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11 होम्योपैथी अस्पतालों पर पड़ा ताला, चिकित्सकों की कमी से बढ़ा संकट
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ललितपुर। जनपद के 24 होम्योपैथी अस्पतालों के लिए सिर्फ चार डाक्टरों की नियुक्ति की गई है, करीब ग्यारह चिकित्सालयों पर ताला लटक गया है, नौ फार्मासिस्टों के सहारे चल रहे हैं। इसमें जनपद मुख्यालय का अस्पताल भी शामिल है।
इन्हें सुचारु करने के लिए 25 चिकित्सकों की जरूरत है।
ऐलोपैथी पद्धति से उपचार के दुष्प्रभाव से बचने के लिए कई लोग होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को पसंद करते हैं। शासन द्वारा होम्योपैैथी चिकित्सा पद्घति के जिले में 24 अस्पताल खोले गए हैं। इसके पीछे मकसद निर्धन लोगों को सस्ते उपचार की सुविधा मुहैया कराना है। ग्रामीण क्षेत्र में अस्पताल तो खुले लेकिन ,डाक्टरों की कमी के चलते बंद रहते हैं। जिले में दो दर्जन फार्मासिस्टों की जरूरत है पर सिर्फ नौ फार्मासिस्ट तैंनात हैं।
जनपद के ग्राम खितवांस, समोगर, महरौनी, साढ़ूमल, भीकमपुर, सोजना, भौड़ी, वंट, बालाबेहट, थनवारा, बुढ़वार, जखौरा, ननौरा, बिजरौठा, तालबेहट, भुचेरा, गेवरा, पूराबिरधा, गदयाना, बुरागांव, भावनी, देवरान व कारीटोरन में होम्योपैथी अस्पताल हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर जिला अस्पताल में एक अस्पताल स्थापित हैं। लेकिन, इन चिकित्सालयों का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है। जबकि, शासन के मानकों के अनुसार प्रत्येक चिकित्सालय पर एक डाक्टर, एक फार्मासिस्ट, वार्डब्वॉय और स्वीपर कम चौकीदार की तैनाती अनिवार्य है। वहीं, जिला मुख्यालय पर एक महिला चिकित्सक की तैनाती होना चाहिए।
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जिले में लोगों का रुझान होम्योपैैथी की ओर भी भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन विभाग उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। इससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या में गिरावट आ रही है। आलम यह है कि जहां बीते माह में अस्पतालों में तीस हजार से अधिक मरीज आ रहे थे, जो घटकर मात्र 25 हजार तक आ गए हैं।
जिले में होम्योपैथिक डाक्टरों की कमी है। चिकित्सकों की कमी को लेकर शासन से पत्राचार किया गया है। चिकित्सक मिलते ही अस्पतालों को नियमित रुप से संचालित किया जाएगा।
- डा. लक्ष्मीकांत पांडेय
जिला होम्योपैथी अधिकारी
चिकित्सक विवेक मिश्रा पूरा विरधा में स्थायी रूप से तैनात हैं, जिन्हें तीन दिन के लिए थनवारा में अटैच किया गया है। इसी तरह नीरज चतुर्वेदी स्थायी रुप से तालबेहट हैं, जिन्हें तीन दिन के लिए खितवांस में अटैच किया गया है। चिकित्सक पुष्प प्रताप गदयाना व तीन दिन देवरान में सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सक संतोष कुमार को गेवरा व भुचेरा नियुक्त किया गया है। वहीं, फर्मासिस्टों को भी तीन-तीन दिन के लिए तैनात किया है। इनमें अखिलेश दत्त कुशवाहा जिला अस्पताल, बालाबेहट, संजय मिश्रा जिला अस्पताल व ननौरा, ओमप्रकाश बुढ़वार व वंट, चंद्रपाल गुप्ता बिजरौठा व जखौरा, रामप्यारे बुरागांव व भावनी व नारद प्रसाद दो दिन के लिए सौजना, समोगर, भौंडी इसीतरह रजा हुसैन भी साढ़ूमल, भीकमपुर, और कारीटोरन में सेवाएं दे रहे हैं। महरौनी होम्योपैैथी में लालचंद्र व देवराम में रोहत सेवाएं दे रहे हैं।
ग्राम बिजरौठा में होम्योपैथी अस्पताल स्थापित किया गया है, लेकिन इसके नियमित न खुलने से इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में अन्य अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल को शीघ्र ही नियमित रूप से संचालित किया जाए।
- दुष्यंत राजा परमार
