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चिकित्सकों की मनमानी से बढ़ा मरीजों का दर्द, निराश होकर लौटे घर
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फोटो 14, अंबेडकरनगर जिला अस्पताल में चिकित्सक के इंतजार में बैठे नागरिक।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। हाड़ कंपाऊ ठंड के बीच सोमवार को इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे मरीज व उनके तीमारदारों को चिकित्सकों की लापरवाही का दंश झेलना पड़ा। विलंब से पहुंचे चार चिकित्सक समय से पहले ही अस्पताल छोड़कर चले गए। नतीजा यह रहा कि कड़ाके की ठंड में ठिठुरते हुए मरीजों को संबंधित चिकित्सक का इंतजार करने को मजबूर होना पड़ा। कुछ मरीज ऐसे भी सामने आए, जिन्हें चिकित्सक न मिलने पर बगैर इलाज के ही मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। नाराज मरीजों व उनके तीमारदारों ने कहा कि हाड़ कंपाऊ ठंड में मुश्किलें झेलते हुए वे अस्पताल तक पहुंचे, लेकिन संबंधित चिकित्सक की लापरवाही के चलते मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। ऐसे लापरवाह चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज की उम्मीदों को तगड़ा झटका लग रहा है। सस्ते व बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को ज्यादातर समय मायूस होकर लौटना पड़ता है। दरअसल चिकित्सकों का विलंब से अस्पताल पहुंचने व समय से पहले अस्पताल छोड़ देने की आदत दूर नहीं हो रही है। बीते कुछ दिनों से मौसम अत्यंत खराब है।
तापमान में लगातार कमी हो रही है। ऐसे खराब मौसम में भी मरीजों का समुचित इलाज सुनिश्चित हो सके, इसे लेकर चिकित्सक गंभीर नहीं हो रहे हैं। सोमवार को भी कुछ इसी प्रकार का दृश्य देखने को मिला। वैसे तो ओपीडी का समय सुबह नौ बजे से अपराह्न दो बजे तक है, लेकिन सोमवार को ज्यादातर चिकित्सक करीब 10 बजे अस्पताल पहुंचे, जबकि लगभग एक बजे अस्पताल छोड़कर चले गए। फिजीशियन डॉ. डीपी वर्मा, बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आरके वर्मा, नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी जायसवाल व डॉ. अतीक आलम न सिर्फ विलंब से अस्पताल पहुंचे बल्कि समय से पहले ही अस्पताल छोड़ दिया। नतीजा यह रहा कि संबंधित चिकित्सकों को दिखाने पहुंचे ज्यादातर मरीजों व उनके तीमारदारों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
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कटेहरी निवासी अनिल कुमार अपने पुत्र अवनीश के इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे। दर्द से कराहते अवनीश ने कहा कि वह सुबह नौ बजे ही अस्पताल अपने पिता के साथ पहुंच गया था। फिजीशियन को दिखाना था। 10 बजे के बाद चिकित्सक आए, जिसके चलते ठंड व दर्द से उसे विभिन्न प्रकार की मुश्किलें हुईं। पिता अनिल ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध जब तक कड़ी कार्रावई नहीं की जाएगी, तब तक व्यवस्था में सुधार नहीं हो सकेगा।
ब्लड प्रेशर की मरीज आशा व शांति ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वे एक बजे लगभग अस्पताल पहुंचीं थी, लेकिन यहां पता चला कि कोई चिकित्सक नहीं हैं। अब बगैर इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है। नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाने पहुंची बेलवाई निवासी गुलाबा देवी ने कहा कि अस्पताल में कोई नेत्र चिकित्सक ही नहीं है। हाड़कंपाऊ ठंड में बड़ी मुश्किलों से यहां तक पहुचे थे, लेकिन अब बगैर इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है। इसी प्रकार अन्य कई मरीज व तीमारदारों को चिकित्सकों की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा।
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जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज की उम्मीदों को तगड़ा झटका लग रहा है। सस्ते व बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को ज्यादातर समय मायूस होकर लौटना पड़ता है। दरअसल चिकित्सकों का विलंब से अस्पताल पहुंचने व समय से पहले अस्पताल छोड़ देने की आदत दूर नहीं हो रही है। बीते कुछ दिनों से मौसम अत्यंत खराब है।
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तापमान में लगातार कमी हो रही है। ऐसे खराब मौसम में भी मरीजों का समुचित इलाज सुनिश्चित हो सके, इसे लेकर चिकित्सक गंभीर नहीं हो रहे हैं। सोमवार को भी कुछ इसी प्रकार का दृश्य देखने को मिला। वैसे तो ओपीडी का समय सुबह नौ बजे से अपराह्न दो बजे तक है, लेकिन सोमवार को ज्यादातर चिकित्सक करीब 10 बजे अस्पताल पहुंचे, जबकि लगभग एक बजे अस्पताल छोड़कर चले गए। फिजीशियन डॉ. डीपी वर्मा, बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आरके वर्मा, नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी जायसवाल व डॉ. अतीक आलम न सिर्फ विलंब से अस्पताल पहुंचे बल्कि समय से पहले ही अस्पताल छोड़ दिया। नतीजा यह रहा कि संबंधित चिकित्सकों को दिखाने पहुंचे ज्यादातर मरीजों व उनके तीमारदारों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
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कटेहरी निवासी अनिल कुमार अपने पुत्र अवनीश के इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे। दर्द से कराहते अवनीश ने कहा कि वह सुबह नौ बजे ही अस्पताल अपने पिता के साथ पहुंच गया था। फिजीशियन को दिखाना था। 10 बजे के बाद चिकित्सक आए, जिसके चलते ठंड व दर्द से उसे विभिन्न प्रकार की मुश्किलें हुईं। पिता अनिल ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध जब तक कड़ी कार्रावई नहीं की जाएगी, तब तक व्यवस्था में सुधार नहीं हो सकेगा।
ब्लड प्रेशर की मरीज आशा व शांति ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि वे एक बजे लगभग अस्पताल पहुंचीं थी, लेकिन यहां पता चला कि कोई चिकित्सक नहीं हैं। अब बगैर इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है। नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाने पहुंची बेलवाई निवासी गुलाबा देवी ने कहा कि अस्पताल में कोई नेत्र चिकित्सक ही नहीं है। हाड़कंपाऊ ठंड में बड़ी मुश्किलों से यहां तक पहुचे थे, लेकिन अब बगैर इलाज के ही वापस लौटना पड़ रहा है। इसी प्रकार अन्य कई मरीज व तीमारदारों को चिकित्सकों की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ा।