आतंकियों का अंकल ‘द विक’ किताब से पढ़ाता था - ए से ‘एके-47’ और बी से ‘बैटल’
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‘बी’ से ‘बैटल’ (जंग) और ‘जी’ से ‘गन’ (बंदूक)
ये है जीएम का प्रोफाइल...
-निवासी- मनोहर नगर, जाजमऊ
-मूल निवास- रायबरेली, महाराजगंज
-एयरफोर्स से 1995 में एयरफोर्स से लिया था रिटायरमेंट
-1995-97 तक राजस्थान के जमियत उल हिदायत संस्थान में शिक्षक रहा
-1997 के बाद कई साल तक दुबई में नौकरी की फिर पत्नी की बीमारी पर घर लौटा
-इसके बाद कई बार दुबई गया और अब आईएस के नेटवर्क में होने की बात सामने आई
-माना जा रहा है कि जीएम के जरिए ही शहर में आईएस के खुरासान मॉड्यूल से जुड़े युवा
लैपटॉप, मोबाइल पर ही व्यस्त रहता था
मुठभेड़ वाले दिन भी लखनऊ में ही था जीएम खान
सात मार्च को जब एटीएस के कमांडो काकोरी के हाजी कालोनी में सैफुल्लाह केसाथ मुठभेड़ कर रहे थे तो जीएम खान बाहर खड़ा तमाशा देख रहा था। पुलिस की बढ़ी चहल पहल के बाद वह धीरे से वहां से निकल गया था। सूत्रों की मानें तो वह मुठभेड़ से पहले सैफुल्लाह के ही साथ था। एटीएस के आने से कुछ देर पहले किसी काम से घर के बाहर निकला था। जब वापस आया तो दरवाजे पर एटीएस के कमांडो मोर्चा लिए हुए थे। वहां पर लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही थी। एटीएस और पुलिस दोनों का ध्यान सिर्फ उस घर पर था जिसमें सैफुल्लाह छिपा हुआ था। बाहर मोर्चा लिए एटीएस के आईजी असीम अरुण और उनके कमांडो को भी नहीं पता था कि अंदर कितने संदिग्ध हैं। सूत्रों की मानें तो आपरेशन से पहले एटीएस ने जब लोकेशन ट्रेस की थी, तो भी जीएम खान की लोकेशन वहीं पर मिली थी। यही वजह थी कि पुलिस के अधिकारी भी भ्रम में थे कि संदिग्ध की संख्या एक है या दो।