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मन की आंखों से स्पर्श ने पाए 93 प्रतिशत मार्क्स
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देख नहीं पाते हैं स्पर्श, स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की मदद से करते हैं पढ़ाई
हौसला है लाजवाब, बनना चाहते हैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर
मेरठ। सिटी वोकेशनल स्कूल के होनहार स्टूडेंट स्पर्श सहगल देख नहीं पाते हैं। इसके बावजूद उन्होंने टॉप फाइव सब्जेक्ट के प्रतिशत के हिसाब से 93 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। वह स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की मदद से लैपटॉप पर पढ़ाई करते हैं। वह टाइप कर लेते हैं, जो लिखते हैं वह लैपटॉप सॉफ्टवेयर की मदद से बोलकर बताता है कि क्या लिखा है। इस तरह वह लिखते और पढ़ते हैं। उन्हें एक होम ट्यूटर भी पढ़ाने के लिए आते हैं।
स्पर्श रेग्युलर स्कूल जातेे हैं। इसके लिए उनके परिजन उनका सहयोग करते हैं। स्कूल में टीचर और साथी भी उन्हें सहयोग देते हैं। स्पर्श ने बताया कि वह पैदाइश से इस तरह के हैं। आंखों से वह सिर्फ रोशनी महसूस कर सकते हैं। उनका काफी इलाज कराने की कोशिश की गई, मगर उनकी आंखें ठीक नहीं हो पाईं। परेशानी होती है, मगर यह दिक्कत उनके हौसले को कम नहीं कर सकती। वह आगे चलकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं। इनकी माता ममता सहगल घरेलू महिला हैं, जबकि पिता शिव सहगल ज्वेलर हैं।
रिपोर्ट कार्ड
हिंदी 100
इंग्लिश 92
साइंस 97
एसएसटी 97
मैथ 79
आईटी 97
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हौसला है लाजवाब, बनना चाहते हैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर
मेरठ। सिटी वोकेशनल स्कूल के होनहार स्टूडेंट स्पर्श सहगल देख नहीं पाते हैं। इसके बावजूद उन्होंने टॉप फाइव सब्जेक्ट के प्रतिशत के हिसाब से 93 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। वह स्क्रीन रीडर सॉफ्टवेयर की मदद से लैपटॉप पर पढ़ाई करते हैं। वह टाइप कर लेते हैं, जो लिखते हैं वह लैपटॉप सॉफ्टवेयर की मदद से बोलकर बताता है कि क्या लिखा है। इस तरह वह लिखते और पढ़ते हैं। उन्हें एक होम ट्यूटर भी पढ़ाने के लिए आते हैं।
स्पर्श रेग्युलर स्कूल जातेे हैं। इसके लिए उनके परिजन उनका सहयोग करते हैं। स्कूल में टीचर और साथी भी उन्हें सहयोग देते हैं। स्पर्श ने बताया कि वह पैदाइश से इस तरह के हैं। आंखों से वह सिर्फ रोशनी महसूस कर सकते हैं। उनका काफी इलाज कराने की कोशिश की गई, मगर उनकी आंखें ठीक नहीं हो पाईं। परेशानी होती है, मगर यह दिक्कत उनके हौसले को कम नहीं कर सकती। वह आगे चलकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं। इनकी माता ममता सहगल घरेलू महिला हैं, जबकि पिता शिव सहगल ज्वेलर हैं।
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