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Kotputli-Behror: 32 दिन से ग्रामीण सड़क पर दे रहे धरना, फिर भी नहीं रुके भारी वाहन; हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
कांसली-शुक्लावास ग्रामीण सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन अब न्यायालय तक पहुंच गया है। सड़क पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित के बोर्ड लगे होने के बावजूद ट्रक, डंपर और ट्रेलर धड़ल्ले से गुजर रहे हैं। इससे नाराज ग्रामीण पिछले 32 दिनों से दिन-रात धरने पर बैठे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। यह आदेश शिवराम सिंह यादव और राधेश्याम यादव द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिया गया।
याचिका में बताया गया कि पीडब्ल्यूडी ने यह सड़क गांवों और ढाणियों के स्थानीय आवागमन के लिए बनाई थी। सड़क संकरी है और इसका उपयोग पैदल चलने वाले ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, साइकिल चालकों और किसानों द्वारा किया जाता है। इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों से भारी व व्यावसायिक वाहन गैरकानूनी रूप से इस मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने पहले जिला कलेक्टर, एसडीएम, डिप्टी एसपी और जिला परिवहन अधिकारी को ज्ञापन देकर भारी वाहनों पर रोक लगाने की मांग की थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। धरने के दौरान तहसीलदार और सरूण्ड थानाधिकारी ने ग्रामीणों से वार्ता कर 5 दिन में समस्या हल करने का आश्वासन दिया था, पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिमन्यु सिंह यदुवंशी ने कोर्ट को बताया कि एसडीएम ने परिवहन विभाग, पुलिस और पीडब्ल्यूडी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पीडब्ल्यूडी ने चेतावनी बोर्ड भी लगाए लेकिन अमल नहीं हुआ।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और संगीता शर्मा की खंडपीठ ने मुख्य सचिव, कलेक्टर, एसडीएम कोटपुतली, जिला परिवहन अधिकारी और पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
धरना संयोजक राधेश्याम ने कहा कि जब तक सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। धरने में अशोक यादव, रामसिंह यादव, सुनील मीणा, संतोष देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
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