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एक और बच्चा हार गया जिंदगी की जंग
ब्यूरो, मऊ, अमर उजाला
Updated Thu, 22 Jan 2015 10:28 PM IST
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महासो रेल हादसे में घायल एक और बच्चा जिंदगी की जंग हार गया। इलाज के दौरान पांच वर्षीय नमन की बुधवार की रात बीएचयू के सरसुंदर लाल अस्पताल में मौत हो गई।
नमन का वाराणसी में ही दाह संस्कार कर दिया गया। इस तरह दिल दहला देने वाली हादसे में मरने वाले मासूमों की संख्या आठ हो गई है। अब भी एक बच्चे का इलाज बीएचयू में चल रहा है।
चार दिसंबर को रानीपुर थाना क्षेत्र के महासो गांव के निकट मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर चालक की लापरवाही से एक स्कूली वैन को ट्रेन ने टक्कर मार दी।
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इसमें छह बच्चाें की मौत हो गई थी, जबकि चालक सहित सात घायल हो गए थे। तीन बच्चों का नगर के शारदा नारायण अस्पताल में इलाज हुआ, जो ठीक होकर घर चले गए।
दुर्घटना में ज्यादा गंभीर स्थिति पर खुशी, नमन एवं शिवम को बीएचयू में भर्ती कराया गया था। इनमें खुशी की नौ दिसंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई।
जबकि नमन और शिवम की हालत चिंताजनक होने पर इलाज चल रहा था। आखिरकार बुधवार की रात नमन भी जिंदगी की जंग हार गया। शिवम अभी भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
घटना के डेढ़ महीने बाद भी शिवम इस स्थिति में नहीं है, जिसे चिकित्सक यह कहकर छोड़ सकें कि वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। नमन की मौत से महासो गांव में फिर से पुराना जख्म हरा हो गया है।
नमन अपने ननिहाल महासो में नाना वृहस्पति यादव के यहां रहकर पढ़ रहा था। वह मूलरूप से आजमगढ़ जनपद के जीयनपुर थाना क्षेत्र के देवपुर कोठिया गांव का रहने वाला था।
उध्ार, चार दिसंबर को महासो रेल हादसे में आठ बच्चों की मौत के बाद भी रेलवे प्रशासन नहीं चेता। रेलमंत्री के आश्वासन पर घटना स्थल पर तुरंत जंजीर लगाकर फाटक बनने का कार्य तो शुरू हो गया,
लेकिन डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी कार्य अधूरा है। रेलवे फाटक काफी दिनों से बनकर शोपीस की तरह खड़ा है, विभाग ने प्रारंभ में उपलब्ध कराई जंजीर भी ले ली है। इसके चलते गार्ड को हाथ से झंडी दिखाकर लोगों को रोकना पड़ रहा है।
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नमन का वाराणसी में ही दाह संस्कार कर दिया गया। इस तरह दिल दहला देने वाली हादसे में मरने वाले मासूमों की संख्या आठ हो गई है। अब भी एक बच्चे का इलाज बीएचयू में चल रहा है।
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चार दिसंबर को रानीपुर थाना क्षेत्र के महासो गांव के निकट मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर चालक की लापरवाही से एक स्कूली वैन को ट्रेन ने टक्कर मार दी।
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इसमें छह बच्चाें की मौत हो गई थी, जबकि चालक सहित सात घायल हो गए थे। तीन बच्चों का नगर के शारदा नारायण अस्पताल में इलाज हुआ, जो ठीक होकर घर चले गए।
दुर्घटना में ज्यादा गंभीर स्थिति पर खुशी, नमन एवं शिवम को बीएचयू में भर्ती कराया गया था। इनमें खुशी की नौ दिसंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई।
जबकि नमन और शिवम की हालत चिंताजनक होने पर इलाज चल रहा था। आखिरकार बुधवार की रात नमन भी जिंदगी की जंग हार गया। शिवम अभी भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है।
घटना के डेढ़ महीने बाद भी शिवम इस स्थिति में नहीं है, जिसे चिकित्सक यह कहकर छोड़ सकें कि वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। नमन की मौत से महासो गांव में फिर से पुराना जख्म हरा हो गया है।
नमन अपने ननिहाल महासो में नाना वृहस्पति यादव के यहां रहकर पढ़ रहा था। वह मूलरूप से आजमगढ़ जनपद के जीयनपुर थाना क्षेत्र के देवपुर कोठिया गांव का रहने वाला था।
उध्ार, चार दिसंबर को महासो रेल हादसे में आठ बच्चों की मौत के बाद भी रेलवे प्रशासन नहीं चेता। रेलमंत्री के आश्वासन पर घटना स्थल पर तुरंत जंजीर लगाकर फाटक बनने का कार्य तो शुरू हो गया,
लेकिन डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी कार्य अधूरा है। रेलवे फाटक काफी दिनों से बनकर शोपीस की तरह खड़ा है, विभाग ने प्रारंभ में उपलब्ध कराई जंजीर भी ले ली है। इसके चलते गार्ड को हाथ से झंडी दिखाकर लोगों को रोकना पड़ रहा है।