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विकास दुबे की दहशत: बगैर चढ़ावा चढ़ाए नहीं चलने देता उद्योग-धंधे, इन क्षेत्रों से विकास को पहुंचता है 50 लाख गुंडा टैक्स
Tue, 07 Jul 2020 11:41 PM IST
शिखा पांडेय
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
प्रशांत द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 07 Jul 2020 11:41 PM IST
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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
शिवराजपुर, चौबेपुर, शिवली व बिठूर थाना क्षेत्र में विकास दुबे की दहशत का ये आलम है कि बगैर उसकी इजाजत के कोई उद्योगपति अपना काम नहीं शुरू करता। उद्योगपतियों से लेकर खनन माफिया तक विकास को चढ़ावा चढ़ाते जब उन्हें संरक्षण मिलता। आसपास क्षेत्र में चलने वाले बड़े उद्योगों से वसूला जाने वाला लाखों का गुंडा टैक्स ही विकास दुबे की आय का मुख्य साधन था।
विकास दुबे (काले कोट में)
- फोटो : amar ujala
बिठूर, शिवराजपुर और चौबेपुर थाना क्षेत्र में डिटर्जेंट, इलेक्ट्रानिक पार्ट्स, धागा, मिल्क प्रोडक्ट्स, मसाले, प्लास्टिक दाना, राइस मिल, बर्फ आदि की करीब 100 से अधिक बड़ी फैक्ट्रियां हैं। इसके अलावा आधा दर्जन बड़े मुर्गी फार्म और दर्जन भर से अधिक कोल्ड स्टोरेज हैं। वहीं, चौबेपुर में गंगा कटरी की दुर्गापुर पट्टी बिल्हौर, बिठूर, उन्नाव और बांगरमऊ विधानसभाओं के बॉर्डर में आते हैं।
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
इस कारण यह क्षेत्र खनन माफियाओं के लिए काफी मुफीद माना जाता है। सूत्र बताते हैं कि इन सभी कामों और उद्योगों को चलाने के लिए मालिकों को पंडितजी को समझना पड़ता है। ऐसा न करने वालों को क्षेत्र में काम नहीं करने दिया जाता था। उनकी जमीनों पर कब्जा हो जाता था। बिठूर में करीब तीन साल पहले जमीन कब्जे को लेकर गोलीकांड हुआ था।
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
इसमें विकास दुबे का नाम आया था। जानकारों के अनुसार उद्योगों से विकास को महीने में करीब 50 लाख रुपये गुंडा टैक्स जाता था। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर बिल्डिंग मैटेरियल से लेकर हर तरह की आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता विकास के एक फोन पर हो जाती थी।
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कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मी शहीद
- फोटो : अमर उजासा
विरोध का भुगतना पड़ता खामियाजा
उद्योगों और खनन से जुड़े लोगों ने पहचान न उजागर करने की शर्त पर बताया कि ‘पंडितजी’ के फरमान का विरोध करने का मतलब जमीन या जान से हाथ धोना होता था। इसेके चलते दुर्गापुर पट्टी की कटरी में कई बार रातों में फायरिंग हुई, लेकिन विकास की दहशत के चलते पुलिस ने कभी कोई कार्रवाई नहीं की।
उद्योगों और खनन से जुड़े लोगों ने पहचान न उजागर करने की शर्त पर बताया कि ‘पंडितजी’ के फरमान का विरोध करने का मतलब जमीन या जान से हाथ धोना होता था। इसेके चलते दुर्गापुर पट्टी की कटरी में कई बार रातों में फायरिंग हुई, लेकिन विकास की दहशत के चलते पुलिस ने कभी कोई कार्रवाई नहीं की।