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बिजली की प्रस्तावित दरों से बढ़ेगा बोझ
Updated Thu, 10 Aug 2017 12:44 AM IST
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शामली
उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन द्वारा बिजली की दरों में वृद्धि प्रस्तावित करने से लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने प्रस्तावित बिजली दरों को जनता पर बोझ बताया है, तो भारतीय किसान यूनियन ने इसके खिलाफ आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
पावर कारपोरेशन ने शहरी क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली की दरों में 12 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर बिजली दर 24 प्रतिशत तक बढ़ाना प्रस्तावित किया है। इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि प्रदेश की जनता पहले से तंगहाली में जी रही है। किसानों को गन्ना मूल्य नहीं मिल रहा, तो फसलों का वाजिब दाम भी नहीं मिल पा रहा है। इस कारण किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में यदि बिजली दरें बढ़ाई जाती है, तो बोझ और बढ़ जाएगा। बिजली दरें बढ़ाने के खिलाफ 30 अगस्त को प्रदेश भर के सभी पावर कार्पोरेशन प्रबंधक निदेशकों के दफ्तरों पर घेराव प्रदर्शन किया जाएगा। मेरठ में पश्चिमांचल विद्युत वितरण के प्रबंधक निदेशक के कार्यालय का घेराव होगा। यदि बढ़ी दरें लागू की गई और सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो आंदोलन किया जाएगा।
भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप पंवार ने बताया कि 1987 में बिजली की बढ़ी दरों के कारण ही खेड़ीकरमू में आंदोलन हुआ था, जिसके बाद प्रदेश भर में आंदोलन शुरू हो गया था। उधर, पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस का कहना है कि बिजली दरों में वृद्धि करना उचित नहीं है। प्रदेश सरकार को बिजली चोरी रोकने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। क्योंकि प्रदेश में बिजली चोरी ज्यादा होने के कारण दिक्कत होती है। इससे विभाग को भी लाभ होगा और जनता को भी।
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सपा नेता प्रोफेसर सुधीर पंवार का कहना है कि बिजली की दरें बढ़ाने की बजाय किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। क्योंकि किसान की हालत ठीक नहीं है। जब किसान के पास पैसा ही नहीं होगा, तो बिजली का बिल कैसे जमा करेंगे। बिजली दरें बढ़ने पर सपा आंदोलन शुरू करेगी तथा जनता के हित में लड़ाई लड़ी जाएगी।
अग्रवाल मित्र मंडल के सचिव अनुज बंसल ने बताया कि प्रदेश के व्यापारी, कर्मचारी व नागरिकों की आय निम्न स्तर पर है। ऐसे में बिजली की दरें बढाए जाने से दुश्वारियां पैदा होंगी। आम जनता के हित में सोचते हुए बिजली की दरों में वृद्धि नहीं होनी चाहिए। यदि पावर कार्पोरेशन ऐसा प्रस्ताव ला भी रहा है, तो उसे प्रदेश सरकार को खारिज करना चाहिए।
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उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन द्वारा बिजली की दरों में वृद्धि प्रस्तावित करने से लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने प्रस्तावित बिजली दरों को जनता पर बोझ बताया है, तो भारतीय किसान यूनियन ने इसके खिलाफ आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है।
पावर कारपोरेशन ने शहरी क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली की दरों में 12 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर बिजली दर 24 प्रतिशत तक बढ़ाना प्रस्तावित किया है। इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि प्रदेश की जनता पहले से तंगहाली में जी रही है। किसानों को गन्ना मूल्य नहीं मिल रहा, तो फसलों का वाजिब दाम भी नहीं मिल पा रहा है। इस कारण किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में यदि बिजली दरें बढ़ाई जाती है, तो बोझ और बढ़ जाएगा। बिजली दरें बढ़ाने के खिलाफ 30 अगस्त को प्रदेश भर के सभी पावर कार्पोरेशन प्रबंधक निदेशकों के दफ्तरों पर घेराव प्रदर्शन किया जाएगा। मेरठ में पश्चिमांचल विद्युत वितरण के प्रबंधक निदेशक के कार्यालय का घेराव होगा। यदि बढ़ी दरें लागू की गई और सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो आंदोलन किया जाएगा।
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भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप पंवार ने बताया कि 1987 में बिजली की बढ़ी दरों के कारण ही खेड़ीकरमू में आंदोलन हुआ था, जिसके बाद प्रदेश भर में आंदोलन शुरू हो गया था। उधर, पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस का कहना है कि बिजली दरों में वृद्धि करना उचित नहीं है। प्रदेश सरकार को बिजली चोरी रोकने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। क्योंकि प्रदेश में बिजली चोरी ज्यादा होने के कारण दिक्कत होती है। इससे विभाग को भी लाभ होगा और जनता को भी।
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सपा नेता प्रोफेसर सुधीर पंवार का कहना है कि बिजली की दरें बढ़ाने की बजाय किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। क्योंकि किसान की हालत ठीक नहीं है। जब किसान के पास पैसा ही नहीं होगा, तो बिजली का बिल कैसे जमा करेंगे। बिजली दरें बढ़ने पर सपा आंदोलन शुरू करेगी तथा जनता के हित में लड़ाई लड़ी जाएगी।
अग्रवाल मित्र मंडल के सचिव अनुज बंसल ने बताया कि प्रदेश के व्यापारी, कर्मचारी व नागरिकों की आय निम्न स्तर पर है। ऐसे में बिजली की दरें बढाए जाने से दुश्वारियां पैदा होंगी। आम जनता के हित में सोचते हुए बिजली की दरों में वृद्धि नहीं होनी चाहिए। यदि पावर कार्पोरेशन ऐसा प्रस्ताव ला भी रहा है, तो उसे प्रदेश सरकार को खारिज करना चाहिए।