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पैकेटबंद खाने पर नजर: चीनी, नमक और ज्यादा फैट वाले सामान पर देना होगा लाल निशान, एफएसएसएआई ने ऐसा क्यों कहा?

Sat, 29 Aug 2026 12:46 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नई दिल्ली। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Sat, 29 Aug 2026 12:46 PM IST
सार

एफएसएसएआई ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर लाल चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है। ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट वाले उत्पादों पर यह लेबल लगाया जाएगा। नियम दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव है। 

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Focus on packaged food Red marks required products high sugar, salt, and fat why did the FSSAI mandate this?
पैकेटबंद खाने पर एफएसएसएआई की नजर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने चीनी, सैचुरेटेड फैट और नमक की उच्च मात्रा वाले पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर लाल रंग के छह-कोने वाले (हेक्सागोनल) चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच के सामने छह पेज के अनुपालन हलफनामे के जरिए रखा गया।जिसे एक जनहित याचिका में दायर किया गया था। 

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जिसमें फैट, चीनी और नमक की उच्च मात्रा वाले पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के लिए अनिवार्य फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल की मांग की गई थी। एफएसएसएआई ने कहा कि प्रस्तावित लेबल तस्वीरों वाले होंगे। इन्हें इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि ग्राहकों को उन प्रोडक्ट्स के बारे में साफ, साफ दिखने वाली और आसानी से समझ में आने वाली चेतावनी मिल सके,  जिनमें कुछ खास पोषक तत्व (न्यूट्रिएंट्स) ज्यादा मात्रा में हों।
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प्रस्ताव में तहत क्या होगा? 
इस प्रस्ताव के तहत, जिन प्रोडक्ट्स में बताए गए पोषक तत्वों में से कोई भी दो या उससे ज्यादा मात्रा में होंगे। (जैसे कि एडेड सैचुरेटेड फैट, एडेड शुगर और नमक) उन पर लाल रंग का हेक्सागोनल (छह कोनों वाला) चेतावनी लेबल लगाया जाएगा। ये सीमाएं आईसीएमआर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन द्वारा जारी 'भारतीयों के लिए डाइटरी गाइडलाइंस, 2024' पर आधारित होंगी। 
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कितने चरणों में लागू होगा यह प्रस्ताव? 
नियामक ने खाद्य सुरक्षा नियमों (एफओपी) की चेतावनी प्रणाली को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही कहा है कि यह दृष्टिकोण खाद्य उद्योग को सुधार के लिए समय देगा। साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि ग्राहकों के सूचना के अधिकार से समझौता न हो।

पहले चरण में: दो या उससे ज्यादा तय पोषक तत्वों (न्यूट्रिएंट्स) की ज्यादा मात्रा वाले प्रोडक्ट्स और तय मीठे ड्रिंक्स पर चेतावनी वाले नियम लागू होंगे।
दूसरे चरण में: यह नियम उन प्रोडक्ट्स पर भी लागू होगा जिनमें तय पोषक तत्वों में से कोई भी एक ज्यादा मात्रा में हो।

एफएसएसएआई ने कहा कि इस प्रस्तावित सिस्टम का मकसद खास तौर पर बच्चों और आबादी के कमजोर वर्गों को खाने-पीने की चीजों के बारे में सही जानकारी के साथ चुनाव करने में मदद करना है।

नेचुरली फैट, शुगर या नमक से भरपूर खाद्य पदार्थों के लिए छूट: प्रस्तावित नियम उन खाद्य उत्पादों पर लागू नहीं होंगे, जिनमें केवल एक ही सामग्री होती है या जो नेचुरली फैट, शुगर या नमक से भरपूर होते हैं। हलफनामे में खास तौर पर घी, खाने का तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे उत्पादों का ज़िक्र किया गया है। हालांकि, इन उत्पादों पर लागू खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग नियमों के तहत अन्य शर्तें लागू रहेंगी।


सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद एफएसएसएआई ने कार्रवाई की है। सुप्रीम कोर्ट ने रेगुलेटर से पूछा था कि वे पैकेज्ड फूड में चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा बताने वाले 'इंटरप्रिटेटिव FoP लेबल' (सामने दिखने वाले लेबल जो जानकारी दें) क्यों नहीं लागू कर पाए। इसके दो हफ्ते बाद, एफएसएसएआई ने चेतावनी वाले लेबल न लगाने के अपने पुराने फैसले को वापस ले लिया है।

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