खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में खुले सेप्टिक टैंक में गिरने से तीन साल के मासूम तनुष की मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। घटना के करीब दो महीने बाद बुधवार को मृतक बच्चे का परिवार फिर से ओंकारेश्वर पहुंचा और मांधाता थाने में आवेदन देकर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने खास तौर पर नगर परिषद ओंकारेश्वर के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर FIR दर्ज करने की मांग उठाई है।
बता दें कि यह दर्दनाक हादसा 24 जुलाई 2026 को हुआ था। मूल रूप से बालाघाट के रहने वाले और वर्तमान में नागपुर में निवासरत कैलाश उसराठे अपने परिवार के साथ भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए आए थे। दर्शन के दौरान उनका 3 वर्षीय बेटा तनुष खेलते-खेलते वहां खुले पड़े सेप्टिक टैंक में गिर गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने बड़ी मुश्किल से उसे बाहर निकाला और उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 14 घंटे तक डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने की कोशिश की, लेकिन मासूम ने दम तोड़ दिया था।
आज भी सदमे में परिवार, मां का रो-रोकर बुरा हाल
मासूम तनुष की मौत के बाद से पूरा परिवार सदमे में है। पिता कैलाश उसराठे ने बताया कि दो महीने बीत जाने के बाद भी उनकी पत्नी बेटे की याद में दिन-रात रोती रहती है। घर में तनुष के कपड़े और खिलौने आज भी वैसे ही रखे हैं, लेकिन घर का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया है। मां का कहना है कि अगर नगर परिषद ने थोड़ी सी भी जिम्मेदारी दिखाई होती तो आज उनका लाल उनके साथ होता।
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अतिक्रमण हटाया तो टैंक क्यों नहीं ढंका?
पीड़ित पिता कैलाश ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर यह सेप्टिक टैंक खुला पड़ा था, वहां नगर परिषद ने कुछ दिन पहले ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। जब पूरी टीम मौके पर मौजूद थी तो खुले और मौत को दावत दे रहे टैंक को क्यों नहीं बंद किया गया? क्यों उसे ऐसे ही लावारिस छोड़ दिया गया? साथ ही परिवार का आरोप है कि यह हादसा नहीं, बल्कि नगर परिषद की घोर लापरवाही का नतीजा है। खुले टैंक के चारों ओर न तो कोई बाउंड्री थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगा था।
सीएम के आदेश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
कैलाश उसराठे ने कहा कि घटना के बाद खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन करीब दो महीने बीत जाने के बाद भी जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी। जानकारी मिली है कि एक सब इंजीनियर पर खानापूर्ति के लिए कार्रवाई की गई है, लेकिन बड़े अधिकारी अब भी बच रहे हैं। परिवार ने मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदार सभी अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो।
बता दें कि, फिलहाल परिजनों ने मांधाता थाने में लिखित आवेदन देकर दोषियों के खिलाफ एफआईआर और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें मुआवजा नहीं, न्याय चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को अपने मासूम बच्चे को इस तरह की सिस्टम की लापरवाही के कारण न खोना पड़े।