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डायरेक्टर समेत तीन के खिलाफ मुकदमा
लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 09 Apr 2015 07:37 PM IST
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मेला मैदान रोड पर स्थित कोलकाता की एमबीके बिजनेस डेवलपमेंट कंपनी द्वारा लोगों का पैसा जमा कर उसकी अदायगी न करने का मामला सामने आया है। एक महिला की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर समेत तीन लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में पुलिस ने एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया है।
नीमगांव थाना क्षेत्र के गांव बम्हनाबाद निवासी आरती देवी ने एसपी को शिकायती पत्र देकर शहर में संचालित एक प्राइवेट बैंक में जमा रुपये दिलाने की मांग की थी। आरोप है कि एमबीके बिजनेस डेवलपमेंट कंपनी (बैंक) में 2.20 लाख रुपये जमा किए थे, जब रुपये निकालने चाहे तो कर्मचारियों ने टरकाना शुरू कर दिया। एसपी अरविंद सेन के निर्देश पर कोतवाल दुर्गेश चंद्र श्रीवास्तव ने कंपनी के दफ्तर पर छापा मारा, जहां रिकार्डों को खंगालने के बाद दफ्तर सील कर दिया। छानबीन के दौरान कंपनी के स्थानीय कर्मचारियों ने पुलिस को बताया है कि कंपनी के घाटे में होने के कारण लोगों को भुगतान में देरी र्हुई है। वहीं कंपनी के कोलकाता निवासी अधिकारी भी करीब एक माह पहले ही वेतन न मिलने का हवाला देकर रफूचक्कर हो चुके थे। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि कंपनी के मालिक और अधिकारी लोगों का रुपया हड़पने के बाद फरार हो चुके हैं क्योंकि मौके पर मिले कर्मचारियों ने खुद को कमीशन एजेंट बताया है।
कोतवाल दुर्गेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया है कि कंपनी के लालपुर बैैरियर निवासी ब्रांच अफसर सफीउल्ला, कोलकाता निवासी डायरेक्टर प्रफुल्ल कुमार और डिप्टी डायरेक्टर अंशुमान घोष के खिलाफ फर्जी कूटरचित तरीके से पासबुक, रसीद तैयार करने और धोखे से पैसा जमा करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आईपीसी की 467, 468, 471, 420 धाराएं लगाई हैं। पूरे मामले की छानबीन की जा रही है, जिसमें दफ्तर के ब्रांच अफसर सफीउल्ला को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा मालिक और डायरेक्टर से पूछताछ की जाएगी।
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नीमगांव थाना क्षेत्र के गांव बम्हनाबाद निवासी आरती देवी ने एसपी को शिकायती पत्र देकर शहर में संचालित एक प्राइवेट बैंक में जमा रुपये दिलाने की मांग की थी। आरोप है कि एमबीके बिजनेस डेवलपमेंट कंपनी (बैंक) में 2.20 लाख रुपये जमा किए थे, जब रुपये निकालने चाहे तो कर्मचारियों ने टरकाना शुरू कर दिया। एसपी अरविंद सेन के निर्देश पर कोतवाल दुर्गेश चंद्र श्रीवास्तव ने कंपनी के दफ्तर पर छापा मारा, जहां रिकार्डों को खंगालने के बाद दफ्तर सील कर दिया। छानबीन के दौरान कंपनी के स्थानीय कर्मचारियों ने पुलिस को बताया है कि कंपनी के घाटे में होने के कारण लोगों को भुगतान में देरी र्हुई है। वहीं कंपनी के कोलकाता निवासी अधिकारी भी करीब एक माह पहले ही वेतन न मिलने का हवाला देकर रफूचक्कर हो चुके थे। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि कंपनी के मालिक और अधिकारी लोगों का रुपया हड़पने के बाद फरार हो चुके हैं क्योंकि मौके पर मिले कर्मचारियों ने खुद को कमीशन एजेंट बताया है।
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कोतवाल दुर्गेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया है कि कंपनी के लालपुर बैैरियर निवासी ब्रांच अफसर सफीउल्ला, कोलकाता निवासी डायरेक्टर प्रफुल्ल कुमार और डिप्टी डायरेक्टर अंशुमान घोष के खिलाफ फर्जी कूटरचित तरीके से पासबुक, रसीद तैयार करने और धोखे से पैसा जमा करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आईपीसी की 467, 468, 471, 420 धाराएं लगाई हैं। पूरे मामले की छानबीन की जा रही है, जिसमें दफ्तर के ब्रांच अफसर सफीउल्ला को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा मालिक और डायरेक्टर से पूछताछ की जाएगी।
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