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चिल्ड्रन डे केमौके पर - अपराध शाखा ने 17बच्चों को परिजनों से मिलवाया
Updated Thu, 15 Nov 2018 03:31 AM IST
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बालदिवस:
अपराध शाखा ने 17 बच्चों
को परिजनों से मिलवाया
- 31 बच्चों को रेलवे स्टेशन और बस अड्डों से मुक्त करवाया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बाल दिवस के मौके पर 17 बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया। इस मौके पर सेक्टर-16 रोहिणी में आयोजित एक कार्यक्रम में बच्चे उनके परिजनों के हवाले किए गए। ये वह बच्चे हैं जो अपने घर से भाग खड़े हुए। पुलिस ने कुल 31 बच्चों को रेलवे स्टेशन और बस अड्डों से मुक्त कराया है। पुलिस बाकी बच्चों के परिजनों की तलाश कर रही है। अपराध शाखा ने साथी एनजीओ के साथ मिलकर ये अभियान चलाया था।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन ने बताया कि शाखा की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने साथी एनजीओ के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन और बस अड्डों से बच्चों को मुक्त कराया है। इन बच्चों को अपने परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। राजीव रंजन का कहना है कि बाल दिवस के मौके पर पुलिस ने बच्चों को सौंपकर उनके परिजनों को सबसे बड़ा तोहफा दिया है। उनका कहना है कि मुक्त कराए गए 31 बच्चों में ज्यादातर बिहार व उत्तर प्रदेश के हैं। हर बच्चे ने पुलिस को अलग-अलग कहानी बताई। कुछ बच्चों को उनके परिजनों ने छोड़ दिया था, जबकि कुछ बच्चे घर से भागकर आ गए थे। ये बच्चे बिना टिकट ट्रेन से दिल्ली पहुंच गए थे। सभी बच्चे गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सभी बच्चों को 1 से 14 नवंबर के बीच मुक्त करवाया गया है। पुलिस ने बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में बच्चों को स्कूल बैग व किताबें दीं।
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अपराध शाखा ने 17 बच्चों
को परिजनों से मिलवाया
- 31 बच्चों को रेलवे स्टेशन और बस अड्डों से मुक्त करवाया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने बाल दिवस के मौके पर 17 बच्चों को उनके परिजनों से मिलवाया। इस मौके पर सेक्टर-16 रोहिणी में आयोजित एक कार्यक्रम में बच्चे उनके परिजनों के हवाले किए गए। ये वह बच्चे हैं जो अपने घर से भाग खड़े हुए। पुलिस ने कुल 31 बच्चों को रेलवे स्टेशन और बस अड्डों से मुक्त कराया है। पुलिस बाकी बच्चों के परिजनों की तलाश कर रही है। अपराध शाखा ने साथी एनजीओ के साथ मिलकर ये अभियान चलाया था।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन ने बताया कि शाखा की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने साथी एनजीओ के साथ मिलकर रेलवे स्टेशन और बस अड्डों से बच्चों को मुक्त कराया है। इन बच्चों को अपने परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। राजीव रंजन का कहना है कि बाल दिवस के मौके पर पुलिस ने बच्चों को सौंपकर उनके परिजनों को सबसे बड़ा तोहफा दिया है। उनका कहना है कि मुक्त कराए गए 31 बच्चों में ज्यादातर बिहार व उत्तर प्रदेश के हैं। हर बच्चे ने पुलिस को अलग-अलग कहानी बताई। कुछ बच्चों को उनके परिजनों ने छोड़ दिया था, जबकि कुछ बच्चे घर से भागकर आ गए थे। ये बच्चे बिना टिकट ट्रेन से दिल्ली पहुंच गए थे। सभी बच्चे गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सभी बच्चों को 1 से 14 नवंबर के बीच मुक्त करवाया गया है। पुलिस ने बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में बच्चों को स्कूल बैग व किताबें दीं।
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