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Hindi News ›   World ›   US FY2027 Drug List: India Named Among 23 Major Drug Transit Countries, Modi Government Efforts Welcomed

अमेरिका: अफीम पर अंकुश लगाने के लिए ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ, फिर भी ड्रग सूची में भारत का नाम क्यों?

Wed, 16 Sep 2026 10:57 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 16 Sep 2026 10:57 PM IST
सार

अमेरिका ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत समेत 23 देशों को प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या अवैध ड्रग उत्पादन वाले देशों की सूची में रखा है। हालांकि, भारत का नाम आने के साथ ही अमेरिकी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के प्रयासों की तारीफ भी की है। अमेरिका ने साफ किया कि सूची में नाम होना सरकार की विफलता का प्रमाण नहीं है। भारत को इस सूची में क्यों रखा गया और इसका मतलब क्या है?

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US FY2027 Drug List: India Named Among 23 Major Drug Transit Countries, Modi Government Efforts Welcomed
ट्रंप ने भारत के प्रयासों को लेकर क्या कहा? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका ने वित्त वर्ष 2027 के लिए उन देशों की सूची जारी की है, जिन्हें प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या अवैध ड्रग उत्पादन वाले देशों के तौर पर चिन्हित किया गया है। इस सूची में भारत समेत 23 देश शामिल हैं। अमेरिकी निर्धारण को 15 सितंबर को कांग्रेस के सामने पेश किया गया। खास बात यह है कि भारत का नाम इस सूची में होने के साथ अमेरिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की अवैध अफीम की खेती रोकने तथा सप्लाई चेन की सुरक्षा मजबूत करने की कोशिशों की सराहना भी की है।

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अमेरिकी निर्धारण में साफ किया गया है कि इस सूची में किसी देश का नाम होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि वहां की सरकार ड्रग तस्करी रोकने में नाकाम रही है। किसी देश को भौगोलिक, कारोबारी और आर्थिक परिस्थितियों के कारण भी इस सूची में शामिल किया जा सकता है, अगर वहां से ड्रग्स या उन्हें बनाने वाले रसायनों की आवाजाही या उत्पादन की स्थिति बनती हो। इसलिए भारत का इस सूची में शामिल होना अपने आप में यह निष्कर्ष नहीं देता कि अमेरिका भारत को ड्रग नियंत्रण में विफल मानता है।

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भारत को लेकर अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिकी दस्तावेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की अवैध अफीम की खेती से निपटने और सप्लाई चेन की विश्वसनीयता मजबूत करने की कोशिशों का स्वागत किया गया है। अमेरिका ने भारत के साथ ड्रग नीति के क्षेत्र में आगे भी सहयोग जारी रखने की बात कही है। यानी सूची में भारत का नाम होने के साथ दोनों देशों के बीच नशीली दवाओं के खिलाफ सहयोग का उल्लेख भी किया गया है। अमेरिका-भारत ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क के जरिए आगे सहयोग जारी रखने की बात कही गई है।

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चीन और पाकिस्तान का नाम भी सूची में क्यों आया?

चीन और पाकिस्तान भी वित्त वर्ष 2027 की सूची में शामिल हैं। अमेरिकी निर्धारण में चीन का उल्लेख उन रसायनों के उत्पादन को लेकर किया गया है, जिनका इस्तेमाल अवैध सिंथेटिक ड्रग्स बनाने में किया जाता है। अमेरिका के अनुसार, चीन फेंटेनाइल, मेथामफेटामाइन और दूसरे सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई रसायनों का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है। वहीं पाकिस्तान को भी प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या अवैध ड्रग उत्पादन वाले देशों में रखा गया है।

किन देशों को प्रयासों में स्पष्ट विफल बताया गया?

भारत, चीन और पाकिस्तान समेत कुल 23 देशों को वित्त वर्ष 2027 की सूची में रखा गया है। इनमें अफगानिस्तान, बहामास, बेलीज, बोलीविया, बर्मा, चीन, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, भारत, जमैका, लाओस, मेक्सिको, निकारागुआ, पाकिस्तान, पनामा, पेरू और वेनेजुएला शामिल हैं। अलग से अमेरिका ने अफगानिस्तान, बोलीविया, बर्मा और कोलंबिया को पिछले 12 महीनों में नशीली दवाओं के खिलाफ अपने दायित्वों को पूरा करने में ‘स्पष्ट रूप से विफल’ बताया है।

भारत के लिए इस सूची में नाम आने का क्या मतलब है?

इस सूची में भारत का नाम आने को सीधे तौर पर ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में विफलता के तौर पर नहीं देखा गया है। अमेरिकी निर्धारण में खुद कहा गया है कि सूची में शामिल होने के कई कारण हो सकते हैं। किसी देश की भौगोलिक स्थिति, व्यापारिक गतिविधियां और आर्थिक परिस्थितियां ड्रग्स या उनके लिए इस्तेमाल होने वाले रसायनों की आवाजाही को प्रभावित कर सकती हैं। भारत के मामले में अमेरिका ने अवैध अफीम की खेती रोकने और सप्लाई चेन को मजबूत करने के प्रयासों का विशेष रूप से स्वागत किया है। इससे साफ है कि सूची में शामिल करने के साथ भारत के साथ चल रहे नशीली दवाओं के खिलाफ सहयोग को भी अमेरिकी निर्धारण में जगह दी गई है।

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