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मनमाने तरीके से दौड़ रहीं बसें, यात्री हो रहे परेशान
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मनमाने तरीके से दौड़ रहीं बसें, यात्री परेशान
ललितपुर। जिले में निजी बस संचालक मनमाने तरीके से बसों का संचालन कर रहे हैं। जिस वजह से यात्रियों को बस पकड़ने में परेशानी हो रही है। कई बार निर्धारित स्टाफ पर बस खड़ी नहीं होने की स्थिति में यात्री उनका इंतजार करते रहते हैं। वहीं, बसों के बाईपास व अंदर जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से निजी बसों से यात्रियों को यात्रा की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी अंजान बने है। इसका खामियाजा आम लोगों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है। प्रदेश में बुंदेलखंड सबसे पिछड़ा जिला माना जाता है। यहां पर यातायात की सुविधाएं दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं। मुख्यालय से प्रतिदिन लगभग डेढ़ सौ से अधिक बसों का संचालन किया जाता है। इनमें अधिकांश बसें झांसी ललितपुर मार्ग पर संचालित हो रहीं हैं। लेकिन इनमें अधिकांश बसें मनमाने तरीके से संचालित हो रहीं है। जिससे निजी बसों से यातायात की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसी ही स्थिति जिले के कस्बा तालबेहट की बनी हुई है। यहां से गुजरने वाली अधिकांश बसें बस संचालकों की मनमानी की भेंट चढ़ रहीं हैं। जहां निजी बसों की सेवा सुबह सात बजे से शुरु होती है। सुबह के समय कुछ बसें कस्बा के अंदर से आतीं हैं। जो सुबह आठ बजे के बाद कुछ ही बसें अंदर से आ रहीं हैं। जिससे सवारियों को यात्रा करने में परेशानी हो रही है। वहीं अधिकांश बसें नानस्टाफ का बोर्ड लगाकर बाईपास से होकर गुजर रहीं है। हद तो तब हो गई जब इन नान स्टाफ बसों में सवारियों की संख्या कम होने पर शहर के अंदर से आतीं हैं। जिससे इन बसों की मनमानी स्पष्ट नजर आती हैं तो कई बार कुछ यात्रि निर्धारित स्टाप पर खड़े होने के बाद भी बसों को खड़ा नहीं किया जाता है और बस गुजर जाती है। ऐसे में यात्री बस को ताकते रह जाते हैं। जिम्मेेदार अधिकारियों की अनदेखी का फायदा बस संचालक उठा रहे हैं। जिसका खामियाजा आम लोगों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
कस्बा से गुजरने वाली अधिकांश बसें लुकाछुपी का खेल खेल रहीं हैं। कई बार बस अंदर से आती है तो कईयों बार बाईपास से गुजर रहीं हैं। जिससे बस के आने की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती है। जिससे यात्रियों को बस के चक्कर में परेशान होना पड़ता है।
बसों के आने जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती है। कभी बसों अंदर तो कभी बाईपास से गुजरने के कारण यात्रि भी परेशान रहते हैं। ऐसे में सवारियों को यात्रा करने के लिए बाईपास पहुंचना पड़ता है। तब निजी बसों का सहारा मिल पाता है।
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निजी बसों में बसों के आने व जाने का समय भी कुछ स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। बसे अपने निर्धारित समय से आगे व पीछे चल रहीं है। ऐसे में सवारियों को भ्रम की स्थिति बनी रहती है। जिससे अधिकांश सवारियों को भरी बस में यात्रा करने के लिए परेशान होना पड़ता है।
सुधीर कपूर
पूर्व में लोहिया बसों का संचालन किया गया था। इनमें कुछ बसों को बंद कर दिया गया है। जिससे यात्रियों को निजी बसों का सहारा अधिक लेना पड़ता है। इनमें भी कम बसों के अंदर आने के कारण यात्रा करने में परेशानी हो जाती है।
सुशील सेन
झांसी ललितपुर बसों के परमिट झांसी से जारी किए जाते हैं। जिससे यहां पर बसों की परमिट की स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है। हालांकि बसों के बाईपास जाने का मामला सामने आया है। जिसकी जांच कर अभियान चलाया जाएगा। जिसमें नियम विरुद्घ चलते पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
