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डेढ़ लाख ऐंठने के बाद भी नहीं दिए पौधे
Updated Sun, 24 Dec 2017 09:41 PM IST
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नेरवा (रोहड़ू)। विदेशी किस्म के सेब के पौधे उपलब्ध करवाने के नाम पर कई नर्सरी संचालकों की ओर से बागवानों के साथ ठगी की जाती है। ऐसा ही एक मामला नेरवा के एक बागवान के साथ भी पेश आया है। यहां के बागवान आशीष चौहान के साथ एक नामी नर्सरी ने धोखाधड़ी की।
आशीष चौहान ने बताया कि उन्होंने नामी नर्सरी इंडो डच हॉर्टिकल्चर टैक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड भीमताल, जिला नैनीताल, उत्तराखंड से विदेशी सेब की विभिन्न किस्मों के 790 पौधे बुक करवाए थे। इसके लिए एडवांस के रूप में नर्सरी के मालिक के बैंक खाते में पौधों की कुल कीमत की आधी राशि 26 अक्तूबर को जमा करवा दी गई थी। 790 पौधों की कीमत 2,80500 रुपये बनती थी। इसकी आधी राशि 1,40500 रुपये बनती है, जो पहले ही जमा करवा दी थी। राशि जमा करवाने के बावजूद उन्हें अभी तक न तो सेब के पौधे मिले और न ही उनके पैसे वापस लौटाए। नर्सरी प्रबंधक पौधे उपलब्ध करवाने व पैसे लौटाने के बारे आनाकानी कर रहे हैं। आशीष ने आरोप लगाया कि नर्सरी की ओर से इटली से आयातित पौधे देने के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की नर्सरियां प्रदेश के भोले भाले लोगों को प्रति वर्ष लाखों रुपये का चूना लगा रही हैं।
राशि लौटाई जाएगी : श्रीकांत
इंडो डच नर्सरी के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत ने बताया की नर्सरी की कुछ कागजी औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण पौधे नहीं आ पाए हैं। जिस पर एडवांस अथवा बुकिंग राशि ली गई है। एक या दो दिन में राशि लौटा दी जाएगी।
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आशीष चौहान ने बताया कि उन्होंने नामी नर्सरी इंडो डच हॉर्टिकल्चर टैक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड भीमताल, जिला नैनीताल, उत्तराखंड से विदेशी सेब की विभिन्न किस्मों के 790 पौधे बुक करवाए थे। इसके लिए एडवांस के रूप में नर्सरी के मालिक के बैंक खाते में पौधों की कुल कीमत की आधी राशि 26 अक्तूबर को जमा करवा दी गई थी। 790 पौधों की कीमत 2,80500 रुपये बनती थी। इसकी आधी राशि 1,40500 रुपये बनती है, जो पहले ही जमा करवा दी थी। राशि जमा करवाने के बावजूद उन्हें अभी तक न तो सेब के पौधे मिले और न ही उनके पैसे वापस लौटाए। नर्सरी प्रबंधक पौधे उपलब्ध करवाने व पैसे लौटाने के बारे आनाकानी कर रहे हैं। आशीष ने आरोप लगाया कि नर्सरी की ओर से इटली से आयातित पौधे देने के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की नर्सरियां प्रदेश के भोले भाले लोगों को प्रति वर्ष लाखों रुपये का चूना लगा रही हैं।
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राशि लौटाई जाएगी : श्रीकांत
इंडो डच नर्सरी के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत ने बताया की नर्सरी की कुछ कागजी औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण पौधे नहीं आ पाए हैं। जिस पर एडवांस अथवा बुकिंग राशि ली गई है। एक या दो दिन में राशि लौटा दी जाएगी।
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