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HP Panchayat Election 2021 LIVE: तीसरे चरण के चुनाव के लिए 1137 पंचायतों में मतदान जारी, 10 बजे तक 18.90% वोटिंग

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के तीसरे और अंतिम चरण के चुनाव के लिए सुबह 10 बजे तक 18.90 प्रतिशत वोटिंग हुई है। सिरमौर में 22.20 प्रतिशत, सोलन में 21.80 प्रतिशत और मंडी-ऊना में 19.50-19.50 प्रतिशत मतदान हुआ है।
जिला        मतदान प्रतिशत
बिलासपुर    19.20
चंबा            17.40
हमीरपुर      18.00
कांगड़ा       16.70
किन्नौर        17.30
कुल्लू         19.30
मंडी           19.50
शिमला       18.80
सिरमौर      22.20
सोलन        21.80
ऊना         19.50
वन, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री राकेश पठानिया ने अपनी गृह पंचायत जाच्छ के बूथ दो पर परिवार सहित मतदान किया।

हिमाचल प्रदेश के छठे वित्त आयोग के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने ग्राम पंचायत टब्बा के वार्ड नंबर 8 में पंचायत चुनावों के लिए मतदान किया।

हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के तीसरे और अंतिम चरण के चुनाव के लिए आज 1137 पंचायतों में मतदान हो रहा है। मतदान सुबह आठ बजे से जारी है। 10 बजे तक 18.90 प्रतिशत वोटिंग हुई है। शाम 4 बजे तक मतदान जारी रहेगा। इसके बाद 4 से 5 बजे तक कोरोना संक्रमित होम क्वारंटीन मतदाता वोट डालेंगे।

पंचायतों में मतदान के बाद वोटों की गिनती होगी और देर शाम तक नतीजे भी घोषित होंगे। इस दौरान जिला परिषद और पंचायत समिति के वार्ड सदस्यों के लिए भी मतदान होगा। इनके चुनाव नतीजे 22 जनवरी की घोषित होंगे। सभी मतदान केंद्रों को मतदान से एक दिन पहले सैनिटाइज कर दिया गया है।

राज्य में चुनाव आयोग ने तीसरे चरण के चुनाव के लिए 6457 पोलिंग पार्टी की तैनात कर रखी हैं ताकि मतदान शांतिपूर्ण हो सकें। प्रत्येक मतदान केंद्र में एक पुलिस कर्मी और एक होम गार्ड का जवान सुरक्षा तैनात किया गया है। अतिसंवेदनशील और संवेदनशील मतदान केंद्रों में चुनाव आयोग ने सुरक्षा के अतिरिक्त प्रबंध किए हैं। राज्य चुनाव आयोग ने कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मतदान के लिए खास दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ की मतदान केंद्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती भी कर रखी है। 

बड़ा भंगाल में नहीं होगी पोलिंग बूथ की स्थापना 
वहीं, जिला कांगड़ा की सबसे दुर्गम पंचायत बड़ा भंगाल में बर्फबारी के चलते पोलिंग बूथ की स्थापना नहीं हो सकेगी। जिला प्रशासन ने बड़ा भंगाल में 17 मतदाताओं के लिए पोलिंग बूथ की स्थापना करने का प्रयास किया था। डीसी राकेश प्रजापति ने सोमवार को हेलीकाप्टर से बड़ा भंगाल का दौरा भी किया था। बड़ा भंगाल में हेलीपैड और आसपास क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण पोलिंग बूथ की स्थापना के निर्णय को रद्द कर दिया गया है।

बड़ा भंगाल पंचायत के मतदाताओं के लिए बीड़ में पोलिंग बूथ की स्थापना की गई है। अंतिम चरण के मतदान में वीरवार को करीब 500 मतदाता बीड़ में अपने मत का प्रयोग करेंगे। बीडीओ कुलबंत ठाकुर ने बताया कि बड़ा भंगाल में मतदान करवाने के लिए चार सदस्यी दल की तैनाती की गई थी। एसडीएम छवि नांटा ने बताया कि मौसम के अनुकूल न होने और बर्फबारी अधिक होने के कारण बड़ा भंगाल में पोलिंग बूथ की स्थापना नहीं की जा रही है।
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मंडी जिले के लडभड़ोल में मतदान करने पहुंचे मतदाता। मंडी जिले के लडभड़ोल में मतदान करने पहुंचे मतदाता।

