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नहाय खाय के संग छठ पूजा शुरू
Updated Sun, 11 Nov 2018 11:17 PM IST
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सीतापुर। महापर्व छठ पूजा की रविवार को नहाय खाय के साथ शुरुआत हो गई है। पहले दिन श्रद्धालुओं ने स्नान कर भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की। बाद में पीएसी के गोल्फ मैदान के पास स्थित तालाब में वेदी भी बनाई गईं।
लोक आस्था का पर्व छठ पूजा का उत्सव शुरू हो गया है। पहले दिन रविवार को लोगों ने स्नान किया और भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि छठ पूजा करने से परिवार की समृद्धि और कष्टों का निवारण होता है। नहाय खाय के दिन महिलाएं चावल, लौकी की सब्जी और चने की दाल प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं।
घर के सभी सदस्य भी इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। छठ के दूसरे दिन सोमवार को व्रती महिलाएं दिन भर उपवास करती हैं और शाम को खरना करती हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद भगवान सूर्य की पूजा के बाद छठव्रती सिर्फ एक बार दूध और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसके बाद उनका 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।
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महापर्व के तीसरे दिन छठव्रती दिन भर उपवास पर रहती हैं और पूजा के लिए प्रसाद के रूप में ठेकुआ बनाती हैं। इसी दिन पूजा के लिए लोग फलों की भी खरीदारी करते हैं। शाम को सभी फलों को टोकरी में सजाकर लोग पवित्र नदियों या फिर घाटों पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
छठ के चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन होता है। इस दिन छठव्रती प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत तोड़ती हैं। पहले दिन महिलाओं ने स्नान कर भगवान सूर्य की पूजा -अर्चना की। इस दिन पुरुष महिलाओं एवं बच्चों ने पीएसी के गोल्फ मैदान पर स्थित तालाब पर वेदियों का निर्माण किया। इस पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह भी देखा गया।
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लोक आस्था का पर्व छठ पूजा का उत्सव शुरू हो गया है। पहले दिन रविवार को लोगों ने स्नान किया और भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि छठ पूजा करने से परिवार की समृद्धि और कष्टों का निवारण होता है। नहाय खाय के दिन महिलाएं चावल, लौकी की सब्जी और चने की दाल प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं।
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घर के सभी सदस्य भी इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। छठ के दूसरे दिन सोमवार को व्रती महिलाएं दिन भर उपवास करती हैं और शाम को खरना करती हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद भगवान सूर्य की पूजा के बाद छठव्रती सिर्फ एक बार दूध और गुड़ से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसके बाद उनका 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।
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महापर्व के तीसरे दिन छठव्रती दिन भर उपवास पर रहती हैं और पूजा के लिए प्रसाद के रूप में ठेकुआ बनाती हैं। इसी दिन पूजा के लिए लोग फलों की भी खरीदारी करते हैं। शाम को सभी फलों को टोकरी में सजाकर लोग पवित्र नदियों या फिर घाटों पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
छठ के चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन होता है। इस दिन छठव्रती प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत तोड़ती हैं। पहले दिन महिलाओं ने स्नान कर भगवान सूर्य की पूजा -अर्चना की। इस दिन पुरुष महिलाओं एवं बच्चों ने पीएसी के गोल्फ मैदान पर स्थित तालाब पर वेदियों का निर्माण किया। इस पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह भी देखा गया।