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नवरात्र 2018: ये है कलश स्थापना मुहूर्त और अष्ट सिद्धि के लिए पूजन विधि
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 18 Mar 2018 12:12 PM IST
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चैत्र नवरात्र रविवार से प्रारंभ होंगे और 25 मार्च तक रहेंगे। सप्तमी और अष्टमी एक ही दिन होने के कारण नवरात्र 8 दिन के होंगे। सप्तमी और अष्टमी के एक दिन होने के कारण काली पूजा करने वाले भक्तों को विशेष लाभ मिलेगा। आचार्य दीपक पांडेय और आचार्य सूर्य प्रकाश शुक्ला साधु पंडित का कहना है कि मां दुर्गा एक भक्ति स्रोत हैं। समृद्धि एवं धनप्राप्ति के लिए महालक्ष्मी की उपासना की जाती है। बौद्धिक विकास, विद्या एवं मानसिक शांति के लिए महासरस्वती की पूजा की जाती है। आगे पढ़ें, अष्ट सिद्धि के लिए पूजन विधि..
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कलश स्थापना मुहूर्त
शुभ कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 6:31 से 7:46 बजे तक
दूसरा मुहूर्त 9:18 से 10:47 बजे तक
अभिजीत काल मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक
शुभ कलश स्थापना का मुहूर्त सुबह 6:31 से 7:46 बजे तक
दूसरा मुहूर्त 9:18 से 10:47 बजे तक
अभिजीत काल मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक
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18 मार्च को-प्रतिपदा-मां शैलपुत्री
19 मार्च को-द्वितीया-मां ब्रह्मचारिणी
20 मार्च को-तृतीया-मां चंद्रघंटा
21 मार्च को-चतुर्थी-मां कूष्मांडा
22 मार्च को-पंचमी-मां स्कंदमाता
23 मार्च को-षष्ठी-मां कात्यायिनी
24 मार्च को-सप्तमी/अष्टमी-मां कालरात्रि/मां महागौरी
25 मार्च को-नवमी-मां सिद्धिदात्री
19 मार्च को-द्वितीया-मां ब्रह्मचारिणी
20 मार्च को-तृतीया-मां चंद्रघंटा
21 मार्च को-चतुर्थी-मां कूष्मांडा
22 मार्च को-पंचमी-मां स्कंदमाता
23 मार्च को-षष्ठी-मां कात्यायिनी
24 मार्च को-सप्तमी/अष्टमी-मां कालरात्रि/मां महागौरी
25 मार्च को-नवमी-मां सिद्धिदात्री
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चैत्र नवरात्र का महत्व
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चैत्र नवरात्र को वासंती नवरात्र भी कहते हैं। इसका प्रारंभ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को होता है। इसी के साथ हिंदू धर्म का नवसंवत्सर तो प्रारंभ होता ही है साथ ही इस समय अपने कुलदेवी अथवा कुल देवता के पूजन का भी महत्व है।
इनके पूजन करने से वर्षों तक भक्तों को सभी संकटों से, रोग से, शत्रु एवं आपदाओं से पूरी सुरक्षा मिलती है। कुल देवताओं का पूजन इसलिए हर मांगलिक कार्यक्रम में करना आवश्यक होता है। नवरात्रि की रातों में कुल देवताओं के पूजन से कोटि लाभ यानी करोड़ों गुना लाभ मिलता है। ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की है। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में हुई थी। इसलिए सृष्टि का प्रारंभ चैत्र नवरात्र से माना जाता है।
इनके पूजन करने से वर्षों तक भक्तों को सभी संकटों से, रोग से, शत्रु एवं आपदाओं से पूरी सुरक्षा मिलती है। कुल देवताओं का पूजन इसलिए हर मांगलिक कार्यक्रम में करना आवश्यक होता है। नवरात्रि की रातों में कुल देवताओं के पूजन से कोटि लाभ यानी करोड़ों गुना लाभ मिलता है। ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की है। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि की रचना चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा में हुई थी। इसलिए सृष्टि का प्रारंभ चैत्र नवरात्र से माना जाता है।
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अष्ट सिद्धि के लिए पूजन करें
नवरात्र में अष्ट सिद्धि की साधना का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी अष्टसिद्धि के दाता हैं और वह स्वयं अष्टसिद्धि से युक्त हैं। 8 सिद्धि होती हैं अणिमा, महिमा, प्रकाम्य, लघिमा, गरिमा, ईश्वत्व, प्राप्ति बसिता। इन्हें प्राप्त करने के लिए रामचरित मानस का सुंदरकांड या हनुमत तांडव स्त्रोत, या हनुमत साबरी मंत्रों का जप करें।
नवरात्र में अष्ट सिद्धि की साधना का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी अष्टसिद्धि के दाता हैं और वह स्वयं अष्टसिद्धि से युक्त हैं। 8 सिद्धि होती हैं अणिमा, महिमा, प्रकाम्य, लघिमा, गरिमा, ईश्वत्व, प्राप्ति बसिता। इन्हें प्राप्त करने के लिए रामचरित मानस का सुंदरकांड या हनुमत तांडव स्त्रोत, या हनुमत साबरी मंत्रों का जप करें।