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समुद्रतल में गर्मी बढ़ने से मानसून का बदला मिजाज, इस मौसम की खबर का पूरे देश पर असर
Mon, 13 May 2019 07:59 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 13 May 2019 07:59 PM IST
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मानसून का बदला मिजाज (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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बढ़ती गर्मी की वजह से इस बार मानसून देरी से आएगा, साथ ही बारिश भी सामान्य से कम होने की संभावना है। इसकी वजह अलनीनो (समुद्रतल पर गर्मी बढ़ना) बताया जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग और मौसम की जानकारी देने वाली एजेंसी स्काई मेट ने भविष्यवाणी की है कि मानसून की शुरुआत अपने निर्धारित समय 20 मई से हो जाएगी लेकिन मध्य और पूर्वी उत्तरप्रदेश तक यह 20 जून तक आएगा। जबकि यहां मानसून आने का निर्धारित समय 15 जून है।
मानसून का बदला मिजाज (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
मौसम विभाग के अनुसार मानसून की शुरुआत 20 मई को अंडमान निकोबार से होती है। एक जून को मानसून केरल आ जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए यह 15 जून तक सामान्य स्थिति में कानपुर, लखनऊ, बुंदेलखंड होते हुए आगे बढ़ता है। इस बार मौसम विज्ञानियों की तरफ से जो जानकारी आ रही हैं, उसमें बारिश 93 से 95 प्रतिशत होने की बात कही जा रही है। पिछली बार भी बारिश 100 प्रतिशत नहीं हुई थी। 100 प्रतिशत बारिश को ही सामान्य स्थिति कहा जाता है।
मानसून का बदला मिजाज
- फोटो : अमर उजाला
इस तरह आगे बढ़ता है मानसून (मौसम की जानकारी)
एक जून
केरल से होकर मानसून आगे बढ़ता है। पहले चरण में मानसून कोच्चि, त्रिवेंद्रम और चेन्नई से आगे बढ़ता है। इसके साथ ही यह देश के पूर्वी राज्यों की सीमाओं तक आ जाता है। केरल में मानसून आने के बाद इसकी गति धीमी हो जाती है।
पांच जून
उत्तरी कर्नाटक, तेलंगाना के कुछ इलाके और आंध्र प्रदेश तक आ जाता है। इसके साथ ही उत्तर पूर्वी क्षेत्रों अगरतला, गुवाहाटी, शिलांग, इंफाल और दिसपुर सहित समूचे पूर्वोत्तर भारत में भी मानसूनी बारिश शुरू हो जाती है।
एक जून
केरल से होकर मानसून आगे बढ़ता है। पहले चरण में मानसून कोच्चि, त्रिवेंद्रम और चेन्नई से आगे बढ़ता है। इसके साथ ही यह देश के पूर्वी राज्यों की सीमाओं तक आ जाता है। केरल में मानसून आने के बाद इसकी गति धीमी हो जाती है।
पांच जून
उत्तरी कर्नाटक, तेलंगाना के कुछ इलाके और आंध्र प्रदेश तक आ जाता है। इसके साथ ही उत्तर पूर्वी क्षेत्रों अगरतला, गुवाहाटी, शिलांग, इंफाल और दिसपुर सहित समूचे पूर्वोत्तर भारत में भी मानसूनी बारिश शुरू हो जाती है।
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मानसून का बदला मिजाज (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
10 जून
मुंबई और इसके आसपास के क्षेत्रों के अलावा कोलकाता, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के लगभग सभी भागों में मानसूनी बारिश शुरू हो जाती है। इसके साथ ही मानसूनी बारिश छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के भी कुछ इलाकों में शुरू हो जाती है।
15 जून
गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार और झारखंड के साथ उत्तर प्रदेश में वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, बुंदेलखंड, भोपाल, इंदौर, सूरत तथा अहमदाबाद सहित आसपास के शहरों में मानसून वर्षा शुरू हो जाती है।
मुंबई और इसके आसपास के क्षेत्रों के अलावा कोलकाता, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के लगभग सभी भागों में मानसूनी बारिश शुरू हो जाती है। इसके साथ ही मानसूनी बारिश छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के भी कुछ इलाकों में शुरू हो जाती है।
15 जून
गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार और झारखंड के साथ उत्तर प्रदेश में वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, बुंदेलखंड, भोपाल, इंदौर, सूरत तथा अहमदाबाद सहित आसपास के शहरों में मानसून वर्षा शुरू हो जाती है।
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मानसून का बदला मिजाज (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
एक जुलाई
दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के सभी भागों में एक साथ दस्तक देता है। इसी के साथ राजस्थान और पंजाब का भी आधा हिस्सा मानसून के दायरे में आ जाता है।
15 जुलाई
पंजाब-हरियाणा के सभी हिस्सों और राजस्थान सहित देश के सभी भागों में मानसून का आगाज हो जाता है।
कानपुर में सामान्य बारिश
महानगर और इसके आसपास के क्षेत्रों में आमतौर पर सामान्य (100 प्रतिशत) मानसूनी बारिश 876 मिलीमीटर मानी जाती है। पिछली बार शहर में 958 मिमी बारिश रिकार्ड की गई थी। मतलब 100 प्रतिशत से अधिक बारिश हुई थी। इस बार इसमें कमी होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार प्रत्येक 30 वर्ष के डाटा और अध्ययन के अनुसार बारिश की सामान्य स्थिति का निर्धारण किया जाता है।
दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के सभी भागों में एक साथ दस्तक देता है। इसी के साथ राजस्थान और पंजाब का भी आधा हिस्सा मानसून के दायरे में आ जाता है।
15 जुलाई
पंजाब-हरियाणा के सभी हिस्सों और राजस्थान सहित देश के सभी भागों में मानसून का आगाज हो जाता है।
कानपुर में सामान्य बारिश
महानगर और इसके आसपास के क्षेत्रों में आमतौर पर सामान्य (100 प्रतिशत) मानसूनी बारिश 876 मिलीमीटर मानी जाती है। पिछली बार शहर में 958 मिमी बारिश रिकार्ड की गई थी। मतलब 100 प्रतिशत से अधिक बारिश हुई थी। इस बार इसमें कमी होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार प्रत्येक 30 वर्ष के डाटा और अध्ययन के अनुसार बारिश की सामान्य स्थिति का निर्धारण किया जाता है।