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आतंकियों का अंकल ‘द विक’ किताब से पढ़ाता था - ए से ‘एके-47’ और बी से ‘बैटल’

Sat, 11 Mar 2017 06:21 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 11 Mar 2017 06:21 AM IST
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gaus mohammad was making terrorists
आतंक का मास्टर माइंड
आतंकी गतिविधियों का मास्टर माइंड और आतंकियों का ट्रेनर गौस मोहम्मद खान आईएसआईएस की प्रतिबंधित किताब ‘दविक’ की प्रतियां लड़कों को देता था उन्हें जिहाद की बात सिखाता था। ऐसी ही कई और बातें हैं जो कानपुर में रहने वाले उसके रिश्तेदार ही नहीं पूरे हिन्दुस्तान को चौंका रही हैं। यूपी के जिस शहर से गौस ताल्लुक रखता था वहीं पर ही उसने रेल हादसा कराकर आतंक का ट्रायल किया था। जीएम दविक किताब के अलावा आईएसआईएस से जुड़े अन्य साहित्य सीडी के जरिए ट्रेनिंग ले रहे लड़कों को उपलब्ध कराता था।
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‘बी’ से ‘बैटल’ (जंग) और ‘जी’ से ‘गन’ (बंदूक) 

gaus mohammad was making terrorists
डेमो पिक
आईएसआईएस की किताब में ‘बी’ से ‘बैटल’ (जंग) और ‘जी’ से ‘गन’ (बंदूक) दिया गया है। बंदूक की जगह एक एके-47 राइफल की तस्वीर दी गई है। किताब में ‘एस’ से ‘स्नाइपर’ या ‘निशानेबाज’ सिखाया गया है और इसको समझने के लिए एक आईएसआईएस लड़ाका की तस्वीर दी गई है। लड़ाका अपनी राइफल ताने है। गणित की किताबों में भी उदाहरणों के लिए एके-47 राइफलों और बमों का उपयोग किया गया है। ऐसी ही एक किताब पिछले दिनों इराकी सैनिकों ने उत्तरी मोसुल पर कब्जा करने के दौरान एक अनाथालय से हासिल की थी। ‘इंग्लिश फॉर द इस्लामिक स्टेट’ नाम की किताबें मिलीं जिसमें ए,बी, सी इस तरह पढ़ाया जा रहा था कि बचपन से ही लड़कों के दिमाग में हिंसक बातें घर जाएं।  

 

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ये है जीएम का प्रोफाइल...

gaus mohammad was making terrorists
आतंक का मास्टर माइंड
नाम- गौस मोहम्मद (जीएम खान)
-निवासी- मनोहर नगर, जाजमऊ
-मूल निवास- रायबरेली, महाराजगंज
-एयरफोर्स से 1995 में एयरफोर्स से लिया था रिटायरमेंट
-1995-97 तक राजस्थान के जमियत उल हिदायत संस्थान में शिक्षक रहा
-1997 के बाद कई साल तक दुबई में नौकरी की फिर पत्नी की बीमारी पर घर लौटा
-इसके बाद कई बार दुबई गया और अब आईएस के नेटवर्क में होने की बात सामने आई
-माना जा रहा है कि जीएम के जरिए ही शहर में आईएस के खुरासान मॉड्यूल से जुड़े युवा

 

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लैपटॉप, मोबाइल पर ही व्यस्त रहता था

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गौस मोहम्मद आतंक का मास्टर माइंड
जीएम खान के परिजनों की मानें तो कम बात करने वाला जीएम खान कब इतने बड़े आतंकी संगठन से जुड़ गया पता ही नहीं चला। संदिग्ध आतंकी घरवालों से भी ज्यादा नहीं बोलता था। अक्सर लैपटॉप, मोबाइल पर ही व्यस्त रहता था। इतना ही नहीं सिर्फ गिने-चुने लोगों के यहां ही उसका आना-जाना था। लखनऊ में भी वह कहां रहता था इसका पता घरवालों को नहीं है। गुमनाम जिंदगी बिताने पर दोनों बेटों की अकसर जीएम खान से खटपट होती थी। पत्नी, दो बेटों और बहुओं के साथ ही अपने पोते को खिलाने वाला यह आतंकी इतना खतरनाक है किसी को अंदेशा भी नहीं था। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं। आईएसआईएस के गुर्गों के साथी अजहर उर्फ शकील ने जांच एजेंसियों को बताया है कि जीएम खान यानी गौस मोहम्मद खान ने गैंग से जुड़े युवकों को असलहा चलाने की ट्रेनिंग दी थी। गैंग के सदस्य जीएम खान को अंकल कहते हैं। कई लड़के आतिफ के जरिए उससे मिले थे।

 

मुठभेड़ वाले दिन भी लखनऊ में ही था जीएम खान

gaus mohammad was making terrorists
गौस मोहम्मद और अजहर अरेस्ट

सात मार्च को जब एटीएस के कमांडो काकोरी के हाजी कालोनी में सैफुल्लाह केसाथ मुठभेड़ कर रहे थे तो जीएम खान बाहर खड़ा तमाशा देख रहा था। पुलिस की बढ़ी चहल पहल के बाद वह धीरे से वहां से निकल गया था। सूत्रों की मानें तो वह मुठभेड़ से पहले सैफुल्लाह के ही साथ था। एटीएस के आने से कुछ देर पहले किसी काम से घर के बाहर निकला था। जब वापस आया तो दरवाजे पर एटीएस के कमांडो मोर्चा लिए हुए थे। वहां पर लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। एटीएस और पुलिस दोनों का ध्यान सिर्फ उस घर पर था जिसमें सैफुल्लाह छिपा हुआ था। बाहर मोर्चा लिए एटीएस के आईजी असीम अरुण और उनके कमांडो को भी नहीं पता था कि अंदर कितने संदिग्ध हैं। सूत्रों की मानें तो आपरेशन से पहले एटीएस ने जब लोकेशन ट्रेस की थी, तो भी जीएम खान की लोकेशन वहीं पर मिली थी। यही वजह थी कि पुलिस के अधिकारी भी भ्रम में थे कि संदिग्ध की संख्या एक है या दो। 

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