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Sitapur News: लोबान-कपूर से महक रहे खेत... धुएं से उग रहीं सब्जियां
Sun, 06 Sep 2026 11:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:57 PM IST
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धुएं से हो रही खेती
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सीतापुर। थाली में रसायनों और जहरीले कीटनाशकों की पहुंच रोकने के लिए परसेंडी ब्लॉक के अमरापुर गांव में महिला किसानों ने अनूठी पहल शुरू की है। हुनरमंद एफपीओ से जुड़ी महिलाएं अब रासायनिक खेती से दूरी बनाकर जैविक और प्राकृतिक तरीके से सब्जियां उगा रही हैं। फसलों को कीटों से बचाने के लिए रासायनिक दवाओं के बजाय लोबान, कपूर और नीम के धुएं का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हुनरमंद एफपीओ से जुड़ी महिला किसानों ने तोरई, करेला, भिंडी, टमाटर, हरी मिर्च, खीरा, बैंगन, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च और अरबी समेत एक दर्जन से अधिक सब्जियों की खेती शुरू की है। इनमें देसी बीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फसलों को कीटों से बचाने के लिए खेतों में लोबान, कपूर और नीम का धुआं किया जाता है। खास बात यह है कि एक एकड़ क्षेत्र में बने पॉलीहाउस में खीरे की फसल भी पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगाई जा रही है। एफपीओ का उद्देश्य कम लागत में प्राकृतिक सब्जियों का उत्पादन बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों तक रसायनमुक्त सब्जियां पहुंचाना है। साथ ही, इस पहल से महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।
इनसेट
रसायन की जगह जीवामृत और नीमास्त्र का प्रयोग
एफपीओ के संचालक राजीव भार्गव ने बताया कि प्राकृतिक खेती में आधुनिक तकनीक के साथ देसी नुस्खों को अपनाया गया है। खेतों में रासायनिक खाद की जगह घनजीवामृत, जीवामृत, नीमास्त्र, गौमूत्र, नीम ऑयल, देसी गोबर की खाद और केंचुआ खाद का प्रयोग हो रहा है। कीट प्रबंधन के लिए सोलर लाइट ट्रैप और लाल-पीले स्टिकी ट्रैप लगाए गए हैं। पानी और समय की बचत के लिए ड्रिप और मल्चिंग तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
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इनसेट
कीटनाशक तैयार करने का सिखाया जा रहा हुनर
एफपीओ द्वारा किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और केंचुआ खाद घर पर ही कम लागत में तैयार करना भी सिखाया जा रहा है, जिससे उनकी आय भी बढ़ रही है। कई महिला किसान इससे जीवन यापन कर रही हैं।
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हुनरमंद एफपीओ से जुड़ी महिला किसानों ने तोरई, करेला, भिंडी, टमाटर, हरी मिर्च, खीरा, बैंगन, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च और अरबी समेत एक दर्जन से अधिक सब्जियों की खेती शुरू की है। इनमें देसी बीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फसलों को कीटों से बचाने के लिए खेतों में लोबान, कपूर और नीम का धुआं किया जाता है। खास बात यह है कि एक एकड़ क्षेत्र में बने पॉलीहाउस में खीरे की फसल भी पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगाई जा रही है। एफपीओ का उद्देश्य कम लागत में प्राकृतिक सब्जियों का उत्पादन बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों तक रसायनमुक्त सब्जियां पहुंचाना है। साथ ही, इस पहल से महिला किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।
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रसायन की जगह जीवामृत और नीमास्त्र का प्रयोग
एफपीओ के संचालक राजीव भार्गव ने बताया कि प्राकृतिक खेती में आधुनिक तकनीक के साथ देसी नुस्खों को अपनाया गया है। खेतों में रासायनिक खाद की जगह घनजीवामृत, जीवामृत, नीमास्त्र, गौमूत्र, नीम ऑयल, देसी गोबर की खाद और केंचुआ खाद का प्रयोग हो रहा है। कीट प्रबंधन के लिए सोलर लाइट ट्रैप और लाल-पीले स्टिकी ट्रैप लगाए गए हैं। पानी और समय की बचत के लिए ड्रिप और मल्चिंग तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
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कीटनाशक तैयार करने का सिखाया जा रहा हुनर
एफपीओ द्वारा किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और केंचुआ खाद घर पर ही कम लागत में तैयार करना भी सिखाया जा रहा है, जिससे उनकी आय भी बढ़ रही है। कई महिला किसान इससे जीवन यापन कर रही हैं।