ढाई मंजिला मकान में लगी आग से झुलसकर एक व्यक्ति की मौत

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के गड़सा के तहत आने वाले बेगोणा गांव में ढाई मंजिला मकान में लगी आग से झुलसकर एक व्यक्ति की मौत हो गई है। बुधवार देर रात मकान में अचानक आग लग गई। जिस समय मकान में आग लगी। उस समय वह घर में अकेला ही था। जिसके चलते मकान के अंदर 43 वर्षीय व्यक्ति आग की चपेट में आ गया। आग की इस घटना में करीब चार लाख का नुकसान हुआ है। जबकि पांच लाख की संपत्ति को जलने से बचाया गया है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। 

मिली जानकारी के अनुसार बुधवार रात करीब दो बजे गड़सा के बेगोणा गांव में संगत राम पुत्र मुसदीलाल के ढाई मंजिला मकान में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने भयानक रूप धारण कर लिया। आग की भनक लगते ही गांव के लोग भी आग पर काबू पाने के लिए दौड़े। आग की सूचना दमकल विभाग को भी दी गई। लेकिन आग लगने के बाद भी मकान के अंदर से व्यक्ति बाहर नहीं निकल पाया।

जिससे मकान के अंदर राजू उम्र 43 वर्ष, पुत्र संगत राम, निवासी बेगोणा, डाकघर गड़सा, तहसील भुंतर, कुल्लू की झुलसकर मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक छा गया है। एसपी गौरव सिंह ने कहा कि आग में एक व्यक्ति की झुलसकर मौत हुई है। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा। 
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लाहौल में कड़ाके की ठंड से जम गईं झीलें, नदी-नाले

कड़ाके की ठंड पड़ने से जनवरी में हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में झीलें, नदी और नाले जमने शुरू हो गए हैं। चंद्राघाटी के कोकसर से लेकर तांदी संगम तक नदी की कलकल करती धाराएं ठोस बर्फ बन चुकी हैं। इन दिनों न्यूनतम पारा शून्य से 16 डिग्री नीचे तक नीचे है। दिल के आकार की सिस्सू स्थित झील भी जमकर बर्फ बन चुकी है। प्रशासन इस वर्ष पहली बार घाटी में स्नो फेस्टिवल मना रहा है।

इससे शीघ्र ही इस झील के ऊपर आइस स्केटिंग का रोमांच भी देखने को मिलेगा। फिलहाल, यहां का सुंदर नजारा देखने के लिए अभी कोई पर्यटक नहीं आ रहा है। प्रशासन ने अभी तक पर्यटकों को अटल टनल रोहतांग को निहारने की अनुमति नहीं दी है। उधर, टनल के नॉर्थ पोर्टल से सिस्सू तक चंद्रभागा नदी के दोनों छोर भी कई जगह जमने से आपस में मिल गए हैं।

स्थानीय बुजुर्ग कर्म सिंह, पामा छेरिंग, नमग्याल, बीर सिंह ने कहा कि 90 के दशक तक ग्रामीण नदी पर जमी आइस पर घास के जूते पहनकर नदी पार किया करते थे। उन्होंने कहा कि घाटी में इन दिनों कड़ाके की ठंड के कारण चंद्रभागा नदी के किनारे भी जम गए हैं। अब मार्च के दूसरे सप्ताह के बाद ही मौसम परिवर्तन पर नदी में जमी बर्फ टूटकर बहती नजर आएगी।
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कोरोना से लड़ेगा इम्युनिटी बूस्टिंग पाउडर, जल्द बाजार में आएगा

कोरोना से बचने के लिए आदमी के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाने का काम अब सीएसआईआर-आईएचबीटी संस्थान पालमपुर करेगा। संस्थान ने इसके के लिए इम्युनिटी बूस्टिंग पाउडर तैयार किया है। इस पाउडर बनाने की तकनीक संस्थान के वैज्ञानिकों ने तैयार की है। इस पाउडर से आदमी की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी। यह पाउडर जल्द ही बाजार में उतारा जाएगा। इसके खाने से आदमी के शरीर का इम्युनिटी सिस्टम बढ़ेगा। जो कोरोना से काफी हद तक लोगों का बचाब करेगा।

