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खेल और राजनीति में चमके भैंसवाल कलां की अपराध से बिगड़ रही छवि

Mon, 10 Jun 2019 01:08 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jun 2019 01:08 AM IST
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खेल और राजनीति में चमके भैंसवाल कलां की अपराध से बिगड़ रही छवि
गोहाना। खेल और राजनीति में सिरमौर रहे भैंसवाल कलां गांव की छवि अपराध के चलते लगातार बिगड़ रही है। ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त, पैरालंपिक पदक विजेता दीपा मलिक व हिंद केसरी बलराज ने गांव को अंतरराष्ट्रीय फलक पर अलग ही पहचान दी है। जिसके चलते भैंसवाल को खिलाड़ियों का गांव कहा जाने लगा था। गांव का राजनीति में अच्छा दखल रहा है। गांव के जगबीर मलिक पांच बार विधायक बन चुके हैं। अब दो परिवारों की रंजिश के कारण गांव की छवि प्रभावित हो रही है।
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भैंसवाल कलां का नाम जुबान पर आते ही गांव को खेलों में सिरमौर बनाने वाले पहलवान योगेश्वर दत्त की छवि जेहन में उभर आती है। योगेश्वर दत्त ने गांव को उस फलक पर पहुंचा दिया था, जहां से गांव किसी पहचान का मोहताज नहीं था। योगेश्वर दत्त चार बार ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने के साथ ही वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीत कर विश्व पटल पर छा गए थे। इसके साथ ही गांव की बहू दीपा मलिक ने भी गांव का नाम रोशन किया। पैरालंपिक खिलाड़ी दीपा मलिक ने भी विश्व पटल पर देश का नाम रोशन किया है। गांव के पहलवान बलराज हिंद केसरी का खिताब जीत चुके हैं। गांव को खिलाड़ियों के नाम से जाना जाने लगा था, क्योंकि गांव से पहलवानों की पौध भी तैयार हो रही है। अब दो साल में सात हत्याओं से गांव की उत्कृष्ट पहचान प्रभावित हो रही है और पिछले दो माह में छह हत्याओं के कारण हालात ज्यादा खराब हो रहे हैं।
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राजनीति में भी रहा अच्छा दखल
गांव खिलाड़ियों के साथ ही राजनीति में भी अच्छा दखल रखता है। गांव के जगबीर मलिक पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। वह वर्तमान में पांचवीं बार विधायक हैं। जगबीर मलिक सबसे पहले 1996 में हविपा से विधायक बने थे। उसके बाद कांग्रेस से विधायक बनते आ रहे हैं। गांव का विधायक होने के चलते गांव में विकास कार्यों की भी कमी नहीं रही।
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दो साल में सात हत्याओं से बिगड़ी छवि
गांव में पंचायती चुनाव की रंजिश में अप्रैल, 2017 में गांव के प्रवीण की हत्या की गई थी। जहां से शुरू हुआ रंजिश का दौर अब गांव के छवि पर भारी पड़ने लगा है। इस वर्ष अप्रैल माह में कृष्ण पक्ष के तीन युवकों की मुजफ्फरनगर में हत्या कर दी गई। 4 जून को प्रवीण के पिता बलबीर की घर से निकालकर हत्या कर दी गई। उसके चार दिन बाद 8 जून को तड़के प्रवीण के चाचा-चाच की हत्या कर दी गई। जिससे गांव में आतंक का माहौल है। इससे प्रदेशभर में गांव की छवि भी प्रभावित हुई है।

गांव की गलियों में पसरा सन्नाटा
शनिवार को गांव भैंसवाल कलां में होशियार सिंह व उसकी पत्नी निर्मला की हत्या के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग घरों से भी निकलने में परहेज कर रहे हैं। पूरा गांव दहशत के माहौल में है। प्रवीण की हत्या के बाद गांव में माहौल बेहतर रखने के लिए ग्रामीणों ने पहल भी की थी। दोनों पक्षों के बीच बातचीत भी कराई गई थी। हालांकि उसके बाद भी दूसरे पक्ष के तीन युवकों की हत्या करा दी गई। जिसके बाद फिर से गांव में माहौल बिगड़ गया है।
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