जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाॅक में आने वाली झलोन ग्राम पंचायत में फर्जी मस्टर डालकर राशि आहरित करने का मामला सामने आया है। मिट्टी कूप और तालाबों के निर्माण पर 15 जून से रोक लग गई थी। उसके बावजूद सरपंच, सचिव ने मजदूरों के मस्टर डाल दिए। अब जनपद सीईओ जांच के बाद कार्रवाई की बात कह रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि पंचायतों की शिकायत तो आती है, लेकिन जांच कभी नहीं होती। वहीं, अधिकारी भी उन जगहों पर जाने से करताने लगे हैं।
30 जून तक हुआ भुगतान
झलोन ग्राम पंचायत ऐसी पंचायत है, जहां भारी बारिश के दिनों में भी उन निर्माण कार्यों में मजदूरों ने कार्य किया है जिन पर शासन द्वारा रोक लगा दी गई थी। 15 जून से मिट्टी कुआं के कार्यों पर रोक लगा दी थी, लेकिन झलोन ग्राम पंचायत में 30 जून तक मजदूरों ने कुआ में कार्य किया। बड़ी बात यह है कि बड़े समाज के लोग यहां मजदूर बने रहे।
यह बने मजदूर
इसी तरह गोहची तालाब जीर्णोधार में 27 जून से 2 जुलाई तक जो मस्टर डाला गया है, उसमें राहुल जैन, मनोज कुमार, संतोष जैन, आकाश, सीमा बाई, सविता रानी, राजेंद्र, राजकुमार जोगी, संगीता हजारी, लखन यादव को रोजगार दिया गया है। सवाल ये है कि कूप और तालाब कार्य पर 15 जून के बाद रोक लग गई थी और बारिश होने के बाद यहां पानी भर गया था। फिर यहां लगे मजदूरों ने क्या कार्य किया होगा। गांव से जानकारी लेने और मजदूरों के संबंध में जानकारी लेने पर पता चला कि जिन लोगों को मजदूर बनाया गया है वह खुद के निजी व्यापार करते हैं। तेंदूखेड़ा जनपद सीईओ मनीष बागरी का कहना है 15 जून से मिट्टी कूप के कार्य में मजदूरों पर रोक लग गई थी, फिर कैसे मस्टर डाले गए। मैं जानकारी लेता हूं।