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यूपी: बेटी को ढूंढने के लिए पुलिस ने मांगे थे रुपये, भीख मांगकर वृद्धा ने जुटाई थी रकम, दो दरोगा निलंबित
Wed, 03 Feb 2021 04:22 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 03 Feb 2021 04:22 AM IST
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वृद्धा ने थाने पहुंच लगाई मदद की गुहार
- फोटो : amar ujala
कानपुर में लापता बेटी को ढूंढने के लिए डीजल के नाम पर गरीब दिव्यांग वृद्धा से वसूली करने के आरोप में मंगलवार को सनिगवां चौकी प्रभारी राजपाल सिंह व जांच अधिकारी अरुण कुमार को निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर डीआईजी ने यह कार्रवाई की है। वहीं मामले में पुलिस ने चार संदिग्ध लोगों को मंगलवार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
बेटी को ढूंढने के लिए थाने रिपोर्ट लिखाने पहुंची महिला
- फोटो : amar ujala
सनिगवां निवासी वृद्धा की किशोर बेटी सात जनवरी को लापता हो गई थी। वृद्धा ने नौ जनवरी को सनिगवां चौकी में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें पांच नामजद (परिचित) और दो अज्ञात को आरोपी बनाया था। आरोप है कि चौकी इंचार्ज राजपाल सिंह और अरुण कुमार ने बेटी को ढूंढने के लिए गाड़ी में डीजल भरवाने के नाम पर 12 हजार रुपये वसूल लिए।
गुहार लगाने पहुंची महिला
- फोटो : amar ujala
इसके बाद भी दोनों ने कोई कार्यवाही नहीं की। उसने भीख मांगकर रकम जुटाई थी। सोमवार को वृद्धा की शिकायत पर डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया था। जांच में आरोप सही पाए जाने पर डीआईजी ने दोनों दरोगा को निलंबित कर दिया। विभागीय जांच सीओ कैंट को सौंपी है। इसी के आधार पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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चकेरी थाने पहुंची वृद्धा
- फोटो : amar ujala
आखिर एफआईआर क्यों नहीं ?
पूरे मामले में एक बात तो साफ हो गई है कि वृद्धा की मजबूरी का फायदा उठाकर दरोगा ने रकम वसूली। पुलिस की जांच में आरोप पर मुहर लग गई है। अब सवाल है कि दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। अगर सामान्य शख्स होता तो उस पर वसूली का केस दर्ज कर दिया जाता है। वृद्धा के मामले में विभागीय कार्रवाई कर कानूनी कार्रवाई से दरोगा को बचाया जा रहा है।
पूरे मामले में एक बात तो साफ हो गई है कि वृद्धा की मजबूरी का फायदा उठाकर दरोगा ने रकम वसूली। पुलिस की जांच में आरोप पर मुहर लग गई है। अब सवाल है कि दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। अगर सामान्य शख्स होता तो उस पर वसूली का केस दर्ज कर दिया जाता है। वृद्धा के मामले में विभागीय कार्रवाई कर कानूनी कार्रवाई से दरोगा को बचाया जा रहा है।
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पुलिस की जीप से डीआईजी ने छुड़वाया घर
- फोटो : amar ujala
हर मामले में वही रवैया
एसएसआई कौशलेंद्र प्रताप सिंह चोरी की कार इस्तेमाल करते पकडे़ गए। जांच में दोषी पाए गए। कार्रवाई के नाम पर उनका स्थानांतरण किया गया। बिठूर एसओ से शिवराजपुर थानेदार बना दिया गया। बिकरू कांड की एसआईटी जांच में इंस्पेक्टर राममूर्ति यादव दोषी पाए गए। विभागीय जांच भी जारी है लेकिन बजरिया थानेदार का चार्ज बरकरार है। वहीं सोमवार को दरोगा इशरत अजहर को भी थाने में तैनाती दे दी गई। इशरत की विकास दुबे के साथ मिलीभगत थी। इसका खुलासा एसआईटी जांच में हुआ।
एसएसआई कौशलेंद्र प्रताप सिंह चोरी की कार इस्तेमाल करते पकडे़ गए। जांच में दोषी पाए गए। कार्रवाई के नाम पर उनका स्थानांतरण किया गया। बिठूर एसओ से शिवराजपुर थानेदार बना दिया गया। बिकरू कांड की एसआईटी जांच में इंस्पेक्टर राममूर्ति यादव दोषी पाए गए। विभागीय जांच भी जारी है लेकिन बजरिया थानेदार का चार्ज बरकरार है। वहीं सोमवार को दरोगा इशरत अजहर को भी थाने में तैनाती दे दी गई। इशरत की विकास दुबे के साथ मिलीभगत थी। इसका खुलासा एसआईटी जांच में हुआ।