यही नहीं कोविड-19 से पीड़ित हो चुके लोगों के शरीर में भी यह पाउडर इम्युनिटी को काफी मजबूत करेगा। सीएसआईआर वैज्ञानिकों ने लंबे शोध के बाद जड़ी-बूटियों से पाउडर को तैयार किया है। जिसे संस्थान अब जल्द बाजार में उतारेगा। इम्युनिटी बूस्टिंग पाउडर  बनाने के लिए हर एक जड़ी-बूटी की जांच हुई है। पाउडर की बाजार में आने पर क्या कीमत होगी। संस्थान यह जल्द तय करेगा। इससे पहले सीएसआईआर ने कोरोना के बचाब के लिए सैनिटाइजर भी तैयार किया था।

संस्थान के निदेशक डॉ. संजय कुमार ने कहा कि आदमी की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पाउडर तैयार किया गया है। इसे जल्द ही बाजार में उतारा जाएगा। यह पाउडर कोविड से लड़ने में भी मददगार होगा। 
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हिमाचल के निजी कॉलेजों में फर्जी दाखिलों की जांच शुरू, रिकॉर्ड किया तलब

इम्युनिटी बूस्टिंग पाउडर
आठ निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को अयोग्य करार देने के बाद अब निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने हिमाचल प्रदेश के निजी कॉलेजों में फर्जी दाखिलों की जांच शुरू कर दी है। आयोग ने कॉलेजों से बीते तीन साल के दाखिलों का रिकॉर्ड तलब किया है। तीन वर्ष पहले हुए दाखिलों का अब डिग्री आवंटन की संख्या से मिलान किया जाएगा। प्रदेश के कई निजी शिक्षण संस्थानों पर फर्जी दाखिले देने के आरोप लगते रहे हैं। शिक्षा विभाग में ढाई सौ करोड़ से अधिक राशि के छात्रवृत्ति घोटाले को भी फर्जी दाखिलों से ही अंजाम दिया गया। बीते दिनों मानव भारती विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्रियां देने का खुलासा भी हुआ है।

इन सभी मामलों को देखते हुए निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने निजी कॉलेजों के फर्जी दाखिलों को जांचने का फैसला लिया है। आयोग के सूत्रों ने बताया कि कॉलेजों में दाखिलों के समय विद्यार्थियों द्वारा दिए गए नाम, पते, आधार नंबर सहित अन्य आवश्यक जानकारी का रिकॉर्ड मांगा है। इन जानकारियों को अब तीन साल का शैक्षणिक सत्र पूरा होने पर डिग्री देते समय दाखिलों की जानकारी से मिलाया जाएगा। कई विद्यार्थियों से आयोग संपर्क भी करेगा। अगर किसी कॉलेज में फर्जी दाखिले पाए गए तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी।

कई कॉलेजों ने दी प्रिंसिपलों की गलत जानकारी 
प्रदेश में स्थित कई निजी कॉलेजों ने आयोग को प्रिंसिपलों की नियुक्ति प्रक्रिया और शैक्षणिक योग्यता को लेकर गलत जानकारियां भी दी हैं। ऐसे मामले सामने आने के बाद आयोग ने कई कॉलेजों से प्रिंसिपलों से जुड़ी जानकारियां भी मांगी हैं। इन नई जानकारियों को पुराने रिकॉर्ड से मिलाया जाएगा। गलत जानकारी देने वाले कॉलेजों के खिलाफ आयोग कार्रवाई करेगा।
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मौसम की बेरुखी ने उड़ाई भालुओं की नींद, मानव बस्तियों में घूम रहे

मौसम की बेरुखी और बदली पारिस्थितिकी ने हिमाचल प्रदेश में भालुओं की नींद उड़ा दी है। अब भालू तीन से चार महीने की शीत निद्रा में नहीं जा रहे हैं, बल्कि मानव बस्तियों के आसपास घूमकर रहे हैं। इससे चिंतित राज्य सरकार के वन्य प्राणी विंग ने यह मामला जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को भेजा है। अब कोलकाता स्थित यह संस्थान इस पर अध्ययन कर इस समस्या का समाधान तलाशेगा। इसमें दो साल का वक्त लग सकता है।

