एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक ही सीमित नहीं हैं, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों में भी लगातार इसका खतरा बना हुआ है। हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि अगस्त खत्म होते-होते दिल्ली में संक्रमितों की संख्या 3200 से भी ज्यादा हो चुकी थी। दिल्ली में तो इस साल स्वाइन फ्लू ने पिछले सात साल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। इसके अलावा 2 सितंबर तक उत्तर प्रदेश में एच1ए1 के 685 मामलों की पुष्टि प्रयोगशाला में हो चुकी है।
स्वाइन फ्लू: हर बार बुखार होना जरूरी नहीं, सिर्फ ये दिक्कतें भी हो सकती हैं एच1एन संक्रमण का संकेत
एच1एन1 समेत फ्लू के संक्रमण में हर व्यक्ति को बुखार हो, यह जरूरी नहीं है। बिना बुखार के भी खांसी, गले में खराश, नाक बंद होना, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान जैसे लक्षण दिख सकते हैं। सिर्फ लक्षणों से बीमारी की पहचान नहीं की जा सकती है, जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह और जांच भी जरूरी है।
बिना बुखार के भी हो सकता है स्वाइन फ्लू का खतरा
अब तक हम सभी ये जान ही चुके हैं कि एच1एन1 भी इन्फ्लुएंजा-ए वायरस का एक प्रकार है। इससे होने वाली बीमारी में तेज बुखार को सबसे आम लक्षण माना जाता रहा है, लेकिन हर संक्रमित व्यक्ति को बुखार हो, यह जरूरी नहीं है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) की रिपोर्ट से भी साफ होता है कि कुछ लोगों में फ्लू के दौरान सांस से जुड़े लक्षण बिना बुखार के भी हो सकते हैं।
- डॉक्टर कहते हैं, यही वजह है कि बिना बुखार के खांसी, गले में दर्द, नाक बहने या बंद होना, सिरदर्द और बहुत ज्यादा थकान को सिर्फ सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।
- सिर्फ एक लक्षण देखकर एच1एन1 की पहचान करना मुश्किल है।
- सीडीसी के अनुसार बुजुर्गों में फ्लू के कारण बुखार न भी हो सकता है तो भी कभी-कभी भूख कम लगने और अन्य लक्षणों की बीमारी का निदान हो सकता है।
- बच्चों में उल्टी और दस्त की शिकायत ज्यादा देखी जा सकती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में फैमिली फिजिशियन डॉ अरविंद डबास कहते हैं, खांसी, गले में खराश, नाक बंद होने या थकान जैसे लक्षण फ्लू के साथ-साथ दूसरे सांस संबंधी संक्रमणों में भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर यह पक्का कहना मुश्किल है कि संक्रमण एच1एन1 का ही है।
- फ्लू की पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के हिसाब से जांच की सलाह दे सकते हैं।
- इसके लिए रैपिड फ्लू टेस्ट और मॉलिक्यूलर टेस्ट जैसे विकल्प मौजूद हैं।
- मॉलिक्यूलर टेस्ट वायरस के आनुवंशिक पदार्थ यानी वायरल आरएनए की पहचान करता है और आमतौर पर रैपिड एंटीजन टेस्ट से ज्यादा संवेदनशील होता है।
- हालांकि हर मरीज में जांच जरूरी नहीं होती।
- डॉक्टर लक्षणों, आसपास फ्लू के संक्रमण की स्थिति और मरीज में जोखिम को देखकर फैसला करते हैं कि संक्रमण की पहचान के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए।
डॉक्टर कहते हैं, बुखार न होने पर भी आप फ्लू का शिकार हो सकते हैं। बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में बुखार न होने के बावजूद इन्फ्लुएंजा हो सकता है। कुछ लोगों में बीमारी गंभीर रूप भी ले सकती है।
- अगर आपमें फ्लू जैसे लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं, सांस लेने में परेशानी हो रही है तो तुरंत डॉक्टर की सहायता लेनी चाहिए।
- फ्लू के इलाज में कुछ लोगों के लिए एंटीवायरल दवाएं उपयोगी हो सकती हैं।
- एच1एन1 या फ्लू की पहचान में सबसे बड़ी गलती यही हो सकती है कि हम सिर्फ बुखार को बीमारी का पैमाना मान ले।
डॉक्टर कहते हैं, स्वाइन फ्लू को लेकर एक चिंता ये भी रही है कि संक्रमित व्यक्ति में बीमारी का पता चलने से पहले ही वह दूसरे लोगों तक संक्रमण फैला सकता है। बीमारी के शुरुआती करीब तीन दिनों में संक्रमण फैलाने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसलिए बुखार नहीं है तो भी फ्लू के अन्य लक्षणों को भी नजरअंदाज न करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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