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जिला पंचायत में अविश्वास प्रस्ताव पर होगी चर्चा 29 को
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जिला पंचायत में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा 29 को
ललितपुर। जिलाधिकारी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ पंद्रह सदस्यों द्वारा दिए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तिथि तय कर दी है। साथ ही सभी सदस्यों को पत्र भेकर जिला पंचायत में 29 जून को सुबह 11 बजे उपस्थित होने के लिए कहा है। इसकी सूचना जिला पंचायत के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा कर दी गई है। इससे जिले में सियासी पारा चढ़ने लगा है।
जिला पंचायत की राजनीति में समाजवादी पार्टी की मजबूत पकड़ रही है। वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता यादव इसी पार्टी से आती हैं। भाजपा यहां लंबे समय से अपना भविष्य तलाश रही है। जहां जिले की दोनों विधानसभाएं, सांसद व एक नगर पंचायत को छोड़कर सभी नगर पंचायतें भाजपा के पास हैं। वहीं, जिला पंचायत अभी भी भाजपा से दूर बनी हुई है। भाजपा के केवल दो जिला पंचायत सदस्य हैं, जिससे वह चाहते हुए भी कुछ कर नहीं पा रही है।
मौजूदा घटनाक्रम में भाजपा इसका फायदा उठाने की फिराक में है। इस वजह से भाजपा के दोनों जिला पंचायत सदस्य समाजवादी पार्टी के असंतुष्ट खेमे के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता जिला पंचायत की कुर्सी को बचाने में जुटे हैं। इन सबके बीच जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने जिला पंचायत के 21 में से 15 सदस्यों द्वारा दिए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तिथि 29 जून तय कर दी है। इससे जिले की राजनीति में गर्माहट आ गई है।
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उधर, समाजवादी पार्टी की जिलाध्यक्ष ज्योति सिंह को उम्मीद है कि जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता यादव की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। 29 जून आने से पहले ही रूठे सदस्यों को मना लिया जाएगा।
इन आरोपों पर होगी चर्चा
जिला पंचायत के असंतुष्ट सदस्यों ने जिलाधिकारी को दिए अविश्वास प्रस्ताव में आरोप लगाया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने पद एवं कर्तव्यों का वैधानिक रूप से निर्वाह नहीं किया है। जिला पंचायत को भ्रष्टाचार एवं भाई- भतीजावाद का अड्डा बना दिया है। ठेकेदारी के पंजीयन में तय समयावधि में 52 आवेदन पत्र प्राप्त हुए थे, इनमें से 37 आवेदन पत्रों को स्वीकृत कर पंजीयन/नवीनीकरण किया। अवशेष आवेदकों को चेहेतों को लाभ दिलाने के लिए वंचित कर दिया। महरौनी नगर में 22 दुकानों का निर्माण कराकर चहेतों को उनका आवंटन किया गया है। वर्ष 2017-18 की खनिज्रवेश कर एवं तहबाजारी में गंभीर अनियमितताएं कर चहेतों को ठेका दे दिए गए। जिला पंचायत द्वारा खरीदे गए दो ट्रैक्टरों से निजी कार्य कराया जा रहा है। चहेतों ठेकेदारों से साठगांठ किए हुए हैं जबकि यही ठेकेदार उनके परिवार की फर्म के साझेदार हैं। जिला पंचायत की एंबेस्डर कार की जगह निजी वाहन का उपयोग कर डीजल व खर्च दर्शा रही हैं। इस तरह की कार्यशैली के चलते अविश्वास प्रस्ताव देने के लिए मजबूर होना पड़ा। अविश्वास प्रस्ताव जताने वाले जिला पंचायत सदस्यों में जयश्री, अतर सिंह, चंद्रशेखर, अंजू उर्फ बबीता, बेटीबाई, बबीता कुमारी, सुधा सोनी, रचना, वंशीधर, कृष्णा राजे, सुखदेन, कमलेश, खिलान सिंह, वंदना देवी, उदय प्रताप सिंह हैं।
ऐसे बढ़ेगी प्रक्रिया
तय तिथि पर जिला पंचायत के सभागार में उपस्थित जिला पंचायत सदस्य लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अपना-अपना पक्ष रखते हुए बहस करेंगे। इस दौरान देखा जाएगा कि अध्यक्ष पर लगाए गए आरोपों पर जिला पंचायत सहमत है या नहीं। यदि जिला पंचायत सदस्य आरोपों पर सहमत दिखे तो फिर मतदान कराया जाएगा।
