आगरा में पुलिस यह देख रही थी कि दिल्ली की तरफ कोई भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की हरी टोपी लगाकर या कुर्ता पायजामा पहनकर तो नहीं जा रहा है जबकि किसान जींस और जैकेट पहनकर चले गए। पुलिस को पता ही नहीं चला और ताजनगरी से कई किसान दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंच गए। भाकियू के जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया के बमरौली कटारा स्थित आवास पर शुक्रवार की सुबह ही पुलिस पहुंच गई थी। उनको नजरबंद कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने पुलिस को चकमा दे दिया।
Farmers Protest: पुलिस को दिया चकमा, जींस-जैकेट पहनकर ताजनगरी से दिल्ली पहुंचे किसान
लवानिया ने बताया कि यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत से फोन पर निर्देश मिला कि किसानों के साथ गाजीपुर बॉर्डर पर जाना है। पुलिस वाले घर से थोड़ी दूरी पर जाकर बैठ गए थे। राजवीर लवानिया जींस और जैकेट पहनकर निकले तो उन पर गौर ही नहीं किया गया। उन्होंने यही फार्मूला अन्य किसानों को दिया। जिले के कई किसान इसी तरह जींस और जैकेट पहनकर अलग-अलग वाहन से दिल्ली के लिए चल दिए। रास्ते में भी पुलिस ने इन्हें किसान नहीं समझा, इसलिए रोका नहीं।
सावित्री चाहर के नेतृत्व में 20 किसानों का जत्था गाजीपुर बॉर्डर पहुंचा
किसान नेता सावित्री चाहर ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 20 किसानों के साथ वह गाजीपुर बॉर्डर पर आकर धरने में शामिल हुई हैं। जब तक कृषि कानून सरकार वापस नहीं लेती है आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों पर मुकदमों का विरोध
किसान नेता चौधरी रामवीर सिंह, सौरभ चौधरी, सत्यवीर चौधरी और धर्मवीर चौधरी ने किसानों पर मुकदमे का विरोध करते हुए कहा कि सरकार धार्मिक झंडा फहराने वाले पर मुकदमा दर्ज करे, लेकिन आंदोलन दबाने के लिए किसानों पर मुकदमा बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
किसानों ने ककुआ में बैठक कर आंदोलनकारियों पर मुकदमा दर्ज करने का विरोध किया। किसान नेता श्याम सिंह चाहर और सोमवीर यादव ने कहा कि सरकार मुकदमा दर्ज कर आंदोलन को खत्म करने की साजिश रच रही है। बैठक में श्रीलाल तोमर, भारत सिंह, देवेंद्र पूनिया, दुर्गाप्रसाद, अशोक कुशवाहा, मुकेश पाठक, अवधेश सोलंकी, लाखन सिंह, विशंबर सिंह, शिव प्रसाद शुक्ला, विनोद कुमार, हाकिम सिंह, दाताराम, द्रोपदी लाल, रामलाल राजपूत, घनश्याम वर्मा रहे।
रालोद के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता कप्तान सिंह चाहर ने कहा कि किसानों के आंदोलन को रालोद मुखिया ने समर्थन दिया है अब पार्टी के कार्यकर्ता किसानों के साथ कंधा मिलाकर खड़े हैं। सरकार की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, कानून वापस ही लेना होगा।