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एक माह तक वृंदावन बिहारी जी मंदिर में कराएं चन्दन तुलसी इत्र सेवा , मिलेगा नौकरी व व्यापार से जुड़े समस्याओं का समाधान
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एक माह तक वृंदावन बिहारी जी मंदिर में कराएं चन्दन तुलसी इत्र सेवा , मिलेगा नौकरी व व्यापार से जुड़े समस्याओं का समाधान

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मॉडलिंग की दुनिया में नाम कमाकर फिल्मों में आईं ये अभिनेत्री, जानें कैसा रहा अब तक का सफर

बिना विदेशी सितारों के आईपीएल का रंग हो जाएगा फीका, आयोजन पर बोले KXIP के सह मालिक नेस वाडिया

आईपीएल 2020 कोरोना वायरस के चलते स्थगित है। फिलहाल इसके आयोजन को लेकर कोई रोड मैप नजर नहीं आ रहा है। इस बीच किंग्स इलेवन पंजाब के सहमालिक नेस वाडिया आईपीएल को वैश्विक टूर्नामेंट बताते हुए कहा है कि विदेशी खिलाड़ियों के बिना इस टूर्नामेंट के आयोजन का कोई मतलब नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के चलते लगे लॉकडाउन के कारण आईपीएल के आयोजन को लेकर फैसला करने के लिए बीसीसीआई को थोड़ा और समय चाहिए। 

कोरोना वायरस के कारण आईपीएल को बोर्ड ने अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया है। बीसीसीआई सितंबर-अक्तूबर में इसके आयोजन की योजना बना रहा है। इस साल अक्तूबर-नवंबर में ऑस्ट्रेलिया में होने वाला टी-20 विश्व कप का आयोजन अगर नहीं होता है, तो आईपीएल के आयोजन की संभावना काफी बढ़ जाएगी। लीग से जुड़े फ्रेंचाइजियों की टूर्नामेंट को लेकर मिश्रित राय है। राजस्थान रॉयल्स ने यात्रा प्रतिबंधों का हवाला देते हुए सिर्फ भारतीय खिलाड़ियों के साथ इसे आयोजित करने का सुझाव दिया।

वहीं, चेन्नई सुपरकिंग्स ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि इससे टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली टी-20 टूर्नामेंट की तरह हो जाएगा। किंग्स इलेवन पंजाब ने भी इस मामले में चेन्नई सुपरकिंग्स के साथ खड़ा नजर आया। वाडिया ने पीटीआई से कहा कि आईपीएल भारतीयों द्वारा बनाया गया एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है। यह दुनिया के प्रमुख क्रिकेट आयोजनों में से एक है। ऐसे में इसे अंतरराष्ट्रीय मंच और अंतरराष्ट्रीय सितारों की आवश्यकता है।

वाडिया ने कहा कि फिलहाल आईपीएल के बारे में बात करना सही नहीं है। इस वायरस से निपटना हमारे लिए फिलहाल बहुत जरूरी है। एक बार जब वायरस कम हो जाए तब आईपीएल कब और कहां आयोजित किया जा सकता है, इस बारे में अधिक स्पष्टता हो सकती है।

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केरल के तट से टकराया मानसून, झमाझम बारिश से देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के उलट मानसून शनिवार को केरल के तट से टकराया है। निजी एजेंसी स्काईमेट ने इस बात का दावा किया है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा था कि मानसून एक जून को केरल तट से टकराएगा, लेकिन अब दो दिन पहले ही इसकी आने की खबर है। हालांकि, भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने अभी आधिकारिक तौर पर इसका एलान नहीं किया है। 

स्काईमेट वेदर के सीईओ जतिन सिंह ने कहा कि केरल के ऊपर दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन की घोषणा करने के लिए बारिश, आउटवेव लॉन्गवेव रेडिएशन (ओएलआर) मूल्य और हवा की गति जैसी सभी स्थितियों की निगरानी पूरी तरह से की गई है। केरल के तट से मानसून के टकराने के बाद देश में चार महीने की बारिश के मौसम की शुरुआत होती है। देश में जून से सितंबर के बीच 75 फीसदी बारिश होती है।

मौसम विभाग ने अप्रैल में कहा था कि इस बार मानसून औसत ही रहने वाला है। विभाग के मुताबिक 96 से 100 प्रतिशत बारिश को सामान्य मानसून माना जाता है। पिछले साल यह आठ दिन की देरी से आठ जून को केरल के समुद्र तट से टकराया था। भारत में जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून से बारिश होती है। 

अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

अच्छा मॉनसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। कोरोना वायरस के कहर ने भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर ही तोड़ दी है। अब मॉनसून की झमाझम बारिश देश में मंदी की मार को दूर करने में कारगर साबित हो सकती है। कृषि प्रधान भारत में मानसून सामान्य रहने से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। भारत में ज्यादातर किसान खरीफ की फसलों की सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर रहते हैं।

