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किसानों को कर्ज देने में एसबीआई है फिसड़्डी
Updated Sun, 24 Sep 2017 11:07 PM IST
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मऊ। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक किसानों को फसली ऋण देने में काफी कंजूसी बरतता है। इसका खुलासा जिले में वितरित हुए ऋण मोचन कार्यक्रम में हुआ। प्रथम चरण में चयनित 4901 किसानों में से स्टेट बैंक ने महज 141 किसानों को ऋण बांटा था। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि किसानों को कर्ज देने वाले जिले के कुल बैंकों में से भारतीय स्टेट बैंक का योगदान मात्र साढ़े तीन प्रतिशत रहा है।
एनआईसी मऊ से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक योजना के प्रथम चरण के कुल 4901 लाभार्थी किसानों में एसबीआई के केवल 141 किसान हैं। यह स्थिति तब है जब प्राय: अधिकांश समीक्षा बैठकों में एसबीआई की खराब प्रगति पर असंतोष जाहिर करते हुए जिलाधिकारी द्वारा किसानों को कर्ज देने में बेहतर प्रगति लाने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। किसानों को फसली ऋण देने के मामले में जिले के लीड बैंक यूनियन बैंक आफ इंडिया की भूमिका सबसे बेहतर रही है। इस बैंक ने प्रथम चरण में आने वाले कुल 1834 किसानों को फसली ऋण दिया था। जबकि दूसरे नंबर पर काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक की ओर से भी 1236 किसानों को फसली ऋण दिया गया था।
बलिया जिले से पृथक कर मऊ जिले में शामिल किए गए रतनपुरा ब्लाक के अंतर्गत महज सात शाखाओं के बूते पूर्वांचल ग्रामीण बैंक ने भी किसानों को फसली ऋण देने में रुचि दिखाई है। इस बैंक से फसली ऋण लेने वाले कुल 503 किसान इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। जबकि इलाहाबाद बैंक ने भी 598 किसानों को फसली ऋण दिया था। फसली ऋण देने में कंजूसी तो पंजाब नेशनल बैंक और बैंक आफ बड़ौदा ने भी की है इन दोनों बैंकों ने प्रथम चरण में लाभ पाने केवल क्रमश:164 और123 किसानों को ही फसली ऋण दिया था। शेष अन्य आठ बैंकों की स्थिति और भी दयनीय है। प्रथम चरण में कारपोरेशन बैंक से 82, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया 80 ओरिएंटल बैंक 65 और बैंक आफ इंडिया ने महज 28 किसानों को फसली ऋण दिया था। इनके अलावा केनरा बैंक ने 22, सिंडिकेट बैंक ने 12 ,आईडीबीआई ने 11 और देना बैंक ने केवल दो किसानों को फसली ऋण दिया था। इस सभी किसानों के फसली ऋण ऋणमोचन योजना के पहले चरण में माफ कर दिए गए हैं। लेकिन ये आंकड़े इस बात की गवाही करते हैं कि बड़े राष्ट्रीयकृत बैंक छोटे किसानों को फसली ऋण देने में काफी उदासीनता बरतते हैं। किसान नेता देवप्रकाश राय कहते हैं कि छोटे किसानों को फसली ऋण देने में बड़े बैंक काफी उदासीनता बरतते हैं।
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एनआईसी मऊ से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक योजना के प्रथम चरण के कुल 4901 लाभार्थी किसानों में एसबीआई के केवल 141 किसान हैं। यह स्थिति तब है जब प्राय: अधिकांश समीक्षा बैठकों में एसबीआई की खराब प्रगति पर असंतोष जाहिर करते हुए जिलाधिकारी द्वारा किसानों को कर्ज देने में बेहतर प्रगति लाने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। किसानों को फसली ऋण देने के मामले में जिले के लीड बैंक यूनियन बैंक आफ इंडिया की भूमिका सबसे बेहतर रही है। इस बैंक ने प्रथम चरण में आने वाले कुल 1834 किसानों को फसली ऋण दिया था। जबकि दूसरे नंबर पर काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक की ओर से भी 1236 किसानों को फसली ऋण दिया गया था।
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बलिया जिले से पृथक कर मऊ जिले में शामिल किए गए रतनपुरा ब्लाक के अंतर्गत महज सात शाखाओं के बूते पूर्वांचल ग्रामीण बैंक ने भी किसानों को फसली ऋण देने में रुचि दिखाई है। इस बैंक से फसली ऋण लेने वाले कुल 503 किसान इस योजना से लाभान्वित हुए हैं। जबकि इलाहाबाद बैंक ने भी 598 किसानों को फसली ऋण दिया था। फसली ऋण देने में कंजूसी तो पंजाब नेशनल बैंक और बैंक आफ बड़ौदा ने भी की है इन दोनों बैंकों ने प्रथम चरण में लाभ पाने केवल क्रमश:164 और123 किसानों को ही फसली ऋण दिया था। शेष अन्य आठ बैंकों की स्थिति और भी दयनीय है। प्रथम चरण में कारपोरेशन बैंक से 82, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया 80 ओरिएंटल बैंक 65 और बैंक आफ इंडिया ने महज 28 किसानों को फसली ऋण दिया था। इनके अलावा केनरा बैंक ने 22, सिंडिकेट बैंक ने 12 ,आईडीबीआई ने 11 और देना बैंक ने केवल दो किसानों को फसली ऋण दिया था। इस सभी किसानों के फसली ऋण ऋणमोचन योजना के पहले चरण में माफ कर दिए गए हैं। लेकिन ये आंकड़े इस बात की गवाही करते हैं कि बड़े राष्ट्रीयकृत बैंक छोटे किसानों को फसली ऋण देने में काफी उदासीनता बरतते हैं। किसान नेता देवप्रकाश राय कहते हैं कि छोटे किसानों को फसली ऋण देने में बड़े बैंक काफी उदासीनता बरतते हैं।
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