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पावरलूम खरीदने के लिए सब्सिडी बंद
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
Updated Wed, 01 Aug 2018 11:49 PM IST
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powerloom in mau
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बुनकरों को पावरलूम खरीदने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी अब बंदं कर दी गई है। पावरलूम की खरीददारी करने के लिए 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाता रहा है। बुनकरों को केवल 20 प्रतिशत भुगतान करना होता था। योजना बंद कर देने से अब बुनकरों के समक्ष पावरलूम की खरीददारी कर पाना असंभव हो गया। गरीब बुनकर युवाओं के समक्ष रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है।
बुनकरों को पावरलूम खरीदने के लिए सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिया जाने की योजना के तहत अनुदान दिया जाता रहा है। सरकार की मंशा थी कि जो गरीब बुनकर गरीबी के चलते पावरलूम खरीद नहीं पाते हैं , उन्हें आर्थिक सहयोग प्रदान कर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा सकता है। इसके तहत सरकार पावरलूम खरीदने वाले बुनकरों को 80 प्रतिशत अनुदान देती थी।
बुनकरों को केवल मार्जिन मनी के रूप में 20 प्रतिशत धनराशि देनी होती थी। इस योजना के तहत अब सरकार से कोई बजट नहीं दिया जा रहा है। सरकार की ओर से घोषित रूप से योजना बंद नहीं की गई है और न ही इस आशय का कोई आदेश शासन से जारी किया गया है। लेकिन पिछले दो सालों से इस योजना के तहत कोई धन नहीं दिया गया है। इसके पूर्व जिले में इस योजना के तहत मात्र16 लाभार्थियों को इसका लाभ मिला था।
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इस बाबत अपर निदेशक हथकरघा फिरोज का कहना है कि सरकार से इस योजना के बाबत अब दो सालों से कोई बजट नहीं मिला है और न ही योजना के बंद होने का कोई पत्र ही आया है।
शहर के मुुगलपुरा निवासी असरार कहते हैं कि योजना के तहत पारवलूम की खरीद के लिए दी जाने वाली सिब्सिडी बंद हो जाने से गरीब बुनकर अपने पास इतने रुपये नहीं जुटा पाता है। इससे उसे मजदूरी पर काम करने को विवश होना पड़ता है। हरिकेश पुरा मुुहल्ला निवासी नौशाद कहते हैं कि गरीब बुनकरों के पास इतने रुपये नहीं होते कि वह खुद पावरलूम खरीद सके। सब्सिडी मिलने से बुनकरों को काफी रात मिलती थी लेकिन इसे बंद कर बुनकरों के साथ अन्याय किया गया है।
क्यारीटोला निवासी एखलाक कहते हैं कि सरकार बुनकरों के कल्याण के लिए वास्तव में ईमानदारी से प्रयास नहीं कर रही है। इस महत्पूर्ण योजना को बंद करना इसका उदहरण है। कटरा निवासी इकबाल कहते हैं कि बुनकर मजदूरी पर जब साड़ियों की बुनाई करता है तो उसे काफी कम मजदूरी मिलती है। इससे उसके परिवार का गुजर बसर कर पाना काफी मुश्किल होता है। सरकार ने इस छोटी सी उम्मीद की किरण को भी बंद कर दिया है।
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बुनकरों को पावरलूम खरीदने के लिए सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिया जाने की योजना के तहत अनुदान दिया जाता रहा है। सरकार की मंशा थी कि जो गरीब बुनकर गरीबी के चलते पावरलूम खरीद नहीं पाते हैं , उन्हें आर्थिक सहयोग प्रदान कर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा सकता है। इसके तहत सरकार पावरलूम खरीदने वाले बुनकरों को 80 प्रतिशत अनुदान देती थी।
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बुनकरों को केवल मार्जिन मनी के रूप में 20 प्रतिशत धनराशि देनी होती थी। इस योजना के तहत अब सरकार से कोई बजट नहीं दिया जा रहा है। सरकार की ओर से घोषित रूप से योजना बंद नहीं की गई है और न ही इस आशय का कोई आदेश शासन से जारी किया गया है। लेकिन पिछले दो सालों से इस योजना के तहत कोई धन नहीं दिया गया है। इसके पूर्व जिले में इस योजना के तहत मात्र16 लाभार्थियों को इसका लाभ मिला था।
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इस बाबत अपर निदेशक हथकरघा फिरोज का कहना है कि सरकार से इस योजना के बाबत अब दो सालों से कोई बजट नहीं मिला है और न ही योजना के बंद होने का कोई पत्र ही आया है।
शहर के मुुगलपुरा निवासी असरार कहते हैं कि योजना के तहत पारवलूम की खरीद के लिए दी जाने वाली सिब्सिडी बंद हो जाने से गरीब बुनकर अपने पास इतने रुपये नहीं जुटा पाता है। इससे उसे मजदूरी पर काम करने को विवश होना पड़ता है। हरिकेश पुरा मुुहल्ला निवासी नौशाद कहते हैं कि गरीब बुनकरों के पास इतने रुपये नहीं होते कि वह खुद पावरलूम खरीद सके। सब्सिडी मिलने से बुनकरों को काफी रात मिलती थी लेकिन इसे बंद कर बुनकरों के साथ अन्याय किया गया है।
क्यारीटोला निवासी एखलाक कहते हैं कि सरकार बुनकरों के कल्याण के लिए वास्तव में ईमानदारी से प्रयास नहीं कर रही है। इस महत्पूर्ण योजना को बंद करना इसका उदहरण है। कटरा निवासी इकबाल कहते हैं कि बुनकर मजदूरी पर जब साड़ियों की बुनाई करता है तो उसे काफी कम मजदूरी मिलती है। इससे उसके परिवार का गुजर बसर कर पाना काफी मुश्किल होता है। सरकार ने इस छोटी सी उम्मीद की किरण को भी बंद कर दिया है।