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खजाने में दस करोड़ फिर नहीं बदल रहीं शहर की सूरत
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:04 AM IST
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ईओ व नगर पालिका अध्यक्ष में मची खींचतान, छह माह से विकास भी ठप
सीतापुर। शहर में नई सरकार बनने के बाद जनता में उम्मीद जगी थी कि अब शहर की सूरत बदलाव आएगा। लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता छह माह बीत चुके हैं पर यहां के विकास का पहिया नहीं घूमा है। ऐसा नहीं कि बजट नहीं है। पालिका के सरकारी खजाने में करीब 10 से 15 करोड़ रुपये का बजट भी है।
बावजूद इसके शहर में विकास के नाम पर एक ईंट भी नहीं लग पाई है। कारण यह है कि नगर पालिका अध्यक्ष और ईओ के बीच आपसी खींचतान मची है। ये एक-दूसरे के विकास के फैसले में कुछ न कुछ खामियां निकालकर अड़ंगा लगा रहे हैं। ऐसे में न सिर्फ यहां का विकास ठहर सा गया है, बल्कि शहर की सूरत भी बदरंग होती जा रही है।
पिछले पांच साल के कार्यकाल में यहां की कुर्सी पर सपा विधायक रहे राधेश्याम जायसवाल की पुत्रवधू रश्मि जायसवाल काबिज थीं। उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद पूर्व विधायक जायसवाल ने अपनी बहू को चुनावी समर में उतारने के बजाए खुद चेयरमैनी का चुनाव लड़ा और जीते भी।
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नए चेयरमैन, पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल ने 12 दिसंबर 2017 को शपथ ली थी। शपथ लेने के बाद से अब तक तीन बार ही बोर्ड बैठक बुलाई हैं। पहली बैठक में सिर्फ सभासदों से परिचय हो पाया था। उसके बाद बुलाई गई बोर्ड बैठकें किसी न किसी विवाद के कारण से निरस्त होती रही है।
हालांकि अभी हाल में बीते 16 मई को बुलाई गई बोर्ड बैठक में विकास कार्यों का खाका जरूर खींचा गया है मगर उसे जमीनी हकीकत मिल नहीं पाई है। हालात यह है कि मानसून आने को है। लेकिन शहर के प्रमुख नालों की सफाई नहीं हो पा रही है। गंदगी से पटे नाले पूरी तरह से चोक हैं।
जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। यहां की सड़कें भी जर्जर हाल में है। जिन पर से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। यही नहीं पेयजल के इंतजाम भी दुरुस्त नहीं है। सैकड़ों सरकारी हैंडपंप फेल है। कई नलकूप भी रिबोर योग्य है। बावजूद इसके जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं है।
जल्द शुरू होंगे काम
कुछ फाइलें रुकी हुई थीं। इनकी पहले जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई गई है। इसी वजह से कुछ विलंब हुआ है। विकास कार्यों की रूपरेखा बनाकर डीएम को अनुमोदन के लिए भेज दी गई है। जल्द ही विकास कार्य शुरू हो जाएंगे।
-राधेश्याम जायसवाल, अध्यक्ष नगर पालिका
पूरी तरीके से ठप नहीं थे कार्य
नए सिस्टम पर आने के लिए कुछ देरी होती है। पूरी तरीके से विकास कार्य ठप नहीं थे। करीब 10 करोड़ रुपये की कार्ययोजना जिलाधिकारी को अनुमोदन के लिए भेजी गई है। उसके बाद टेंडर निकाल कर काम शुरू कराया जाएगा।
-निहाल चंद, ईओ
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सीतापुर। शहर में नई सरकार बनने के बाद जनता में उम्मीद जगी थी कि अब शहर की सूरत बदलाव आएगा। लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता छह माह बीत चुके हैं पर यहां के विकास का पहिया नहीं घूमा है। ऐसा नहीं कि बजट नहीं है। पालिका के सरकारी खजाने में करीब 10 से 15 करोड़ रुपये का बजट भी है।
बावजूद इसके शहर में विकास के नाम पर एक ईंट भी नहीं लग पाई है। कारण यह है कि नगर पालिका अध्यक्ष और ईओ के बीच आपसी खींचतान मची है। ये एक-दूसरे के विकास के फैसले में कुछ न कुछ खामियां निकालकर अड़ंगा लगा रहे हैं। ऐसे में न सिर्फ यहां का विकास ठहर सा गया है, बल्कि शहर की सूरत भी बदरंग होती जा रही है।
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पिछले पांच साल के कार्यकाल में यहां की कुर्सी पर सपा विधायक रहे राधेश्याम जायसवाल की पुत्रवधू रश्मि जायसवाल काबिज थीं। उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद पूर्व विधायक जायसवाल ने अपनी बहू को चुनावी समर में उतारने के बजाए खुद चेयरमैनी का चुनाव लड़ा और जीते भी।
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नए चेयरमैन, पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल ने 12 दिसंबर 2017 को शपथ ली थी। शपथ लेने के बाद से अब तक तीन बार ही बोर्ड बैठक बुलाई हैं। पहली बैठक में सिर्फ सभासदों से परिचय हो पाया था। उसके बाद बुलाई गई बोर्ड बैठकें किसी न किसी विवाद के कारण से निरस्त होती रही है।
हालांकि अभी हाल में बीते 16 मई को बुलाई गई बोर्ड बैठक में विकास कार्यों का खाका जरूर खींचा गया है मगर उसे जमीनी हकीकत मिल नहीं पाई है। हालात यह है कि मानसून आने को है। लेकिन शहर के प्रमुख नालों की सफाई नहीं हो पा रही है। गंदगी से पटे नाले पूरी तरह से चोक हैं।
जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। यहां की सड़कें भी जर्जर हाल में है। जिन पर से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। यही नहीं पेयजल के इंतजाम भी दुरुस्त नहीं है। सैकड़ों सरकारी हैंडपंप फेल है। कई नलकूप भी रिबोर योग्य है। बावजूद इसके जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं है।
जल्द शुरू होंगे काम
कुछ फाइलें रुकी हुई थीं। इनकी पहले जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई गई है। इसी वजह से कुछ विलंब हुआ है। विकास कार्यों की रूपरेखा बनाकर डीएम को अनुमोदन के लिए भेज दी गई है। जल्द ही विकास कार्य शुरू हो जाएंगे।
-राधेश्याम जायसवाल, अध्यक्ष नगर पालिका
पूरी तरीके से ठप नहीं थे कार्य
नए सिस्टम पर आने के लिए कुछ देरी होती है। पूरी तरीके से विकास कार्य ठप नहीं थे। करीब 10 करोड़ रुपये की कार्ययोजना जिलाधिकारी को अनुमोदन के लिए भेजी गई है। उसके बाद टेंडर निकाल कर काम शुरू कराया जाएगा।
-निहाल चंद, ईओ