{"_id":"5bd0af30bdec2269b44451e8","slug":"31540402992-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक नवंबर से शुरू होगा पशुगणना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक नवंबर से शुरू होगा पशुगणना
Updated Wed, 24 Oct 2018 11:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक नवंबर से शुरू होगी पशुगणना
पशुगणना के हिसाब से तैयार होगी योजनाओं की रूपरेखा
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जल्द ही पशुपालन विभाग के कर्मचारी गांवों में जाकर पशुगणना करेंगे। इसमें गाय, भैंस, मुर्गी, बत्तख आदि पालतू पशु-पक्षियों के मौजूदा प्रजातियों का लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा। पशुगणना की प्रक्रिया एक नवंबर से प्रारंभ होगी। इसकी सारी प्रक्रिया पेपरलेस होगी। शासन ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को पत्र भेजकर समय से कार्रवाई शुरू कराने स्रह्य निर्देश दिए हैं।
जिले में बढ़ती जनसंख्या के सापेक्ष पशुओं की तादाद कम होती जा रही है। पालतू जानवरों में तमाम ऐसी प्रजातियां हैं जो धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं। जनपद में देसी गायों की नस्ल सीमित मात्रा में ही रह गई है। पालतू जानवरों में जरूरी प्रजातियां विलुप्त न हों, इनके संरक्षण के लिए सरकार हर पांच साल पर पशुगणना कराती है। पशुपालन विभाग के पशुधन प्रसार अधिकारी, फर्मासिस्ट, पशुमित्र, कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को पशुगणना की जिम्मेदारी दी गई है। एक गणनाकार को 4500 घरों की गणना का जिम्मा सौंपा गया है। इन्हें प्रति परिवार के हिसाब से विभाग की ओर से सात रुपये मेहनताना दिया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि इस बार पशुगणना की प्रक्रिया पेपरलेस होगी। गणनाकारों को विभाग की ओर टेबलेट मुहैया कराया जाएगा। इसमें सिर्फ पशुगणना का ही सॉफ्टवेयर लोड होगा। सभी निर्देशों को भरकर गणना की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पशुगणना समाप्त होने के बाद सभी टेबलेट विभाग में जमा कर दिए जाएंगे।
कोट
एक नवंबर से पालतू पशु-पक्षियों की गणना शुरू की जाएगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। पशुगणना का उद्देश्य विलुप्त हो रही प्रजातियों का आकलन कर उनके संरक्षण के लिए योजना तैयार करना होता है। साथ ही पशुपालन में आ रही गिरावट को देखते हुए भी सरकार विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित करती है।
विज्ञापन
-केपी यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
विज्ञापन
पशुगणना के हिसाब से तैयार होगी योजनाओं की रूपरेखा
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जल्द ही पशुपालन विभाग के कर्मचारी गांवों में जाकर पशुगणना करेंगे। इसमें गाय, भैंस, मुर्गी, बत्तख आदि पालतू पशु-पक्षियों के मौजूदा प्रजातियों का लेखा-जोखा तैयार किया जाएगा। पशुगणना की प्रक्रिया एक नवंबर से प्रारंभ होगी। इसकी सारी प्रक्रिया पेपरलेस होगी। शासन ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को पत्र भेजकर समय से कार्रवाई शुरू कराने स्रह्य निर्देश दिए हैं।
जिले में बढ़ती जनसंख्या के सापेक्ष पशुओं की तादाद कम होती जा रही है। पालतू जानवरों में तमाम ऐसी प्रजातियां हैं जो धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं। जनपद में देसी गायों की नस्ल सीमित मात्रा में ही रह गई है। पालतू जानवरों में जरूरी प्रजातियां विलुप्त न हों, इनके संरक्षण के लिए सरकार हर पांच साल पर पशुगणना कराती है। पशुपालन विभाग के पशुधन प्रसार अधिकारी, फर्मासिस्ट, पशुमित्र, कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ताओं को पशुगणना की जिम्मेदारी दी गई है। एक गणनाकार को 4500 घरों की गणना का जिम्मा सौंपा गया है। इन्हें प्रति परिवार के हिसाब से विभाग की ओर से सात रुपये मेहनताना दिया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि इस बार पशुगणना की प्रक्रिया पेपरलेस होगी। गणनाकारों को विभाग की ओर टेबलेट मुहैया कराया जाएगा। इसमें सिर्फ पशुगणना का ही सॉफ्टवेयर लोड होगा। सभी निर्देशों को भरकर गणना की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पशुगणना समाप्त होने के बाद सभी टेबलेट विभाग में जमा कर दिए जाएंगे।
विज्ञापन
कोट
एक नवंबर से पालतू पशु-पक्षियों की गणना शुरू की जाएगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। पशुगणना का उद्देश्य विलुप्त हो रही प्रजातियों का आकलन कर उनके संरक्षण के लिए योजना तैयार करना होता है। साथ ही पशुपालन में आ रही गिरावट को देखते हुए भी सरकार विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित करती है।
विज्ञापन
-केपी यादव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।