आम तौर पर सबसे पहले केरल में दस्तक देने वाला दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भारत में हर साल जून से लेकर सितंबर तक चार महीनों तक रहता है। इसके बाद अलग-अलग वक्त पर यह देश की अलग-अलग जगहों पर पहुंचता है। 

दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना

भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 48 घंटों के दौरान दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बनेगा। उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर और उसके बाद पश्चिम-दक्षिणपश्चिम की ओर  इसकी बढ़ने की संभावना है। तीन जून तक यह गुजरात और उत्तर महाराष्ट्र के तटों की ओर बढ़ सकता है।
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भारत में कोरोनाः मध्य प्रदेश में 15 जून तक बढ़ेगा लॉकडाउन

भारत में कोरोना वायरस का कहर भारत में कोरोना वायरस का कहर

रेलवे में निकली हैं स्टाफ नर्स की नौकरियां, कल है आवेदन की आखिरी तारीख

Eastern Railway Recruitment 2020: पूर्वी रेलवे ने हावड़ा डिविजन स्थित ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल में कॉन्ट्रैक्ट मेडिकल प्रैक्टिशनर और नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट (स्टाफ नर्स) के कुल 50 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी की है। इन पदों के लिए आवेदन करने की कल आखिरी तारीख है। अगर आपने अभी तक इन नौकरियों के लिए आवेदन नहीं किया है, तो 31 मई तक हर हाल में कर लें। इन नौकरियों के लिए पूर्वी रेलवे द्वारा व्हाट्सएप या टेलीफोन के माध्यम से इंटरव्यू लिया जाएगा।

अभ्यर्थी इन पदों के लिए आवेदन ईमेल के जरिए कर सकते हैं। अभ्यर्थी अपने सारे डॉक्यूमेंट स्कैन करते  [email protected] पर मेल करके इन नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं। कॉन्ट्रैक्ट मेडिकल प्रैक्टिशनर और नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट (स्टाफ नर्स) पद के लिए उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग निर्धारित की गई है। अलग-अलग पद के लिए उम्र सीमा भी अलग-अलग निर्धारित की गई है। स्टाफ नर्स के लिए 40 नौकरियों निकली हैं जिनमें प्रति माह वेतन 44900 रुपये निर्धारित किया गया है। 

इसी तरह से कॉन्ट्रैक्ट मेडिकल प्रैक्टिशनर (सीएमपी) के लिए 10 पद निकाले गए हैं जिनमें प्रति माह  75000 रुपये वेतन निर्धारित किया गया है। स्टाफ नर्स के लिए उम्र सीमा 20 से लेकर 40 साल तय की गई है। इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग की डिग्री होनी चाहिए। सीएमपी पद के लिए 53 साल उम्र निर्धारित की गई है। ये सभी नौकरियां पश्चिम बंगाल के लिए हैं।
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रिपोर्ट में दावा, भारत में कोरोना के 28 फीसदी मामलों में नहीं मिले कोई लक्षण

कोरोना को लेकर रोजाना आ रही रिपोर्ट्स की वजह से चिंताएं बढ़ती जा रही है। फिलहाल एक ऐसी ही रिपोर्ट के मुताबिक देश में 22 जनवरी से 30 अप्रैल के बीच में मिले कोरोना के 40,184 संक्रमितों में 28 फीसदी मामले ऐसे जिनमें कोई भी लक्षण नहीं दिखे थे।

आईसीएमआर के अध्ययन के अनुसार, 28.1 प्रतिशत मामले ऐसे हैं जिनमें रोगियों में कोई लक्षण नहीं दिखे, 25.3 प्रतिशत मामलों के प्रत्यक्ष और सीधा संपर्क वाले मामले थे, जबकि 2.8 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवा में काम करने वाले उन कर्मचारियों के हैं जिनके पास पर्याप्त सुरक्षा नहीं थी।

वहीं आईसीएमआर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी के निदेशक मनोज मुरेकर ने कहा, बिना लक्षण वाले संक्रमितों की संख्या 28.1 प्रतिशत से अधिक हो सकती है और यह हमारे लिए चिंता का विषय है।

रिपोर्ट के मुताबिक देश में 22 जनवरी से 30 अप्रैल के बीच, जानलेवा कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) के लिए कुल 10,21,518 लोगों का परीक्षण किया गया। इस दौरान जहां मार्च की शुरुआत में 250 व्यक्तियों का प्रतिदिन परीक्षण होता था वहीं अप्रैल के अंत में यह संख्या बढ़कर 50,000 हो गई। कुल मिलाकर, 40,184 (3.9 प्रतिशत) लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक उम्र के हिसाब से संक्रमितों की दर प्रति मिलियन के हिसाब से 50-69 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में सबसे अधिक 63.3% थी और 10 साल से कम में 6.1% थी। पुरुषों में हमले की दर अधिक थी क्योंकि उनमें से 41.6 का परीक्षण पॉजिटिव था, जबकि 24.3 महिलाओं में इसका संक्रमण पाया गया. देश में 736 (71.1 प्रतिशत) जिलों में से 523 से कोरोना वायरस के मामले सामने आए।

दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात वे राज्य रहे जहां के जिलों से संक्रमितों के सर्वाधिक मामले सामने आए। राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों के मामलों में सर्वाधिक संक्रमित महाराष्ट्र (10.6%), दिल्ली (7.8%), गुजरात (6.3%), मध्य प्रदेश (6.1%) और पश्चिम बंगाल (5.8%) से आए हैं।
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महाराष्ट्रः मां-बाप ने मोबाइल वापस ले लिया तो बेटे ने दे दी जान

लोगों की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो)
महाराष्ट्र के ठाणे में मां-बाप द्वारा मोबाइल फोन वापस लिए जाने से नाराज किशोर ने पंखे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मीरा रोड स्थित एक घर में मंगलवार को यह वाकया हुआ।

उन्होंने बताया कि स्थानीय स्कूल में पढ़ने वाला 13 वर्षीय लड़का घर पर हमेशा मोबाइल में गेम खेलता रहता था। नवघर पुलिस थाने के इंस्पेक्टर राकेश बिराजदर ने बताया कि बच्चे के मां-बाप उसे फोन से चिपके रहने को लेकर हमेशा डांटते रहते थे।

उन्होंने कहा कि समय पहले उन्होंने बच्चे से मोबाइल वापस ले लिया जिससे वह नाराज हो गया। 26 मई उसने कथित तौर पर घर के पंखे से फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना में मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है।
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सीसीटीवी में कैद हुआ तेंदुए के हमले का वीडियो, नासिक में दो लोगों पर किया जानलेवा वार

कोरोना संक्रमण के जोखिम को कम करने के क्या-क्या तरीके हैं?

कोरोना महामारी दुनिया की पहली ऐसा महामारी है जिसके संक्रमण फैलने का तरीका सबसे भयावह है। किसी को भी इस बात की जानकारी नहीं है वे जिस चीज को हाथ लगा रहे हैं उसमें कोरोना है या नहीं। कोरोना वायरस दरवाजे की कुंडी से लेकर आपके साये की तरह 24 घंटे साथ रहने वाले मोबाइल फोन से भी फैल सकता है।

आपके घर में सब्जी आ रही है तो यह ही संभव है कि उस सब्जी में ही वायरस हो। कुल मिलाकर कहें तो यह अंदाजा लगाना काफी मुश्किल है कि कहां पर कोरोना का वायरस मौजूद है और कहां पर नहीं। ऐसे में इससे बचने का एक ही तरीका है और वह है कि आत्मसुरक्षा। कोरोना का संक्रमण इस बात पर निर्भर करता है कि आप खुद को कितना सुरक्षित रखते हैं और कौन-कौन सी सावधानियां बरतते हैं?
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RBSE : मुख्यमंत्री ने दसवीं-बारहवीं की शेष परीक्षाओं से पहले जारी किए ये जरूरी निर्देश

राजस्थान सरकार ने कोरोना महामारी की वजह से स्थगित हुई दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं को आयोजित करने का फैसला लिया है। कोविड-19 की वजह से दसवीं और बारहवीं कक्षा की कुछ परीक्षाएं शेष रह गई हैं। सरकार ने अब इन परीक्षाओं का कराने का निर्णय लिया है। सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिक्षा विभाग को परीक्षा आयोजित करने के लिए उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस संबंध में शुक्रवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की और उसके बाद यह फैसला लिया।

इस फैसले के बाद अब दसवीं और बारहवीं कक्षा की शेष परीक्षाओं की तिथि को लेकर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तरफ से अधिसूचना जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इन परीक्षाओं के दौरान कोरोना वायरस से बचाव के लिए स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है। उन्होंने सभी परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों और शिक्षकों द्वारा मास्क और सैनिटाइज़र का उपयोग अनिवार्य करने के लिए कहा है। सीएम ने कहा कि परीक्षाओं के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य होगा और कड़ाई से इसका पालन किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने आवश्यकता के अनुसार परीक्षा केंद्रों की संख्या में वृद्धि का भी सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में क्वारंटाइन सुविधाएं संचालित की जा रही हैं, उन्हें परीक्षा से पहले प्रोटोकॉल के हिसाब से सैनिटाइज किया जाना चाहिए। इस बैठक में शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा भी उपस्थिति थे।
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