प्रदेश में अब नवंबर और दिसंबर में भारी बर्फबारी नहीं होती। पहले नवंबर में हिमपात होते ही भालू गुफाओं में शीत निद्रा में तीन से चार महीने तक सो जाते थे। इस दौरान इनके शरीर में जमा वसा ही इनका भोजन होता था। पिछले कुछ वर्षों में बदले मौसम, जंगलों के घटने आदि से पारिस्थितिकी बिगड़ गई है। भालुओं की प्रकृति में आए बदलाव का एक कारण इसे भी माना जा रहा है। हालांकि, इसके तमाम तथ्य जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अध्ययन के बाद ही पता चलेंगे। इन दिनों भालू रिहायशी इलाकों में पहुंच रहे हैं, जिससे लोग दहशत में हैं। 

वसा का इस्तेमाल न होने से बदल रही भालुओं की आकृति 
शीत निद्रा के दौरान भोजन के रूप में वसा भालुओं का भोजन होता है। अब इसका इस्तेमाल न होने से इनका शरीर भारी और मोटा हो रहा है। इस बारे में भी टीम अध्ययन करेगी। 

कोलकाता से जल्द हिमाचल पहुंचेगी टीम 
भालुओं के इस बदले व्यवहार पर अध्ययन के लिए राज्य के वन्य प्राणी विंग ने तीन संस्थानों से संपर्क किया। इनमें देहरादून का राष्ट्रीय प्राणी संस्थान और बंगलूरू की भी एक संस्था है, लेकिन जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया कोलकाता इस पर अध्ययन को तैयार हुआ है। जल्द कोलकाता से टीम हिमाचल प्रदेश में आएगी। राज्य वन्य प्राणी विंग के मुख्य अरण्यपाल मुख्यालय अनिल ठाकुर ने बताया कि टीम यहां भालुओं की गिनती भी करेगी।

बांदली गांव में दिन-दहाड़े घूम रहे भालू, पिंजरा पहुंचा 
जिला शिमला के ठियोग की पंचायत क्यार के बांदली गांव में तीन भालू घूमते देखे जा रहे हैं। यहां भालू एक महिला पर हमला भी कर चुका है। बुधवार को ठियोग से वन्य प्राणी विंग के निर्देश पर कर्मचारी भालुओं को पकड़ने के लिए पिंजरा लेकर इस क्षेत्र में पहुंचे हैं।

 
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अस्पतालों में मरीजों के साधारण ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी

हिमाचल पथ परिवहन निगम को मिलेंगे 400 चालक, भर्ती शुरू

हिमाचल पथ परिवहन निगम(एचआरटीसी) को जल्द ही 400 चालक मिलेंगे। चालकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शिमला की मंडलीय कार्यशाला तारादेवी में प्रतिभागियों के ड्राइविंग टेस्ट लिए जा रहे हैं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 8 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। रोजाना 100 से अधिक प्रतिभागी यहां ड्राइविंग टेस्ट दे रहे हैं। एचआरटीसी के महाप्रबंधक नवीन कप्लस की अगुवाई में ड्राइविंग टेस्ट के लिए कमेटी गठित की गई है। कमेटी में उप मंडलीय प्रबंधक पवन शर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक तारादेवी विनोद शर्मा सहित निगम के चार डिवीजनों से एक-एक ड्राइविंग इंस्ट्रक्टर शामिल हैं।

400 चालकों के पदों के लिए एचआरटीसी के पास करीब नौ हजार आवेदन आए हैं। इसमें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं कक्षा है। निगम में चालक की भर्ती अनुबंध आधार पर हो रही है। ये चालक तीन साल तक अनुबंध पर रहेंगे। इसके बाद नियमित होंगे। एचआरटीसी के महाप्रबंधक नवीन कपल्स ने बताया कि ड्राइविंग टेस्ट में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। 8 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में ड्राइविंग टेस्ट लिए जा रहे हैं। आगामी 31 जनवरी तक चालकों के ड्राइविंग टेस्ट लिए जाएंगे।

200 मीटर के ट्रैक में लिया जा रहा ड्राइविंग टेस्ट
मंडलीय कार्यशाला तारादेवी में 200 मीटर के ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट लिया जा रहा है। इस ट्रैक की खासियत यह है कि इसमें उतराई, चढ़ाई और मोड़ तीनों हैं। ट्रैक पर सड़क के दोनों ओर सफेद पट्टी बनाई गई है। पहले बस को उतराई में मोड़ से नीचे उतारना होता है। फिर बैक करते हुए मोड काटकर बस को चढ़ाई में चढ़ाना होता है। आखिर में कार्यशाला के भीतर बने सर्विस डग पर बैक करते हुए बस चढ़ानी होती है।
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