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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Exclusive: Exclusive Breastfeeding Falls 46.2% in Saharanpur, Diarrhoea Cases Rise; NFHS-6 Data Reveals Concer

एक्सक्लूसिव: नवजातों की ढाल कमजोर, स्तनपान में 46.2 फीसदी गिरावट, शिशु को दूध पिलाने पर नहीं माताओं का जोर

Fri, 04 Sep 2026 02:11 PM IST
Dimple Sirohi रोशन गिरि, संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
रोशन गिरि, संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 04 Sep 2026 02:11 PM IST
सार

 NFHS-6 (2023-24) के अनुसार सहारनपुर में छह माह तक केवल मां का दूध पीने वाले शिशुओं की दर 67.4% से घटकर 21.2% रह गई। इसी दौरान बच्चों में डायरिया 6.1% से बढ़कर 15.3% पहुंच गया।

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Exclusive: Exclusive Breastfeeding Falls 46.2% in Saharanpur, Diarrhoea Cases Rise; NFHS-6 Data Reveals Concer
स्तनपान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6, 2023-24) के मुताबिक, जिले में छह माह तक केवल मां का दूध पीने वाले शिशुओं का प्रतिशत 67.4 से घटकर 21.2 फीसदी रह गया है। वहीं, चिंता की बात यह भी है कि इसी दौरान बच्चों में डायरिया 6.1 से बढ़कर 15.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

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स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण समय-समय पर नियमित अंतराल पर किया जाता है। हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के आंकड़े जारी किए हैं, जो वर्ष 2023-24 के दौरान हुआ था। 

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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थागत प्रसव के बाद देखभाल और बीमारी में इलाज कराने की प्रवृत्ति बेहतर हुई है। जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 26.7 से बढ़कर 37.1 प्रतिशत हुआ है यानी 10.4 प्रतिशत सुधार हुआ, लेकिन छह माह तक स्तनपान, विटामिन-ए और महत्वपूर्ण टीकों में गिरावट आई है। छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने की दर 46.2 प्रतिशत गिरी है।

हेपेटाइटिस-बी की तीसरी खुराक पाने वाले बच्चों का प्रतिशत 82.7 से घटकर 62.8 प्रतिशत हो गया। विटामिन-ए की खुराक पाने वाले बच्चों में भी गिरावट आई। 82.7 से घटकर 65.5 प्रतिशत पहुंच।
 

स्तनपान की घटती दर के प्रमुख कारण
सहारनपुर ऑब्स एवं गायनी सोसायटी अध्यक्ष डॉ. पूनम त्यागी ने बताया कि स्तनपान की घटती दर के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। पहला निजी क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को प्रसव के बाद लंबे समय तक छुट्टी नहीं मिल पाती। ऐसे में महिलाएं मजबूरी में ऊपर का दूध या अन्य आहार शुरू कर देती हैं। 

दूसरा गर्भावस्था और प्रसव के बाद पर्याप्त संतुलित खानपान है। बदलती जीवनशैली में पौष्टिक भोजन की जगह फास्ट फूड, अनियमित भोजन और कम पौष्टिक आहार का चलन बढ़ रहा है। तीसरा प्रसव के तुरंत बाद विशेषकर सिजेरियन डिलीवरी।

मां का दूध सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंद्रा सिंह का कहना है कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए केवल भोजन नहीं, बल्कि सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है। यह शिशु का पहला टीका है, जो संक्रमणों से बचाने, कुपोषण रोकने और उसके शारीरिक एवं मानसिक विकास की मजबूत नींव रखता है।

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