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शौचालय निर्माण में खेल, एक की दीवार गिरी, तो ज्यादातर के झड़ रहे प्लास्टर
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अछल्दा (औरैया)। खुले में शौच से मुक्ति के लिए स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शौचालय निर्माण में जमकर ‘खेल’ किया गया। इन शौचालयों को बनवाने में घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने से शौचालयों के प्लास्टर झड़ने लगे तो एक शौचालय की दीवार एक महीने बाद ही धराशायी हो गई। ग्रामीणों ने शिकायत ग्राम विकास अधिकारी से की तो अनसुनी कर दी। लोग अब भी खुले में शौच जा रहे हैं।
अछल्दा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बघईपुर में 200 शौचालयों के बनाने का लक्ष्य था। ग्राम प्रधान की ओर से इस गांव में 150 शौचालयों का निर्माण कराया गया है। सितंबर 2018 में तुलाराम के शौचालय की दीवार अक्तूबर में गिर गई। तुलाराम ने कई बार प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी से शिकायत की और घटिया सामग्री लगाने का आरोप लगाया, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। तुलाराम ने बताया कि परिवार खुले में शौच जाने को मजबूर है। इंद्रपाल ने बताया कि शौचालय के टैंक के नाम पर सिर्फ गड्ढे खोद दिए गए। इंद्रपाल ने बताया कि अक्तूबर से वह टैंक बनाए जाने को लेकर चक्कर काट रहा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दोनों लाभार्थी पांच महीने से शौचालय को सही कराने के लिए दौड़ रहे हैं, पर उनकी नहीं सुनी गई।
इसी तरह बघईपुर के मजरा खुमानपुर, रजपुरा, खेरा में बनाए गए 150 शौचालयों में ज्यादातर का प्लास्टर झड़ रहा है। किसी शौचालय के गड्ढे अधूरे पड़े हैं। गांव के लाभार्थी अहिबरन सिंह, मंगुलाल, राजेन्द्र दोहरे, जनवेद, श्रीकृष्ण,धीरेंद्र कुमार, सर्वेन्द्र सिंह, धीरेंद्र कुमार ने बताया कि उनके शौचालय अधूरे पड़े हैं, किसी में टैंक नहीं बना तो किसी में सीट नहीं रखी गई है।
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एसडीएम ने कहा कि शौचालयों के निर्माण में घटिया सामग्री की शिकायत आई है। इस मामले की जांच की जाएगी, जांच में मामला सही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ग्राम विकास अधिकारी अश्वनी कुमार सोनकर का कहना था कि बघईपुर में शौचालय निर्माण में अगर धांधली की गई है तो उसकी जांच की जाएगी।
उधर, बघईपुर शौचालयों के निर्माण में धांधली की बाबत ग्राम प्रधान दीप्ति देवी के पति अनिल कुमार का कहना है कि शौचालय बनाने के लिए विभाग की ओर से 12 हजार रुपये मिलते हैं। ऐसे में गुणवत्ता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने घटिया सामग्री लगाए जाने से इंकार किया है।
-एक की तो दीवार ही ढह गई, ज्यादातर के झड़ रहे प्लास्टर
अमर उजाला ब्यूरो
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अछल्दा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बघईपुर में 200 शौचालयों के बनाने का लक्ष्य था। ग्राम प्रधान की ओर से इस गांव में 150 शौचालयों का निर्माण कराया गया है। सितंबर 2018 में तुलाराम के शौचालय की दीवार अक्तूबर में गिर गई। तुलाराम ने कई बार प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी से शिकायत की और घटिया सामग्री लगाने का आरोप लगाया, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। तुलाराम ने बताया कि परिवार खुले में शौच जाने को मजबूर है। इंद्रपाल ने बताया कि शौचालय के टैंक के नाम पर सिर्फ गड्ढे खोद दिए गए। इंद्रपाल ने बताया कि अक्तूबर से वह टैंक बनाए जाने को लेकर चक्कर काट रहा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। दोनों लाभार्थी पांच महीने से शौचालय को सही कराने के लिए दौड़ रहे हैं, पर उनकी नहीं सुनी गई।
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इसी तरह बघईपुर के मजरा खुमानपुर, रजपुरा, खेरा में बनाए गए 150 शौचालयों में ज्यादातर का प्लास्टर झड़ रहा है। किसी शौचालय के गड्ढे अधूरे पड़े हैं। गांव के लाभार्थी अहिबरन सिंह, मंगुलाल, राजेन्द्र दोहरे, जनवेद, श्रीकृष्ण,धीरेंद्र कुमार, सर्वेन्द्र सिंह, धीरेंद्र कुमार ने बताया कि उनके शौचालय अधूरे पड़े हैं, किसी में टैंक नहीं बना तो किसी में सीट नहीं रखी गई है।
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एसडीएम ने कहा कि शौचालयों के निर्माण में घटिया सामग्री की शिकायत आई है। इस मामले की जांच की जाएगी, जांच में मामला सही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ग्राम विकास अधिकारी अश्वनी कुमार सोनकर का कहना था कि बघईपुर में शौचालय निर्माण में अगर धांधली की गई है तो उसकी जांच की जाएगी।
उधर, बघईपुर शौचालयों के निर्माण में धांधली की बाबत ग्राम प्रधान दीप्ति देवी के पति अनिल कुमार का कहना है कि शौचालय बनाने के लिए विभाग की ओर से 12 हजार रुपये मिलते हैं। ऐसे में गुणवत्ता की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने घटिया सामग्री लगाए जाने से इंकार किया है।
-एक की तो दीवार ही ढह गई, ज्यादातर के झड़ रहे प्लास्टर
अमर उजाला ब्यूरो