वीडियो पर जताई चिंता
सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर बुधवार को गुरुद्वारा रोड पर हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान मंच से की गई टिप्पणियों के वायरल वीडियो को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने चिंता जताई है।

खुराना का कहना है कि वायरल वीडियो में उनके खिलाफ इलाज करने की धमकी दी जा रही है। उनका आरोप है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में खुले मंच से इस तरह की टिप्पणी की गई।

‘21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में उठाएंगे मामला’
लोकेश खुराना ने कहा कि वह धमकी के मामले को अदालत में ले जाएंगे। उनका कहना है कि 21 सितंबर को सेंट्रल मार्केट प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान इस मामले को उठाया जाएगा। खुराना ने कहा कि उन्हें अनहोनी का डर सताने लगा है। उन्होंने कहा कि अगर उनके साथ कुछ होता है तो इसके लिए धमकी देने वाले लोग जिम्मेदार होंगे।

‘नागेंद्र को हिसाब मांगने का अधिकार नहीं’: अंबेश पंवार
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अंबेश पंवार ने डॉ. नगेंद्र के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि डॉ. नगेंद्र ने कोई चंदा नहीं दिया है, इसलिए उन्हें हिसाब मांगने का अधिकार नहीं है। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता की फीस अभी दी ही नहीं गई है और एसोसिएशन के पास ही धनराशि मौजूद है।

ईडब्ल्यूएस और एलआईजी भवन स्वामियों के साथ हुई बैठक
उधर, आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों ने ईडब्ल्यूएस और एलआईजी भवन स्वामियों के साथ कार्यालय में बैठक की। भवन स्वामियों ने बताया कि अधिकारियों ने पुनर्वास को लेकर सभी के विचार जाने।

बैठक में अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सेटबैक छोड़ने के लिए कहा। वहीं रविंद्र गुर्जर का कहना है कि 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है, इसलिए इससे पहले अधिकारियों को आवंटियों की परेशानी नहीं बढ़ानी चाहिए।

सेंट्रल मार्केट प्रकरण में आरोप-प्रत्यारोप तेज
मेरठ बंद के बाद अब आंदोलन के भीतर ही चंदे के हिसाब और सार्वजनिक मंच से कथित धमकी के मुद्दे उठने लगे हैं। एक पक्ष पारदर्शिता का दावा कर रहा है तो दूसरा पक्ष चंदे के इस्तेमाल पर सवाल उठा रहा है। इसी बीच सेंट्रल मार्केट प्रकरण की अगली सुनवाई 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होनी है।
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