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ललितपुर। जिलाधिकारी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ पंद्रह सदस्यों द्वारा दिए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तिथि तय कर दी है। साथ ही सभी सदस्यों को पत्र भेकर जिला पंचायत में 29 जून को सुबह 11 बजे उपस्थित होने के लिए कहा है। इसकी सूचना जिला पंचायत के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा कर दी गई है। इससे जिले में सियासी पारा चढ़ने लगा है।
जिला पंचायत की राजनीति में समाजवादी पार्टी की मजबूत पकड़ रही है। वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता यादव इसी पार्टी से आती हैं। भाजपा यहां लंबे समय से अपना भविष्य तलाश रही है। जहां जिले की दोनों विधानसभाएं, सांसद व एक नगर पंचायत को छोड़कर सभी नगर पंचायतें भाजपा के पास हैं। वहीं, जिला पंचायत अभी भी भाजपा से दूर बनी हुई है। भाजपा के केवल दो जिला पंचायत सदस्य हैं, जिससे वह चाहते हुए भी कुछ कर नहीं पा रही है।
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मौजूदा घटनाक्रम में भाजपा इसका फायदा उठाने की फिराक में है। इस वजह से भाजपा के दोनों जिला पंचायत सदस्य समाजवादी पार्टी के असंतुष्ट खेमे के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता जिला पंचायत की कुर्सी को बचाने में जुटे हैं। इन सबके बीच जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने जिला पंचायत के 21 में से 15 सदस्यों द्वारा दिए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तिथि 29 जून तय कर दी है। इससे जिले की राजनीति में गर्माहट आ गई है।
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उधर, समाजवादी पार्टी की जिलाध्यक्ष ज्योति सिंह को उम्मीद है कि जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता यादव की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। 29 जून आने से पहले ही रूठे सदस्यों को मना लिया जाएगा।
इन आरोपों पर होगी चर्चा
जिला पंचायत के असंतुष्ट सदस्यों ने जिलाधिकारी को दिए अविश्वास प्रस्ताव में आरोप लगाया है कि जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने पद एवं कर्तव्यों का वैधानिक रूप से निर्वाह नहीं किया है। जिला पंचायत को भ्रष्टाचार एवं भाई- भतीजावाद का अड्डा बना दिया है। ठेकेदारी के पंजीयन में तय समयावधि में 52 आवेदन पत्र प्राप्त हुए थे, इनमें से 37 आवेदन पत्रों को स्वीकृत कर पंजीयन/नवीनीकरण किया। अवशेष आवेदकों को चेहेतों को लाभ दिलाने के लिए वंचित कर दिया। महरौनी नगर में 22 दुकानों का निर्माण कराकर चहेतों को उनका आवंटन किया गया है। वर्ष 2017-18 की खनिज्रवेश कर एवं तहबाजारी में गंभीर अनियमितताएं कर चहेतों को ठेका दे दिए गए। जिला पंचायत द्वारा खरीदे गए दो ट्रैक्टरों से निजी कार्य कराया जा रहा है। चहेतों ठेकेदारों से साठगांठ किए हुए हैं जबकि यही ठेकेदार उनके परिवार की फर्म के साझेदार हैं। जिला पंचायत की एंबेस्डर कार की जगह निजी वाहन का उपयोग कर डीजल व खर्च दर्शा रही हैं। इस तरह की कार्यशैली के चलते अविश्वास प्रस्ताव देने के लिए मजबूर होना पड़ा। अविश्वास प्रस्ताव जताने वाले जिला पंचायत सदस्यों में जयश्री, अतर सिंह, चंद्रशेखर, अंजू उर्फ बबीता, बेटीबाई, बबीता कुमारी, सुधा सोनी, रचना, वंशीधर, कृष्णा राजे, सुखदेन, कमलेश, खिलान सिंह, वंदना देवी, उदय प्रताप सिंह हैं।
ऐसे बढ़ेगी प्रक्रिया
तय तिथि पर जिला पंचायत के सभागार में उपस्थित जिला पंचायत सदस्य लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर अपना-अपना पक्ष रखते हुए बहस करेंगे। इस दौरान देखा जाएगा कि अध्यक्ष पर लगाए गए आरोपों पर जिला पंचायत सहमत है या नहीं। यदि जिला पंचायत सदस्य आरोपों पर सहमत दिखे तो फिर मतदान कराया जाएगा।