मुरादाबाद। भरत जी पृथ्वी पर पड़े हैं, उठाए उठते नहीं। तब कृपासिंधु श्री रामचंद्र जी ने उन्हें जबर्दस्ती उठाकर अपने हृदय से लगा लिया। उनके सांवले शरीर पर रोएं खड़े हो गए। नवीन कमल के समान नेत्रों में प्रेमाश्रुओं के जल की बाढ़ आ गई। त्रिलोकी के स्वामी प्रभु श्री राम और भरत जी का प्रगाढ़ प्रेम देखकर हर ह्रदय में उमड़ रहा सागर अश्रु बनकर नेत्रों से बह निकला।
प्राचीन श्री रामलीला कमेटी ने पुराना दसवां घाट में विभीषण के राजतिलक और भरत मिलाप का मार्मिक मंचन किया। रावण के शव का अंतिम संस्कार करने के बाद विभीषण ने आकर भगवान के समक्ष सिर नवाया। श्री रामजी ने छोटे भाई लक्ष्मण से कहा कि तुम, वानरराज सुग्रीव, अंगद, नल, नील, जामवंत और हनुमान सब नीति निपुण लोग मिलकर विभीषण जी का राजतिलक करो। राम अपने पिता दशरथ के वचन के कारण नगर में प्रवेश नहीं कर सकते थे। आदर के साथ विभीषण को सिंहासन पर बैठाकर राजतिलक किया गया।
इसके बाद प्रभु राम वनवास पूरा कर अपनी मातृभूमि अयोध्या नगरी पहुंचे। यहां भरत मिलाप देखकर दर्शक देखकर भावविभोर हो गए। शुक्रवार को रामलीला की शुरुआत समिति के अध्यक्ष यथार्थ किशोर, संरक्षक छत्रपाल सैनी, अदित्यवीर शास्त्री ने राम, लक्ष्मण व सीता की आरती के साथ की। इस मौके पर सोनू, सुमन, इंद्रजीत शर्मा, राजेश वाल्मीकि, ओमाशंकर, चंद्र प्रकाश गुप्ता आदि मौजूद रहे।