राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में हादसे का शिकार हुई इमारत में ज्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हैं। लोगों ने बताया कि इमारत के हर कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। छात्र एक बिस्तर के लिए 12 से 15 हजार रुपये तक दे रहे थे।
स्थानीय लोगों ने बताया कि तंग गलियों और कमजोर इमारतों से हर पल जिंदगी का खतरा बना रहता है। अफसर बनने और कॅरिअर संवारने का सपना देखने वाले छात्र इन्हीं हालात में रहने को मजबूर हैं।
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दिल्ली में पांच मंजिला इमारत गिरी, बचाव कार्य जारी
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय निवासी प्रियंका ने बताया, मैं इलाके में 22 साल से रह रही हूं। लोगों ने मकानों को पीजी में बदल दिया गया है। 70 फीसदी से अधिक पीजी के मालिक यहां रहते भी नहीं थे।
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कमजोर नींव पर खड़ी थी इमारत, सुरक्षा की फिक्र नहीं
सत्य निकेतन में हादसे का शिकार हुई पांच मंजिला इमारत में ज्यादातर छात्र केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बताए जा रहे हैं। छात्र यहां 12 से 15 हजार रुपये प्रति बेड किराये पर रह रहे थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था।
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दिल्ली में पांच मंजिला इमारत गिरी, बचाव कार्य जारी
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उनका दावा है कि काम के दौरान पानी भरने से नींव कमजोर हो गई थी। हादसे के बाद बगल की इमारत भी झुकी हुई नजर आई, जिससे आसपास के लोगों में चिंता बढ़ गई। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि ऊपरी मंजिलों पर करीब 20-25 छात्र रहते थे।
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बगल की इमारत भी झुकी हुई नजर आई, स्थानीय लोगों की बढ़ी चिंता
कभी रखरखाव का काम होते नहीं देखा
स्थानीय निवासी प्रियंका ने बताया कि वह 20-22 वर्षों से इलाके में रह रही हैं। प्रियंका के मुताबिक, हादसे वाली इमारत 20 साल से अधिक पुरानी थी और इतने वर्षों में उसमें रखरखाव का काम होते नहीं देखा गया। उन्होंने खुली नालियों और सीवर व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।