कस्बा में खुले होम्योपैथी चिकित्सालय पर इलाज कराने के लिए गए थे, लेकिन अस्पताल बंद मिला। इससे होम्योपैथी पद्घति से इलाज नहीं करा पाया है। यह अस्पताल सप्ताह में तीन दिन बंद बना रहता है। अस्पताल में मरीजों को सुविधा के लिए नियमित संचालित कराया जाए।
- रोहित यादव
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इन्हें सुचारु करने के लिए 25 चिकित्सकों की जरूरत है।
ऐलोपैथी पद्धति से उपचार के दुष्प्रभाव से बचने के लिए कई लोग होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को पसंद करते हैं। शासन द्वारा होम्योपैैथी चिकित्सा पद्घति के जिले में 24 अस्पताल खोले गए हैं। इसके पीछे मकसद निर्धन लोगों को सस्ते उपचार की सुविधा मुहैया कराना है। ग्रामीण क्षेत्र में अस्पताल तो खुले लेकिन ,डाक्टरों की कमी के चलते बंद रहते हैं। जिले में दो दर्जन फार्मासिस्टों की जरूरत है पर सिर्फ नौ फार्मासिस्ट तैंनात हैं।
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जनपद के ग्राम खितवांस, समोगर, महरौनी, साढ़ूमल, भीकमपुर, सोजना, भौड़ी, वंट, बालाबेहट, थनवारा, बुढ़वार, जखौरा, ननौरा, बिजरौठा, तालबेहट, भुचेरा, गेवरा, पूराबिरधा, गदयाना, बुरागांव, भावनी, देवरान व कारीटोरन में होम्योपैथी अस्पताल हैं। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर जिला अस्पताल में एक अस्पताल स्थापित हैं। लेकिन, इन चिकित्सालयों का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है। जबकि, शासन के मानकों के अनुसार प्रत्येक चिकित्सालय पर एक डाक्टर, एक फार्मासिस्ट, वार्डब्वॉय और स्वीपर कम चौकीदार की तैनाती अनिवार्य है। वहीं, जिला मुख्यालय पर एक महिला चिकित्सक की तैनाती होना चाहिए।
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जिले में लोगों का रुझान होम्योपैैथी की ओर भी भले ही बढ़ रहा हो, लेकिन विभाग उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा है। इससे अस्पतालों में मरीजों की संख्या में गिरावट आ रही है। आलम यह है कि जहां बीते माह में अस्पतालों में तीस हजार से अधिक मरीज आ रहे थे, जो घटकर मात्र 25 हजार तक आ गए हैं।
जिले में होम्योपैथिक डाक्टरों की कमी है। चिकित्सकों की कमी को लेकर शासन से पत्राचार किया गया है। चिकित्सक मिलते ही अस्पतालों को नियमित रुप से संचालित किया जाएगा।
- डा. लक्ष्मीकांत पांडेय
जिला होम्योपैथी अधिकारी
चिकित्सक विवेक मिश्रा पूरा विरधा में स्थायी रूप से तैनात हैं, जिन्हें तीन दिन के लिए थनवारा में अटैच किया गया है। इसी तरह नीरज चतुर्वेदी स्थायी रुप से तालबेहट हैं, जिन्हें तीन दिन के लिए खितवांस में अटैच किया गया है। चिकित्सक पुष्प प्रताप गदयाना व तीन दिन देवरान में सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सक संतोष कुमार को गेवरा व भुचेरा नियुक्त किया गया है। वहीं, फर्मासिस्टों को भी तीन-तीन दिन के लिए तैनात किया है। इनमें अखिलेश दत्त कुशवाहा जिला अस्पताल, बालाबेहट, संजय मिश्रा जिला अस्पताल व ननौरा, ओमप्रकाश बुढ़वार व वंट, चंद्रपाल गुप्ता बिजरौठा व जखौरा, रामप्यारे बुरागांव व भावनी व नारद प्रसाद दो दिन के लिए सौजना, समोगर, भौंडी इसीतरह रजा हुसैन भी साढ़ूमल, भीकमपुर, और कारीटोरन में सेवाएं दे रहे हैं। महरौनी होम्योपैैथी में लालचंद्र व देवराम में रोहत सेवाएं दे रहे हैं।
ग्राम बिजरौठा में होम्योपैथी अस्पताल स्थापित किया गया है, लेकिन इसके नियमित न खुलने से इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में अन्य अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल को शीघ्र ही नियमित रूप से संचालित किया जाए।
- दुष्यंत राजा परमार
कस्बा में खुले होम्योपैथी चिकित्सालय पर इलाज कराने के लिए गए थे, लेकिन अस्पताल बंद मिला। इससे होम्योपैथी पद्घति से इलाज नहीं करा पाया है। यह अस्पताल सप्ताह में तीन दिन बंद बना रहता है। अस्पताल में मरीजों को सुविधा के लिए नियमित संचालित कराया जाए।
- रोहित यादव