-सत्येंद्र कुमार, सहायक परिवहन अधिकारी, ललितपुर
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ललितपुर। जिले में निजी बस संचालक मनमाने तरीके से बसों का संचालन कर रहे हैं। जिस वजह से यात्रियों को बस पकड़ने में परेशानी हो रही है। कई बार निर्धारित स्टाफ पर बस खड़ी नहीं होने की स्थिति में यात्री उनका इंतजार करते रहते हैं। वहीं, बसों के बाईपास व अंदर जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से निजी बसों से यात्रियों को यात्रा की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी अंजान बने है। इसका खामियाजा आम लोगों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है। प्रदेश में बुंदेलखंड सबसे पिछड़ा जिला माना जाता है। यहां पर यातायात की सुविधाएं दुरुस्त नहीं हो पा रही हैं। मुख्यालय से प्रतिदिन लगभग डेढ़ सौ से अधिक बसों का संचालन किया जाता है। इनमें अधिकांश बसें झांसी ललितपुर मार्ग पर संचालित हो रहीं हैं। लेकिन इनमें अधिकांश बसें मनमाने तरीके से संचालित हो रहीं है। जिससे निजी बसों से यातायात की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसी ही स्थिति जिले के कस्बा तालबेहट की बनी हुई है। यहां से गुजरने वाली अधिकांश बसें बस संचालकों की मनमानी की भेंट चढ़ रहीं हैं। जहां निजी बसों की सेवा सुबह सात बजे से शुरु होती है। सुबह के समय कुछ बसें कस्बा के अंदर से आतीं हैं। जो सुबह आठ बजे के बाद कुछ ही बसें अंदर से आ रहीं हैं। जिससे सवारियों को यात्रा करने में परेशानी हो रही है। वहीं अधिकांश बसें नानस्टाफ का बोर्ड लगाकर बाईपास से होकर गुजर रहीं है। हद तो तब हो गई जब इन नान स्टाफ बसों में सवारियों की संख्या कम होने पर शहर के अंदर से आतीं हैं। जिससे इन बसों की मनमानी स्पष्ट नजर आती हैं तो कई बार कुछ यात्रि निर्धारित स्टाप पर खड़े होने के बाद भी बसों को खड़ा नहीं किया जाता है और बस गुजर जाती है। ऐसे में यात्री बस को ताकते रह जाते हैं। जिम्मेेदार अधिकारियों की अनदेखी का फायदा बस संचालक उठा रहे हैं। जिसका खामियाजा आम लोगों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
कस्बा से गुजरने वाली अधिकांश बसें लुकाछुपी का खेल खेल रहीं हैं। कई बार बस अंदर से आती है तो कईयों बार बाईपास से गुजर रहीं हैं। जिससे बस के आने की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती है। जिससे यात्रियों को बस के चक्कर में परेशान होना पड़ता है।
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बसों के आने जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती है। कभी बसों अंदर तो कभी बाईपास से गुजरने के कारण यात्रि भी परेशान रहते हैं। ऐसे में सवारियों को यात्रा करने के लिए बाईपास पहुंचना पड़ता है। तब निजी बसों का सहारा मिल पाता है।
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निजी बसों में बसों के आने व जाने का समय भी कुछ स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। बसे अपने निर्धारित समय से आगे व पीछे चल रहीं है। ऐसे में सवारियों को भ्रम की स्थिति बनी रहती है। जिससे अधिकांश सवारियों को भरी बस में यात्रा करने के लिए परेशान होना पड़ता है।
सुधीर कपूर
पूर्व में लोहिया बसों का संचालन किया गया था। इनमें कुछ बसों को बंद कर दिया गया है। जिससे यात्रियों को निजी बसों का सहारा अधिक लेना पड़ता है। इनमें भी कम बसों के अंदर आने के कारण यात्रा करने में परेशानी हो जाती है।
सुशील सेन
झांसी ललितपुर बसों के परमिट झांसी से जारी किए जाते हैं। जिससे यहां पर बसों की परमिट की स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है। हालांकि बसों के बाईपास जाने का मामला सामने आया है। जिसकी जांच कर अभियान चलाया जाएगा। जिसमें नियम विरुद्घ चलते पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
-सत्येंद्र कुमार, सहायक परिवहन अधिकारी, ललितपुर